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दलीप ट्रॉफी फाइनल में ऐतिहासिक 270 रन की पारी, ईशान किशन ने बताया अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज

दिलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में 270 रन की ऐतिहासिक पारी खेलने वाले ईशान किशन ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज बताया है.

दलीप ट्रॉफी फाइनल में ऐतिहासिक 270 रन की पारी, ईशान किशन ने बताया अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज
ईशान किशन ने बताया अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज

दिलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में साउथ जोन के खिलाफ 270 रन की ऐतिहासिक पारी खेलने वाले ईशान किशन का मानना है कि उनकी सफलता के पीछे कोई नया शॉट या तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि उनकी बदली हुई सोच है. भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर होने और मुश्किल दौर से गुजरने के बाद उन्होंने खुद को एक नियम सिखाया, "ज्यादा मत सोचो और खुद से कोई उम्मीद मत रखो." यही मंत्र अब उनके खेल की सबसे बड़ी ताकत बन गया है.

टीम से बाहर होने के बाद हुआ सबसे बड़ा एहसास

ईशान ने कहा कि जब वह भारतीय टीम से बाहर हुए तो उन्हें महसूस हुआ कि एक बल्लेबाज का असली काम सिर्फ रन बनाना है. बाकी सारी बातें दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं. उन्होंने कहा कि जितना ज्यादा खिलाड़ी नतीजों और उम्मीदों के बारे में सोचता है, उतना ही उसका ध्यान अपने खेल से भटकता है. इसलिए उन्होंने खुद को उन विचारों से दूर किया और केवल बल्लेबाजी पर फोकस रखा.

‘बल्लेबाज का काम सिर्फ गेंद देखना और प्रतिक्रिया देना है'

ईशान के मुताबिक आज उनकी बल्लेबाजी पहले से ज्यादा सहज इसलिए है क्योंकि उनका दिमाग पहले से ज्यादा साफ है. उनका मानना है कि बल्लेबाज को मैदान पर जाकर सिर्फ गेंद को देखना चाहिए और उसी के हिसाब से प्रतिक्रिया देनी चाहिए. जब दिमाग में चयन, रिकॉर्ड या प्रदर्शन की चिंता नहीं होती तो खेल अपने आप बेहतर हो जाता है.

कॉन्ट्रैक्ट खोया, आलोचनाएं झेलीं, फिर खुद को दोबारा बनाया

साल 2023 में ईशान भारतीय टीम के नियमित सदस्य थे, लेकिन कुछ घटनाक्रम ऐसे हुए कि उन्हें बीसीसीआई का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट भी गंवाना पड़ा. कई खिलाड़ियों के लिए यह झटका करियर को पटरी से उतार सकता था, लेकिन ईशान ने इसे खुद को दोबारा गढ़ने का मौका बना लिया. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी की, रणजी ट्रॉफी में बड़े रन बनाए और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में झारखंड को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई.

घरेलू क्रिकेट ने सिखाए सबसे बड़े सबक

ईशान का कहना है कि घरेलू क्रिकेट में वापसी उनके लिए सजा नहीं बल्कि सीख थी. भारतीय टीम में लगातार खेलते हुए कई बार खिलाड़ी एक तय लय में आ जाता है और उसकी प्रगति रुक जाती है. लेकिन जब आप वापस घरेलू क्रिकेट में लौटते हैं तो सब कुछ शून्य से शुरू होता है. यहीं आपको समझ आता है कि पहले क्या कमियां थीं और किस तरह बेहतर बनना है.

फाइनल में क्या थी सफलता की योजना?

फाइनल में उतरने से पहले ईशान ने खुद को रेड-बॉल क्रिकेट के लिए तैयार किया. उन्होंने स्वीकार किया कि लगातार टी20 खेलने के कारण शुरुआत में उनकी बल्लेबाजी पर असर पड़ा था. लेकिन चेन्नई में उन्होंने एक बेहद साधारण योजना अपनाई, साझेदारियां बनाते रहो और क्रीज पर टिके रहो. उनका लक्ष्य एक-एक करके 50 रन की साझेदारियां बनाना था, न कि किसी बड़े स्कोर के बारे में सोचना.

270 रन की पारी ने दिया बड़ा संदेश

ईशान किशन की यह 270 रन की पारी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है. यह उस खिलाड़ी की वापसी की कहानी है जिसने आलोचनाएं सुनीं, टीम से बाहर हुआ, कॉन्ट्रैक्ट गंवाया और फिर खुद को नए सिरे से तैयार किया. दिलीप ट्रॉफी फाइनल में खेली गई यह पारी बताती है कि कभी-कभी क्रिकेट में सबसे बड़ा बदलाव तकनीक में नहीं, बल्कि सोच में आता है. और ईशान के लिए वह सोच है, "ज़्यादा मत सोचो, कोई उम्मीद मत रखो और बस रन बनाओ."

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Ishan Pranav Kumar Pandey Kishan, India, Cricket
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