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'भैया, कुछ जल रहा है...' FIR में दावा- ड्राइवर बोला, 'मरना है तो मरो' ; कुछ देर बाद चली गई 9 की जान

यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड की FIR में चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं. शिकायत के मुताबिक यात्रियों ने पहले ही जलने की बदबू और आग की आशंका जताई थी, लेकिन चालक-परिचालक ने बस नहीं रोकी. पढ़िए FIR में दर्ज पूरी कहानी.

बस में जलने की बदबू आ रही थी...यात्रियों ने ड्राइवर-कंडक्टर को कहा- भैया कुछ जल रहा है..चेक करो. यात्रियों को जवाब मिला- ये बदबू आती रहती है. यात्री नहीं माने फिर कहा लेकिन ड्राइवर-कंडक्टर हंसी में बात उड़ाते रहे और बीड़ी पीते रहे...इसी दौरान ड्राइवर सीट के पास अचानक आग की लपटें निकलने लगी. जिसे देखकर घबराए लोगों ने शोर मचाया और बस को रोकने के लिए कहा. लेकिन ड्राइवर-कंडक्टर ने उन्हें कहा- मरना है तो मरो...बस नहीं रोकेंगे...इसके कुछ ही देर बाद बस आग का गोला बन गई और 9 लोगों की जिंदगी खत्म हो गई. ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस भीषण बस अग्निकांड की FIR में दर्ज यह कहानी कई सवाल खड़े करती है. सवाल यह कि जब खतरे की चेतावनी पहले ही मिल गई थी तो बस क्यों नहीं रोकी गई? इस रिपोर्ट में पढ़िए, चश्मदीदों के हवाले से FIR में आखिर क्या-क्या दर्ज है." 

पहले बदबू आई, फिर लपटें उठीं

जेवर थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, शिकायतकर्ता बद्रीप्रसाद 23 सितंबर की रात दिल्ली के कश्मीरी गेट से राज कल्पना ट्रैवल्स की बस में सवार हुए थे. बस नंबर BR32PA8647 में करीब 30 से 35 यात्री मौजूद थे.रात करीब 11:30 बजे बस यमुना एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 33 के पास पहुंची. तभी ड्राइवर केबिन की तरफ से जलने की तेज बदबू आने लगी. कुछ यात्रियों को शक हुआ कि बस में कुछ गड़बड़ है. यात्रियों ने तुरंत चालक और परिचालक को इसकी जानकारी दी. उनसे बस रोककर जांच करने को कहा गया. लेकिन FIR के मुताबिक, उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया.

'ऐसी बदबू तो आती रहती है'

FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, जब यात्रियों ने जलने की बदबू को लेकर चिंता जताई तो चालक ने उसे सामान्य बात बताकर टाल दिया.शिकायतकर्ता का आरोप है कि चालक ने कहा कि बस में ऐसी बदबू आती रहती है. इसके बावजूद बस नहीं रोकी गई. न कोई जांच हुई और न ही यात्रियों को भरोसे में लिया गया. FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि चालक और परिचालक अपने केबिन में ही बैठे रहे और हालात की गंभीरता को समझने की कोशिश तक नहीं की.यात्रियों का डर जल्द ही सच साबित हो गया. FIR के मुताबिक, कुछ ही देर बाद ड्राइवर सीट के पास से अचानक आग की तेज लपटें निकलने लगीं. बस के अंदर बैठे लोग घबरा गए. चारों तरफ चीख-पुकार मच गई.लोगों ने चालक से बस रोकने की मांग की. सभी को समझ आ गया था कि हालात हाथ से निकलते जा रहे हैं. लेकिन शिकायत के अनुसार, तब भी बस नहीं रोकी गई.

आग फैलती गई, धुआं भरता गया

इस FIR में सबसे गंभीर आरोप चालक और परिचालक के व्यवहार को लेकर लगाया गया है.शिकायतकर्ता का कहना है कि जब यात्री शोर मचाकर बस रुकवाने की कोशिश कर रहे थे, तब चालक और परिचालक उनसे उलझ रहे थे.FIR में आरोप लगाया गया है कि दोनों यात्रियों को धमका रहे थे. शिकायत में यहां तक कहा गया है कि उन्होंने कथित तौर पर कहा, "मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे." इस बीच आग तेजी से फैलने लगी. देखते ही देखते लपटों ने बस के अगले हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया.कुछ ही देर में पूरी बस धुएं से भर गई. लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. कई यात्री नींद से अचानक उठे तो उन्हें समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है.

बस के अंदर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.

अफरातफरी के बीच किसी ने शीशा तोड़ा, कोई बाहर निकल ही नहीं पाया. जब बस रुकी तो लोग जान बचाने के लिए हर तरफ भागने लगे.FIR के मुताबिक, कुछ यात्री किसी तरह शीशे तोड़कर बाहर निकल आए. कुछ लोगों ने जान पर खेलकर खुद को बचा लिया. लेकिन सभी इतने भाग्यशाली नहीं थे. आग और धुएं के बीच कई यात्री फंस गए. कुछ बाहर निकलने का रास्ता नहीं खोज पाए. कुछ धुएं की वजह से बेहोश हो गए. यही वे पल थे जिन्होंने इस हादसे को एक भीषण त्रासदी में बदल दिया.अस्पताल पहुंचने पर 9 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया.गंभीर रूप से झुलसे लोगों को इलाज के लिए जेवर के कैलाश अस्पताल ले जाया गया.  FIR में बताया गया है कि आग ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली. यात्रियों के बैग, कपड़े, मोबाइल फोन और दूसरे सामान भी जलकर राख हो गए. बस के लगेज बॉक्स और छत पर रखा सामान भी आग से नहीं बच सका.जो लोग जिंदा बाहर निकल आए, उनमें से कई लोग सिर्फ पहने हुए कपड़ों में ही बच पाए.

चालक और परिचालक पर केस दर्ज

इस मामले में जेवर थाने में बस संख्या BR32PA8647 के अज्ञात चालक और परिचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 281, 125(बी), 105 और 351(3) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. FIR की पूरी कहानी एक ही सवाल पर आकर टिकती है. अगर यात्रियों की शिकायत को समय रहते गंभीरता से लिया जाता... अगर बस रोककर जांच कर ली जाती... अगर खतरे की पहली चेतावनी पर कार्रवाई होती... तो क्या 9 जानें बच सकती थीं? शिकायतकर्ता का दावा है कि यात्रियों ने खतरे की सूचना पहले ही दे दी थी. इसके बावजूद जरूरी कदम नहीं उठाए गए. FIR में इसी कथित लापरवाही को 9 मौतों की सबसे बड़ी वजह बताया गया है.
 

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