India vs Afghanistan: आखिर यह भारतीय क्रिकेट में यह हो क्या रहा है? COE (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) में बोर्ड को दुनिया में पिछले करीब डेढ़ साल से खाली हेड ऑफ स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसन पद के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिल रहा. COE में करोड़ों रुपये बहाने के बावजूद आखिर मेडिकल स्टॉफ क्या कर रहा है? गंभीर एंड प्रबंधन अपनी चला रहा है क्या? बुमराह की वास्तविक स्थिति क्या है? इस तरह के चुनिंदा ही नहीं, बल्कि ऐसी अनगिन सवालों की लंबी सूची एक बार फिर करोड़ों भारतीय फैंस के ज़हन में मंगलवार को तब कौंध गई, जब अफगानिस्तान के खिलाफ 15 सदस्यीय टीम का ऐलान किया गया? टीम का ऐलान तो हुआ, लेकिन BCCI ने तरह से खुद की पोल खोलते हुए खुद को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया. इससे उसने न तो कोई अच्छा उदाहरण पेश किया और न ही इससे अच्छा मैसेज गया. चयन समिति ने चुनी 15 सदस्यीय टीम में 4 खिलाड़ियों को "सब्जेक्ट-टू-फिटनेस" की शर्त के साथ चुना है. फैंस और पूर्व क्रिकेटर बातें कर रहे हैं कि अगर 15 में से 4 खिलाड़ी चोटिल हैं, तो फिर इस टीम को 'इंजर्ड XI' न कहें, तो और क्या कहें!
अफगानिस्तान सीरीज के लिए देखें भारतीय टीम
India's squad for Afghanistan T20I series announced. #TeamIndia will play three T20Is against Afghanistan at New Delhi, beginning September 13.#AFGvIND pic.twitter.com/UqTUeZyHz8
— BCCI (@BCCI) September 1, 2026
शायद भारतीय इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिला है, जब एक साथ इतने खिलाड़ी "फिटनेस की शर्त" के साथ टीम में चुने गए. जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर, नितीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा. इन सभी का चयन कर लिया गया है, लेकिन शर्त के साथ ही साफ हो गया कि ये आगे टीम में होंगे भी या नहीं? और अगर फिट हो भी गए, तो कितने मैच फिट होंगे, फॉर्म कैसी होगी, यह एक अलग सवाल है. इन चारों को ही मैदान पर उतरने से पहले फिटनेस क्लीयरेंस हासिल करना होगा. और यहीं से पंडितों और फैंस के माथा इन्हें लेकर ठनक गया कि आखिर यह हो क्या रहा है. आखिर एक के बाद एक लग रहीं या इतना लंबा खिंच रहीं ये कैसी चोट हैं? ये चोट इतना लंबा समय गुजरने के बाद भी अभी तक ठीक क्यों नहीं हुई? सवाल वास्तव में कई हैं, लेकिन आप उन 5 बड़े सवालों के बारे में जान लीजिए, जिनका जवाब अब BCCI को देना ही होगा और ढूंढना ही होगा क्योंकि फैंस बहुत ही गुस्से में हैं.
1. बुमराह को लेकर वास्तविक तस्वीर क्या है?
सूची में सबसे बड़ा नाम जसप्रीत बुमराह का है. वह जुलाई में कॉर्डिफ में इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे वनडे मैच के दौरान बाएं घुटने में चोट खा बैठे थे और तब से उन्होंने कोई मैच नहीं खेला है. और अब फैंस को अब पिछले कई सालों से बुमराह का नियमित अंतराल पर अंदर-बाहर होना बिल्कुल भी पच नहीं रहा है. पूर्व क्रिकेटर दबी जुबां में बातें कर रहे हैं, लेकिन न तो बुमराह ही कुछ बोलते हैं और न ही बीसीसीआई. ऐसे में फैंस जानना जाते हैं कि आखिर बुमराह की वास्तविक क्या है? और आखिर कब तक बुमराह को लेकर ऐसी स्थिति चलती रहेगी? बुमराह जैसा ही सवाल अब हार्दिक पांड्या को लेकर भी बनने लगा है. पांड्या भी नियमित अंतराल पर चोटिल होते रहे हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ उनकी वापसी की उम्मीद थी, लेकिन टीम के ऐलान से कुछ घंटे पहले ही फिर से उनके चोटिल होने की खबर आ गई.
2. इतना बड़ा स्टॉफ, फिर क्यों लग रहीं चोट?
टीम इंडिया के लंबे-चौड़े स्पोर्ट स्टॉफ में खिलाड़ियों की फिटनेस की जिम्मेदारी संभालने के लिए कई अच्छे खासे लोग हैं. इसमें फिजियो हेड कमलेश जैन (खिलाड़ियों की इंजरी रिहैबिलिटेशन, रिकवरी, मैच के दौरान फिजियो सहायता की जिम्मेदारी ), एंड्रियन ले रू (खिलाड़ियों की फिटनेस, सहनशक्ति, और शारीरिक ताकत को बेहतर बनाने जिममेदारी), तुलसी राम गोटीपाटी (मैच और ट्रेनिंग सत्रों के दौरान हेड फिजियोथेरेपिस्ट के साथ मिलकर खिलाड़ियों की रिकवरी में मदद), अरुण कनाडे (अरुण कनाडे), राजीव कुमार (अरुण कनाडे) को मिलाकर पांच लोग हैं, जो अलग-अलग तरह से खिलाड़ियों की मदद करते हैं. ये तमाम अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं और इनके पास अपने डोमेन का लंबा-चौड़ा अनुभव है. ऐसे में सवाल यह है कि फिर बार-बार खिलाड़ियों को चोट क्यों लग रही हैं? और इनकी कोई जवाबदेही है भी या नहीं? सभी ने पिछले दिनों देखा कि पिछले दिनों समीक्षा के बाद फील्डिंग कोच टी दिलीप की छुट्टी हो गई थी, लेकिन फिटनेस डिपार्टमेंट को बरकरार रखा गया.
3. CEO में आखिर हो क्या रहा है?
सवाल टीम इंडिया के प्रबंधन से जुड़े स्पोर्ट स्टॉफ पर ही नहीं, बल्कि बेंगलुरु स्थिति सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के स्टॉफ पर भी है. आखिर मोटी तनख्वाह पर काम कर रहे ये लोग क्या कर रहे हैं? सवाल इसलिए है क्योंकि चोटिल हुए खिलाड़ियों पर नियमित रूप से काम करने के बावजूद रिकवरी टाइम बहुत ही ज्यादा लग रग रहा है. वहीं अगर कोई खिलाड़ी रिकवरी के बाद टीम में आता है, तो वह कुछ समय बाद फिर से चोटिल हो जाता है. बुमराह सहित कई खिलाड़ियों के मामले में पूर्व में ऐसा देखा गया है. टीम इंडिया में शर्त के आधार पर चुने गए ज्यादार खिलाड़ियों को चोटिल हुए दो-तीन महीने का समय हो गया है, लेकिन इतने अंतराल के बाद भी इनका फिट न होना अलग ही सवाल खड़ा कर देता है?
4. प्रबंधन और COE के बीच तालमेल की गड़बड़ी?
जब घोषित टीम में तस्वीर कुछ ऐसी आई है. और बाहर के हालात सवाल खड़ा कर रहे हैं, तो सवाल यह भी है कि क्या भारतीय मैनेजमेंट और COE के बीच उस तरह का तालमेल है, जो होना चाहिए? क्या गंभीर एंड कंपनी और COE का मेडिकल स्टॉफ एक पेज पर है? कई मौकों पर यह देखने पर आया कि भारतीय प्रबंधन ने आधी-अधूरी फिटनेस के साथ या जल्दबाजी में खिलाड़ी विशेष को खिलाया, तो यह टीम के लिए और नुकसानदेह साबित हुआ? ऐसे में सवाल यह है कि इसकी जवाबदेही किसकी है? क्या बुमराह के नियमित अंतराल पर चोटिल होने के लिए प्रबंधन को जिम्मेदार माना जाए सा COE के मेडिकल स्टॉफ को?
5. खिलाड़ी कर रहे SOP और निर्देशों का पालन?
खबरें ऐसी भी आई हैं कि टीम में जगह पक्की और एकदम से बहुत ज्यादा बढ़ गई चयन प्रतिस्पर्धा के कारण खिलाड़ी जोखिम ले रहे हैं. कई खिलाड़ियों ने वर्कलोड मैनेजमेंट की अनदेखी की. और यह भी एक वजह रही कि उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा. और अब उनकी जिद का खामियाजा पूरी टीम को भुगतना पड़ रहा है. आप सोचिए कि अगर अफगानिस्तान सीरीज की जगह यह कोई बड़ा टूर्नामेंट होता, तो फिर क्या होता? निश्चित तौर पर जो तस्वीर (4 खिलाड़ी फिट नहीं) सामने आई है, वह बताने के लिए काफी है कि सिस्टम में थोड़ी बहुत नहीं, बल्कि बहुत और बहुत ही ज्यादा गड़बड़ है.
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