एक समय था, जब भारत और पाकिस्तान के बीच प्रतिद्वंद्विता अलग ही स्तर पर थी. दोनों ही टीमों में एक से बढ़कर एक सितारा खिलाड़ी थे, जो इस प्रतिद्वंद्विता में एक अलग ही रंग भरते थे. वहीं, दोनों देशों के बीच पिछले कई दशकों के इतिहास में एक से एक बढ़कर किस्से और कहानियां हैं. और एक बहुत ही रोचक किस्सा टॉस से जुड़ा है. और साल 1984 का यह टॉस एक बहुत ही अलग वजह से अभी भी याद किया जाता है. दरअसल 13 अप्रैल 1984 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में पहले एशिया कप के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच मैच खेला गया. मैच से पहले भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर और पाकिस्तानी कप्तान जहीर अब्बास एक खुशनुमा और हल्के-फुल्के पल के केंद्र में थे. जैसे ही टॉस हुआ गावस्कर ने मज़ाकिया अंदाज़ में सिक्के के ऊपर अपना पैर रख दिया. इससे दोनों कप्तानों के बीच एक सहज और यादगार पल बन गया. यह मैच अब तक के सबसे पहले आयोजित हुए एशिया कप का हिस्सा था. इसमें केवल भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने ही हिस्सा लिया था.
गावस्कर ने अब्बास से पूछा सवाल
इस मैच में जैसे ही अंपायर ने सिक्का हवा में उछाला और वह जमीन पर गिरा सुनील गावस्कर ने एक मज़ाकिया अंदाज़ में तुरंत अपना पैर सिक्के के ऊपर रखा दिया. जब जहीर अब्बास ने हंसते हुए पूछा कि सिक्का चित आया है या टेल्स, तो गावस्कर ने चुटकी लेते हुए मुस्कुराकर कहा कि पहले यह तय करो कि टॉस कौन जीत रहा है, उसके बाद ही पैर हटाऊंगा. गावस्कर की इस हरकत और मज़ाकिया बातचीत ने दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वी टीमों के कप्तानों के बीच के माहौल को खुशनुमा और यादगार बना दिया. अंततः गावस्कर ने पैर उठाया, टॉस भारत के पक्ष में रहा और उन्होंने पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया.
बिना मैच रेफरी के हुआ था वह टॉस
आज के दौर में टॉस के समय इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) का ऑफिशियल मैच रेफरी, टीवी प्रेजेंटर और कैमरों का भारी जमावड़ा होता है, लेकिन 1984 में शारजाह में हुआ यह पहला एशिया कप एक नया प्रयोग था. वहां कोई आधिकारिक ICC मैच रेफरी नहीं था और केवल तटस्थ अंपायर और दोनों कप्तान ही पिच पर मौजूद थे. इसी वजह से कप्तानों को मैदान पर ऐसा हल्का-फुल्का मज़ाक करने की पूरी आजादी मिल गई थी.
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