छत्तीसगढ़ के सिंगतराई में स्थित वेदांता लिमिटेड के थर्मल पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुआ धमाका अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कथित आपराधिक लापरवाही का मामला बनता जा रहा है. इस भीषण विस्फोट में 21 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 अब भी इलाजरत हैं. शुरुआती तकनीकी रिपोर्ट्स ने जो तस्वीर पेश की है, वह सिस्टम फेलियर, अनदेखी चेतावनियों और प्रोडक्शन के दबाव की खतरनाक कहानी बयान करती है.
कैसे हुआ धमाका: ‘फ्यूल बिल्ड-अप' बना मौत का कारण
चीफ बॉयलर इंस्पेक्टर की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, बॉयलर फर्नेस के अंदर अत्यधिक फ्यूल जमा हो गया था, जिससे अचानक प्रेशर अनियंत्रित तरीके से बढ़ा. इस प्रेशर ने बॉयलर की निचली पाइप को उसकी जगह से उखाड़ दिया, और देखते ही देखते पूरा सिस्टम ध्वस्त हो गया.
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इस निष्कर्ष की पुष्टि Forensic Science Laboratory Sakti ने भी की है. यानी तकनीकी तौर पर हादसे की जड़ साफ है. अनबर्न्ट फ्यूल से प्रेशर बिल्डअप हुआ और विस्फोट हो गया.
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सुबह से मिल रहे थे संकेत, फिर भी नहीं रुका प्लांट
जांच में सामने आया है कि हादसे से कई घंटे पहले ही सिस्टम चेतावनी दे रहा था. सुबह 10:30 बजे कंट्रोल रूम लॉगबुक में PA फैन (Primary Air Fan) की खराबी दर्ज की गई. बार-बार अलर्ट और फेलियर के बावजूद ऑपरेशन जारी रहा. एयर-फ्यूल बैलेंस बिगड़ने से फर्नेस में अनबर्न्ट फ्यूल जमा होता गया. यानी सिस्टम 'रेड अलर्ट' पर था, लेकिन प्लांट चलता रहा.
उल्टा बढ़ा दिया प्रोडक्शन
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जोखिम कम करने के बजाय, प्लांट ने उसे और बढ़ा दिया. 1:03 PM से 2:09 PM के बीच बॉयलर-1 का लोड 350 MW से बढ़ाकर 590 MW कर दिया गया. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्थिति में लोड बढ़ाना सीधे-सीधे फर्नेस प्रेशर को खतरनाक स्तर तक धकेलता है. खासतौर पर तब, जब फ्यूल पहले से जमा हो. 2:33 PM पर सिस्टम ने जवाब दे दिया और विस्फोट हो गया.
पाइप फटना कारण नहीं, नतीजा था
तकनीकी जांच में साफ हुआ है कि पाइप का फटना असली वजह नहीं था, बल्कि असंतुलित दहन (unbalanced combustion) और अत्यधिक प्रेशर का नतीजा था. यानी हादसा अचानक नहीं, बल्कि एक 'धीरे-धीरे बनती आपदा' थी.

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मेंटेनेंस और सेफ्टी में गंभीर खामियां
जांच में यह भी सामने आया है कि मशीनरी की नियमित देखभाल में लापरवाही बरती गई. ऑपरेशनल सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ. प्रेशर फ्लक्चुएशन को नजरअंदाज किया गया. ये सभी कारक मिलकर एक परफेक्ट डिजास्टर तैयार कर रहे थे.
केस दर्ज, SIT जांच शुरू
पुलिस ने इस मामले में Anil Agarwal (डायरेक्टर), मैनेजर देवेंद्र पटेल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज किया है. एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर SIT गठित की गई है, जिसकी अगुवाई एडिशनल एसपी पंकज पटेल कर रहे हैं. टीम में SDOP सुमित गुप्ता, फॉरेंसिक ऑफिसर सृष्टि सिंह और स्थानीय पुलिस अधिकारी शामिल हैं.
चेतावनियों के बावजूद प्लांट क्यों नहीं रुका?
अब जांच के बीच सबसे अहम सवाल यही है कि जब सिस्टम बार-बार चेतावनी दे रहा था, तो प्लांट बंद क्यों नहीं किया गया? खराब मशीनरी के बावजूद प्रोडक्शन क्यों बढ़ाया गया? क्या ज्यादा उत्पादन की होड़ में मजदूरों की जान दांव पर लगा दी गई?
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