
बर्मिंघम:
भारत और इंग्लैंड की क्रिकेट टीमों के बीच रविवार को एजबेस्टन क्रिकेट मैदान पर आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के अंतिम संस्करण का फाइनल मुकाबला खेला जाएगा।
इंग्लैंड जहां पहली बार कोई आईसीसी खिताब जीतने का प्रयास करेगा, वहीं भारत बीते साल इस धरती पर मिली करारी शिकस्त का 'हिसाब चुकाने' का प्रयास करेगा। बीते साल भारत ने जब इंग्लैंड का दौरा किया था, तो उसे टेस्ट, वनडे और ट्वेंटी-20 मुकाबलों में करारी शिकस्त मिली थी। उस शृंखला में भारत एक भी मैच नहीं जीत सका था और नाकामी के कारण कई खिलाड़ियों का करियर चौपट हो गया था।
खिताबी मुकाबला जीतकर भारत उस हार और उससे हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन इंग्लैंड को पहली बार कोई आईसीसी खिताब जीतने से रोककर वह एलिस्टर कुक के टीम को ऐसा दर्द दे सकता है, जिसे वे लंबे समय तक नहीं भुला पाएंगे।
भारत के सामने दूसरी बार इस खिताब को जीतते हुए ऑस्ट्रेलिया की बराबरी करने का बेहतरीन मौका है। भारत ने 2002 में श्रीलंका में बारिश से बाधित फाइनल के बाद श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से विजेता होने का गौरव हासिल किया था।
ऑस्ट्रेलिया ने 2006 में भारत में हुए इसके पांचवें और दक्षिण अफ्रीका में हुए इसके छठे संस्करण का खिताब जीता था। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका (1998), न्यूजीलैंड (2000), वेस्टइंडीज (2004) यह खिताब जीत चुके हैं। दूसरा खिताब जीतने के लिए भारत को इंग्लैंड के शीर्ष क्रम को रनों का अंबार लगाने से रोकना होगा। कप्तान कुक, इयान बेल और जोनाथन ट्रॉट बेहतरीन फार्म में हैं और इन्हें रोकना भारतीय गेंदबाजों के लिए चुनौती होगी।
मध्य क्रम में इंग्लैंड के पास जोए रूट, इयोन मोर्गन, रवि बोपारा और जोस बटलर के रूप में काफी उपयोगी और आक्रामक बल्लेबाज हैं। मोर्गन और रूट खासतौर पर अच्छे फॉर्म में हैं। गेंदबाजी में इंग्लैंड का कोई सानी नहीं।
स्टुअर्ट ब्रॉड, स्टुअर्ट फिन्न, जेम्स एंडरसन, जेम्स ट्रेडवेल, ग्रीम स्वान और रवि बोपारा के रूप में उसके पास हर मौसम में अच्छी गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ी हैं। एंडरसन और फिन्न को शुरुआती झटके देने के लिए मशहूर माना जाता है, जबकि ट्रेडवेल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेमीफाइनल में दिखा चुके हैं कि वह क्या चीज हैं। ब्रॉड के पास पर्याप्त अनुभव है और इंग्लिश हालात में वह अपने लंबाई का भरपूर फायदा उठाने के लिए मशहूर हैं।
भारत को इन सबसे निपटने के लिए एक बार फिर शिखर धवन और रोहित शर्मा की अपनी सलामी जोड़ी पर आश्रित रहना होगा। इस जोड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में भारत को बेहतरीन शुरुआत दी है। मध्य क्रम में विराट कोहली, सुरेश रैना, दिनेश कार्तिक, कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, रवींद्र जडेजा किसी भी आक्रमण को तहस-नहस करने में सक्षम हैं। बस इन्हें धैर्य के साथ खेलना होगा।
इस चैंपियनशिप की सबसे खास बात सलामी बल्लेबाजों की सफलता के साथ-साथ गेंदबाजों का उम्दा प्रदर्शन रही है। भुवनेश्वर कुमार, इशांत शर्मा और उमेश यादव ने अपनी सीम और स्विंग गेंदबाजी से साबित किया है कि वे इंग्लिश हालात में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। इन तीन गेंदबाजों ने अपने दम पर मैच जिताए हैं और बीते कुछ समय से चली आ रही धोनी की मुश्किलें कम की हैं। इसके अलावा स्पिन विभाग में रविचंद्रन अश्विन और जडेजा बेहद सफल रहे हैं। भारतीय टीम के आत्मविश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने बीते तीन मैचों से कोई परिवर्तन नहीं किया है।
इंग्लैंड जहां पहली बार कोई आईसीसी खिताब जीतने का प्रयास करेगा, वहीं भारत बीते साल इस धरती पर मिली करारी शिकस्त का 'हिसाब चुकाने' का प्रयास करेगा। बीते साल भारत ने जब इंग्लैंड का दौरा किया था, तो उसे टेस्ट, वनडे और ट्वेंटी-20 मुकाबलों में करारी शिकस्त मिली थी। उस शृंखला में भारत एक भी मैच नहीं जीत सका था और नाकामी के कारण कई खिलाड़ियों का करियर चौपट हो गया था।
खिताबी मुकाबला जीतकर भारत उस हार और उससे हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन इंग्लैंड को पहली बार कोई आईसीसी खिताब जीतने से रोककर वह एलिस्टर कुक के टीम को ऐसा दर्द दे सकता है, जिसे वे लंबे समय तक नहीं भुला पाएंगे।
भारत के सामने दूसरी बार इस खिताब को जीतते हुए ऑस्ट्रेलिया की बराबरी करने का बेहतरीन मौका है। भारत ने 2002 में श्रीलंका में बारिश से बाधित फाइनल के बाद श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से विजेता होने का गौरव हासिल किया था।
ऑस्ट्रेलिया ने 2006 में भारत में हुए इसके पांचवें और दक्षिण अफ्रीका में हुए इसके छठे संस्करण का खिताब जीता था। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका (1998), न्यूजीलैंड (2000), वेस्टइंडीज (2004) यह खिताब जीत चुके हैं। दूसरा खिताब जीतने के लिए भारत को इंग्लैंड के शीर्ष क्रम को रनों का अंबार लगाने से रोकना होगा। कप्तान कुक, इयान बेल और जोनाथन ट्रॉट बेहतरीन फार्म में हैं और इन्हें रोकना भारतीय गेंदबाजों के लिए चुनौती होगी।
मध्य क्रम में इंग्लैंड के पास जोए रूट, इयोन मोर्गन, रवि बोपारा और जोस बटलर के रूप में काफी उपयोगी और आक्रामक बल्लेबाज हैं। मोर्गन और रूट खासतौर पर अच्छे फॉर्म में हैं। गेंदबाजी में इंग्लैंड का कोई सानी नहीं।
स्टुअर्ट ब्रॉड, स्टुअर्ट फिन्न, जेम्स एंडरसन, जेम्स ट्रेडवेल, ग्रीम स्वान और रवि बोपारा के रूप में उसके पास हर मौसम में अच्छी गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ी हैं। एंडरसन और फिन्न को शुरुआती झटके देने के लिए मशहूर माना जाता है, जबकि ट्रेडवेल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेमीफाइनल में दिखा चुके हैं कि वह क्या चीज हैं। ब्रॉड के पास पर्याप्त अनुभव है और इंग्लिश हालात में वह अपने लंबाई का भरपूर फायदा उठाने के लिए मशहूर हैं।
भारत को इन सबसे निपटने के लिए एक बार फिर शिखर धवन और रोहित शर्मा की अपनी सलामी जोड़ी पर आश्रित रहना होगा। इस जोड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में भारत को बेहतरीन शुरुआत दी है। मध्य क्रम में विराट कोहली, सुरेश रैना, दिनेश कार्तिक, कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, रवींद्र जडेजा किसी भी आक्रमण को तहस-नहस करने में सक्षम हैं। बस इन्हें धैर्य के साथ खेलना होगा।
इस चैंपियनशिप की सबसे खास बात सलामी बल्लेबाजों की सफलता के साथ-साथ गेंदबाजों का उम्दा प्रदर्शन रही है। भुवनेश्वर कुमार, इशांत शर्मा और उमेश यादव ने अपनी सीम और स्विंग गेंदबाजी से साबित किया है कि वे इंग्लिश हालात में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। इन तीन गेंदबाजों ने अपने दम पर मैच जिताए हैं और बीते कुछ समय से चली आ रही धोनी की मुश्किलें कम की हैं। इसके अलावा स्पिन विभाग में रविचंद्रन अश्विन और जडेजा बेहद सफल रहे हैं। भारतीय टीम के आत्मविश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने बीते तीन मैचों से कोई परिवर्तन नहीं किया है।
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