- सूरत से चेन्नई के बीच बनने वाला एक्सप्रेसवे भारत का अहम प्रोजेक्ट है.
- हालांकि अभी इसके नासिक से चेन्नई वाले खंड पर काम शुरू हुआ है.
- इस प्रोजेक्ट के बाद सूरत से चेन्नई का सफर 16 घंटे में पूरा हो जाएगा.
सूरत चेन्नई एक्सप्रेसवे गुजरात से दक्षिण के बीच की रोड कनेक्टिविटी को पूरी तरह से बदलने वाला है. अब तक सूरत से चेन्नई का सफर तय करने में 36 घंटे का समय लगता था, लेकिन अब यह सफर 16 घंटे में पूरा हो जाएगा. भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे इस एक्सप्रेसवे से गुजरात सीधे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से कनेक्ट हो जाएगा. जिससे 900 किलोमीटर के इस सफर में शानदार कनेक्टिविटी हो जाएगी. इस प्रोजेक्ट को अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है. जिसमें कई बड़े शहर आपस में कनेक्ट हो जाएंगे. इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद गुजरात से लेकर तमिलनाडु तक शानदार हाईस्पीड कनेक्टिविटी शुरू हो जाएगी.
सूरत से चेन्नई का सफर 16 घंटे में पूरा होगा
सूरत से अभी चेन्नई जाने में पारंपरिक राष्ट्रीय राजमार्गों का सफर बेहद थकाऊ रहता है. क्योंकि भारी ट्रैफिक की वजह से लगभग 35 घंटे का समय लगता है. लेकिन सूरत चेन्नई के बीच बन रहा एक्सप्रेसवे अब इस दूरी को पूरी तरह से कम करने वाला है. इस हाईवे से यह सफर 16 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. यह प्रोजेक्ट देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है, खास बात यह है कि पहले यह हाईवे 1271 किलोमीटर प्रस्तावित थी. लेकिन हाल ही में इस प्रोजेक्ट में एक बड़ा प्रशासनिक और रूट संशोधन किया गया है. जहां सूरत नासिक खंड को हटा दिया है. जिससे अब यह यह नासिक-चेन्नई एक्सप्रेसवे के नाम से जाना जाएगा. इसकी दूरी 900 किलोमीटर होगी. हालांकि इसे कनेक्ट सूरत से चेन्नई के बीच किया जाएगा.
6 लेन कॉरिडोर से जुडे़ंगे यह बड़े शहर
- गुजरात: सूरत
- महाराष्ट्र: नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, अक्कलकोट
- कर्नाटक: कलबुर्गी, रायचूर
- तेलंगाना: गढ़वाल
- आंध्र प्रदेश: कुरनूल, कडप्पा, तिरुपति
- तमिलनाडु: चेन्नई

गुजरात से तमिलनाडु की लाइफलाइन
गुजरात से यह तमिलनाडु के बीच यह हाईवे एक एक लाइफलाइन का काम करेगा. जिसमें न केवल समय की बचत होगी, बल्कि परिवहन भी आसान हो जाएगा. पर्यटन और धार्मिक केंद्रों के बीच सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. खास बात यह है कि गुजरात के सूरत वाले हिस्से को हटाने के बाद भी यह महाराष्ट्र सड़क विकास निगम (MSRDC) समृद्धि महामार्ग के माध्यम से मुंबई-अहमदाबाद हाईवे को कनेक्ट कर देगा. जबकि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को भी अप्रत्यक्ष कनेक्टिविटी देगा. यानि भारत के चारों तरफ इस हाईवे की उपयोगिता होगी. इसलिए यह अहम प्रोजेक्ट माना जा रहा है.
5 बड़े राज्यों में कनेक्टिविटी
- महाराष्ट्र
- कर्नाटक
- तेलंगाना
- आंध्र प्रदेश
- तमिलनाडु
महाराष्ट्र के हिस्से को कैबिनेट की मंजूरी
इस प्रोजेक्ट पर अलग-अलग चरणों में काम किया जा रहा है. महाराष्ट्र सरकार ने इसके 374 किलोमीटर के अहम हिस्से नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट ग्रीनफील्ड खंड को मंजूरी दे दी है. 19 हजार 142 करोड़ रुपए की लागत से यह हाईवे तैयार होगा. जबकि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच 177 किलोमीटर के रूट पर भी काम शुरू हो चुका है. यहां जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आई है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसे 2027 के आखिरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. यह हाईवे बनने के बाद रोड कनेक्टिविटी बेहद मजबूत हो जाएगी.
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