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कैसे कप्तानी मिलने के बाद 'खूंखार' बने ईशान किशन? विकेटकीपर ने खोले राज

तीन साल पहले ईशान किशन को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर किया गया था. लेकिन इसके बाद उन्होंने धमाकेदार वापसी की है.

कैसे कप्तानी मिलने के बाद 'खूंखार' बने ईशान किशन? विकेटकीपर ने खोले राज
ईशान किशन ने बताया है कि कैसे कप्तानी मिलने से वो बेहतर बने

ईशान किशन ने सोमवार को कहा कि 2024 में झारखंड की कप्तानी संभालने से उन्हें एक इंसान, एक क्रिकेटर और एक लीडर के तौर पर आगे बढ़ने में मदद मिली और इसने उन्हें उनके बेपरवाह दिनों से दूर रखा. 2023 के आखिर में बीसीसीआई का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट गंवाने के बाद, किशन अपनी राज्य की टीम में लौट आए और कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली, जिसे वह उपलब्ध होने पर खुशी-खुशी निभाते रहते हैं. उतार-चढ़ाव भरे दौर के बाद, किशन अब भारतीय टीम में लौट आए हैं, हालांकि अभी सिर्फ व्हाइट-बॉल फॉर्मेट में.

दलीफ ट्रॉफी फाइनल के दूसरे दिन का खेल  खत्म होने के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में किशन ने कहा,"आपको जिम्मेदारी लेनी पड़ती है. अगर आप अभी ज़िम्मेदारी नहीं लेंगे, तो कब लेंगे? ऐसा तो नहीं है कि मैं 22 साल का हूं और अभी-अभी टीम में आया हूं. जब हम बहुत युवा थे, तो हम रन बनाने के लिए अपने सीनियर खिलाड़ियों पर निर्भर रहते थे और सोचते थे कि हम बस उनका साथ देंगे."

उन्होंने आगे कहा,"लेकिन अब, टीम का एक पक्का हिस्सा होने के नाते, मुझे लगता है कि रन बनाने और टीम के स्कोर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाना मेरे लिए ज़रूरी है."

ईस्ट ज़ोन की कप्तानी करते हुए, किशन ने दलीप ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में साउथ ज़ोन के ख़िलाफ़ शानदार 270 रन बनाए और अपनी टीम को पहली पारी में 708 रन तक पहुंचाया. उन्होंने कहा,"इस पूरे प्रोसेस से गुज़रने पर काफ़ी पर्सनल ग्रोथ होती है, और भले ही आपको तुरंत इसका एहसास न हो, लेकिन आपकी सोच पूरी तरह बदल जाती है और आप चीज़ों को लेकर ज़्यादा शांत हो जाते हैं."

तो, कप्तानी ने 28 साल के इस खिलाड़ी को कैसे बदला है? इस पर ईशान ने कहा,"मुझे लगता है कि जब आप टीम के कप्तान होते हैं, तो सबसे पहली चीज़ होती है हालात की समझ... आपको पूरे दिन मैदान पर अलर्ट रहना होता है ताकि आप समझ सकें कि क्या हो रहा है और क्या नहीं। आपको अपने सभी टीम के साथियों का ध्यान रखना होता है."

उन्होंने आगे कहा,"ऐसी कई छोटी-छोटी चीज़ें हैं जिन्हें हम अक्सर अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नज़रअंदाज़ कर देते हैं-जैसे बस आना, नेट्स में बैटिंग करना और चले जाना. आप अपने खिलाड़ियों पर ध्यान नहीं देते या उनकी मदद करने की कोशिश नहीं करते कि वे कैसे बेहतर हो सकते हैं."

विकेटकीपर बल्लेबाज ने आगे कहा,"लेकिन जब आप कप्तान होते हैं, तो उनकी मदद करना आपकी ज़िम्मेदारी बन जाती है, क्योंकि अगर आपके साथी खिलाड़ी बेहतर हो रहे हैं, तो आख़िरकार आप टीम के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे."

बाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ ने अपनी सोच के मुख्य उदाहरण के तौर पर अपने दोहरे शतक का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा,"यह एक बहुत अच्छी पारी थी क्योंकि मैंने हमेशा टीम के लक्ष्य को प्राथमिकता दी. कई मौकों पर मैं अटैकिंग शॉट्स खेल सकता था, लेकिन मुझे लगता है कि जब आप इतने बड़े मंच पर बैटिंग कर रहे हों, तो टीम ने कुल स्कोर के बारे में जो फ़ैसला किया है, उसे प्राथमिकता देना बहुत ज़रूरी है."

ईशान ने आगे कहा,"हमने टॉस जीता और पहले बैटिंग करने का फ़ैसला किया, और योजना बोर्ड पर एक बड़ा स्कोर खड़ा करने की थी. इसलिए, मुझे बहुत संयम दिखाना था और अच्छे शॉट्स चुनने थे. इसलिए, मैं इस पारी से सच में बहुत खुश हूं."

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