- वंदे मातरम् के फुल वर्जन को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है.
- KC वेणुगोपाल ने फुल वर्जन पर आपत्ति जताई और गांधी-नेहरू-पटेल का हवाला दिया.
- नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा- गठबंधन सहयोगी तय नहीं कर सकते क्या गाना है.
श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की मौजूदगी में फुल वर्जन 'वंदे मातरम' के बजाने पर कांग्रेस की आपत्ति ने एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है. सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस से कहा है कि वह गठबंधन सहयोगियों पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकती. वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस पर 'मुस्लिम लीग' जैसा होने का आरोप लगाते हुए हमला बोला है.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
फिल्म फेस्टिवल में गाए जा रहे गीत के फुल वर्जन का वीडियो शेयर करते हुए, कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने अपनी सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को सलाह दी है कि वे गीत के छोटे वर्जन का ही इस्तेमाल करने के मामले में पार्टी का साथ दें.
के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "वंदे मातरम का फुल वर्जन उस मिली-जुली और अनेकता वाली सोच के साथ मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत के लिए की थी और जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया था."
उन्होंने आगे कहा, "हमारे लिए महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजिनी नायडू और जे.बी. कृपलानी की सोची-समझी राय सबसे अहम है, जिसे काफी हद तक गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह से आकार मिला था."
कांग्रेस नेता ने अपने सहयोगियों से स्वतंत्रता सेनानियों की समझ और राय का सम्मान करने, पार्टी के साथ मिलकर उस 'खूबसूरत और ऐतिहासिक गीत' का वही वर्जन गाने की अपील की, जिसे पार्टी ने अपनाया था.
The full version of Vande Mataram sits uneasily with the syncretic and pluralist ethos that our freedom fighters envisioned and nurtured for India.
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) September 8, 2026
For us, the considered judgment of Mahatma Gandhi, Pandit Nehru, Sardar Patel, Subhash Chandra Bose, Rajendra Prasad, Acharya… pic.twitter.com/VngmVUmevz
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'हम थोपे जाने के खिलाफ...'
एनसी नेता बशीर अहमद ने कहा, "गठबंधन सहयोगी के तौर पर आप यह तय नहीं कर सकते कि क्या गाना है या कितना गाना है. वेणुगोपाल को पोस्ट करने का अधिकार है, लेकिन वे अपनी बात थोप नहीं सकते. यह लोगों की पसंद है. हम लोगों पर कुछ भी थोपे जाने के खिलाफ हैं."
कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगी पर हमला और तेज करते हुए कहा कि वे नागपुर (यानी RSS) के आदेशों के आगे न झुकें.
कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने कहा, "उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला INDIA ब्लॉक का हिस्सा हैं. गठबंधन सहयोगी होने के नाते, उन्हें कांग्रेस के फैसले का सम्मान करना चाहिए, न कि नागपुर (RSS) के फैसले का."
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "इस मुद्दे पर कांग्रेस 'पूरी तरह से अलग-थलग' पड़ गई है. इससे यह साफ हो जाता है कि 'दिमागी नक्सल' कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग कांग्रेस' में बदल गई है और कट्टरपंथी ताकतों के सामने पूरी तरह से झुक गई है."
बीजेपी नेता आरएस पठानिया ने भी फुल वर्जन 'वंदे मातरम' गाने पर आपत्ति जताने के लिए कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा, "घाटी में अलगाववादियों ने भी राष्ट्रगीत पर आपत्ति नहीं जताई थी."
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कांग्रेस का क्या इरादा?
कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) ने पिछले महीने वंदे मातरम् पर अपनी सबसे बड़ी फैसला लेने वाली संस्था के 1937 के प्रस्ताव को मानने का फैसला किया. इसके तहत, अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्र गीत के सिर्फ दो स्टैंजा ही गाए जाएंगे.
कांग्रेस का यह फैसला तब आया, जब बीजेपी ने उसके नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का फुल वर्जन न गाकर उसका अपमान करने का आरोप लगाया.
इससे पहले, इस साल केंद्र सरकार ने आदेश दिया था कि सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक समारोहों में 'जन गण मन' से पहले वंदे मातरम के सभी छह पद बजाए जाने चाहिए.
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