
नई दिल्ली.:
स्पिनर के तौर पर उन्हें बेहद 'धोखेबाज' माना जाता था. गेंद को फ्लाइट करा वे बल्लेबाज को बाहर निकलकर बाउंड्री के पार पहुंचाने के लिए ललचाते थे. अकसर बल्लेबाज उनके इस मायाजाल में फंस भी जाते थे. जैसे ही बल्लेबाज बड़े शॉट खेलने के मूड में आता, बाएं हाथ के लेग स्पिनर बिशन सिंह बेदी चतुराई से गेंद की लंबाई में बदलाव करके उसे पैवेलियन लौटने को मजबूर कर देते थे.
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी को 'खिलाड़ियों का कप्तान' कहा जाता था. टीम के खिलाड़ियों के हितों को उन्होंने हमेशा ध्यान में रखा. साथी प्लेयर्स में 'बिशन पाजी' के नाम से लोकप्रिय बेदी ने जो कुछ भी भी काम किया, अपनी शर्तों पर किया. खरी बात कहने के लिए मशहूर बेदी श्रीलंका के जादुई ऑफ स्पिनर और टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले मुथैया मुरलीधरन के खिलाफ अपने तल्ख बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं.
चंद्रशेखर, प्रसन्ना और वेंकटराघवन के साथ मिलकर बेदी ने स्पिन की ऐसी 'चौकड़ी' बनाई जो लंबे अरसे तक बल्लेबाजों के लिए मुसीबत बनी रही. 70 और 80 के दशक में इस चौकड़ी ने भारतीय टीम को कई जीतें दिलाईं. बेदी को स्पिन का जादूगर कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. गेंद को टर्न कराने और इसकी लंबाई में वे इतनी मास्टरी से बदलाव करते थे कि कई बार बल्लेबाज हतप्रभ रह जाता था.
25 सितंबर 1946 को पंजाब के अमृतसर ने जन्मे बेदी ने घरेलू क्रिकेट में लंबे अरसे तक दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया. घरेलू क्रिकेट में अपनी स्पिन गेंदबाजी के कारण शोहरत बटोरने वाले बिशन ने 31 दिसंबर 1966 को वेस्टइंडीज के खिलाफ कलकत्ता (अब कोलकाता) में अपने टेस्ट करियर का आगाज किया. क्रिकेट मैदान पर अपने रंगबिरंगे पटकों के कारण वे चर्चा में रहे. विकेट लेने के बाद बेदी का अपने सहयोगी गेंदबाजों के साथ जश्न मनाने का तरीका भी अलग था. वे भारत की ओर से टेस्ट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज भी रह चुके हैं. उनके नाम पर 67 टेस्ट में 28.71 के औसत से 266 टेस्ट विकेट हैं. 1979 में इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम टेस्ट खेलने के बाद यह रिकॉर्ड करीब छह-सात वर्ष तक उनके नाम रहा. बाद में कपिल देव ने इस रिकॉर्ड को ध्वस्त किया. इंग्लिश काउंटी में नार्दम्पटनशायर की ओर से खेले बेदी ने विदेशी मैदानों पर भी खूब विकेट हासिल किए.
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी बिशन पाजी किसी न किसी रूप में क्रिकेट से जुड़े रहे. युवा क्रिकेटर्स की स्पिन गेंदबाजी प्रतिभा को तराशने में उन्होंने बढ़-चढ़कर योगदान दिया. मनिंदर सिंह और मुरली कार्तिक जैसे बाएं हाथ के लेग स्पिनरों को बेदी से काफी कुछ सीखने को मिला है. जम्मू-कश्मीर की ओर से भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले ऑफ स्पिनर परवेज रसूल के स्पिन कौशल को भी बेदी की पारखी निगाह ने बेहतर किया है. वर्ष 1990 में उन्हें भारतीय टीम के कोच नियुक्त किए गए लेकिन कोच के तौर पर उनका कार्यकाल कोई खास नहीं रहा है. बेदी फिटनेस को लेकर बेहद सख्त थे और बड़े से बड़े खिलाड़ी को भी फिटनेस शेड्यूल का सख्ती से पालन करना होता था.
वैसे अपने मुंहफट अंदाज के कारण बेदी आलोचकों के निशाने पर भी रहे. दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) की कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने खुलकर अपने विचार जताए. टीम इंडिया का कोच रहने के दौरान भी उन्होंने विवादित बयान दिया था.भारतीय टीम ने एक बार खराब प्रदर्शन किया तो बेदी यह कहने से नहीं चूके थे कि 'पूरी टीम को हिंद महासागर में डूब जाना चाहिए.' मुरलीधरन सहित तथाकथित संदिग्ध एक्शन वाले स्पिनरों को लेकर भी बेदी ने खुलकर अपनी बात रखी हैं.
विश्व क्रिकेट के सबसे कामयाब स्पिनर मुरलीधरन को लेकर बेदी यह कहने से भी नहीं चूके थे कि 'मैं उन्हें स्पिनर नहीं बल्कि जैवलिन थ्रोअर मानता हूं.' उन्होंने यह भी कहा था कि मुरली के लिए गए विकेटों को मैं रन आउट ही मानता हूं. टीम इंडिया को कोच रहते हुए भी उनका यह लहजा दिखा था.जब एक दौरे में टीम इंडिया ने खराब प्रदर्शन किया तो बेदी ने कहा था, ‘पूरी टीम को पानी में फेंक दिया जाना चाहिए.’इन तमाम बातों के बावजूद बेदी की क्रिकेट के प्रति निष्ठा निर्विवाद रही. भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान अद्वितीय है..
बेदी का गेंदबाजी करियर : 67 टेस्ट, 266 विकेट, औसत 28.71, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 7/98, मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 10/194.
10 वनडे, 7 विकेट, औसत 48.57, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2/44.
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी को 'खिलाड़ियों का कप्तान' कहा जाता था. टीम के खिलाड़ियों के हितों को उन्होंने हमेशा ध्यान में रखा. साथी प्लेयर्स में 'बिशन पाजी' के नाम से लोकप्रिय बेदी ने जो कुछ भी भी काम किया, अपनी शर्तों पर किया. खरी बात कहने के लिए मशहूर बेदी श्रीलंका के जादुई ऑफ स्पिनर और टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले मुथैया मुरलीधरन के खिलाफ अपने तल्ख बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं.
चंद्रशेखर, प्रसन्ना और वेंकटराघवन के साथ मिलकर बेदी ने स्पिन की ऐसी 'चौकड़ी' बनाई जो लंबे अरसे तक बल्लेबाजों के लिए मुसीबत बनी रही. 70 और 80 के दशक में इस चौकड़ी ने भारतीय टीम को कई जीतें दिलाईं. बेदी को स्पिन का जादूगर कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. गेंद को टर्न कराने और इसकी लंबाई में वे इतनी मास्टरी से बदलाव करते थे कि कई बार बल्लेबाज हतप्रभ रह जाता था.
25 सितंबर 1946 को पंजाब के अमृतसर ने जन्मे बेदी ने घरेलू क्रिकेट में लंबे अरसे तक दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया. घरेलू क्रिकेट में अपनी स्पिन गेंदबाजी के कारण शोहरत बटोरने वाले बिशन ने 31 दिसंबर 1966 को वेस्टइंडीज के खिलाफ कलकत्ता (अब कोलकाता) में अपने टेस्ट करियर का आगाज किया. क्रिकेट मैदान पर अपने रंगबिरंगे पटकों के कारण वे चर्चा में रहे. विकेट लेने के बाद बेदी का अपने सहयोगी गेंदबाजों के साथ जश्न मनाने का तरीका भी अलग था. वे भारत की ओर से टेस्ट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज भी रह चुके हैं. उनके नाम पर 67 टेस्ट में 28.71 के औसत से 266 टेस्ट विकेट हैं. 1979 में इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम टेस्ट खेलने के बाद यह रिकॉर्ड करीब छह-सात वर्ष तक उनके नाम रहा. बाद में कपिल देव ने इस रिकॉर्ड को ध्वस्त किया. इंग्लिश काउंटी में नार्दम्पटनशायर की ओर से खेले बेदी ने विदेशी मैदानों पर भी खूब विकेट हासिल किए.
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी बिशन पाजी किसी न किसी रूप में क्रिकेट से जुड़े रहे. युवा क्रिकेटर्स की स्पिन गेंदबाजी प्रतिभा को तराशने में उन्होंने बढ़-चढ़कर योगदान दिया. मनिंदर सिंह और मुरली कार्तिक जैसे बाएं हाथ के लेग स्पिनरों को बेदी से काफी कुछ सीखने को मिला है. जम्मू-कश्मीर की ओर से भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले ऑफ स्पिनर परवेज रसूल के स्पिन कौशल को भी बेदी की पारखी निगाह ने बेहतर किया है. वर्ष 1990 में उन्हें भारतीय टीम के कोच नियुक्त किए गए लेकिन कोच के तौर पर उनका कार्यकाल कोई खास नहीं रहा है. बेदी फिटनेस को लेकर बेहद सख्त थे और बड़े से बड़े खिलाड़ी को भी फिटनेस शेड्यूल का सख्ती से पालन करना होता था.
वैसे अपने मुंहफट अंदाज के कारण बेदी आलोचकों के निशाने पर भी रहे. दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) की कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने खुलकर अपने विचार जताए. टीम इंडिया का कोच रहने के दौरान भी उन्होंने विवादित बयान दिया था.भारतीय टीम ने एक बार खराब प्रदर्शन किया तो बेदी यह कहने से नहीं चूके थे कि 'पूरी टीम को हिंद महासागर में डूब जाना चाहिए.' मुरलीधरन सहित तथाकथित संदिग्ध एक्शन वाले स्पिनरों को लेकर भी बेदी ने खुलकर अपनी बात रखी हैं.
विश्व क्रिकेट के सबसे कामयाब स्पिनर मुरलीधरन को लेकर बेदी यह कहने से भी नहीं चूके थे कि 'मैं उन्हें स्पिनर नहीं बल्कि जैवलिन थ्रोअर मानता हूं.' उन्होंने यह भी कहा था कि मुरली के लिए गए विकेटों को मैं रन आउट ही मानता हूं. टीम इंडिया को कोच रहते हुए भी उनका यह लहजा दिखा था.जब एक दौरे में टीम इंडिया ने खराब प्रदर्शन किया तो बेदी ने कहा था, ‘पूरी टीम को पानी में फेंक दिया जाना चाहिए.’इन तमाम बातों के बावजूद बेदी की क्रिकेट के प्रति निष्ठा निर्विवाद रही. भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान अद्वितीय है..
बेदी का गेंदबाजी करियर : 67 टेस्ट, 266 विकेट, औसत 28.71, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 7/98, मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 10/194.
10 वनडे, 7 विकेट, औसत 48.57, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2/44.
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