- वेदांता के छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट में बॉयलर फर्नेस में ज्यादा ईंधन जमा होने से विस्फोट हुआ था
- प्राइमरी एयर फैन की खराबी के बावजूद कंट्रोल रूम में रेड अलर्ट के बाद भी उत्पादन नहीं रोका गया
- एक घंटे में बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर 590 मेगावाट किया गया जिससे दबाव खतरनाक स्तर पर पहुंचा
वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की कंपनी के छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित थर्मल पावर प्लांट में हुआ घातक विस्फोट अब कथित आपराधिक लापरवाही के गंभीर आरोपों में घिरता जा रहा है. ताज़ा तकनीकी रिपोर्टें इस ओर इशारा करती हैं कि चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, सिस्टम फेल होते रहे और उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाज़ी ने 21 मजदूरों की जान ले ली. 14 लोग अब भी अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं और अब सवाल सीधे कंपनी के शीर्ष प्रबंधन तक पहुंच गए हैं.
क्यों हुआ बॉयलर में बविस्फोट, पता चल गया
घटनास्थल पर मौजूद बॉयलर मुख्य निरीक्षक की प्रारंभिक रिपोर्ट ने हादसे की जड़ को उजागर किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, बॉयलर फर्नेस के भीतर अत्यधिक मात्रा में ईंधन जमा हो गया था, जिससे अचानक और अनियंत्रित दबाव बना और विस्फोट हुआ. दबाव इतना अधिक था कि बॉयलर का निचला पाइप अपनी निर्धारित स्थिति से हट गया, जिससे भारी संरचनात्मक नुकसान हुआ और यह भयावह हादसा घटित हुआ.
इस निष्कर्ष की पुष्टि फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल), सक्ती ने भी की है. एफएसएल रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अत्यधिक ईंधन संचय और उससे उत्पन्न दबाव ही विस्फोट की मुख्य वजह थे. लेकिन इस त्रासदी की असली कहानी उन चेतावनियों में छिपी है जिन्हें नजरअंदाज किया गया. एनडीटीवी को मिले दस्तावेज़ों के मुताबिक, हादसे से कई घंटे पहले ही खतरे के संकेत मिलने लगे थे. एयर-फ्यूल संतुलन बनाए रखने वाला अहम उपकरण प्राइमरी एयर (PA) फैन सुबह से दोपहर के बीच कई बार खराब हुआ. कंट्रोल रूम लॉगबुक में सुबह करीब 10:30 बजे इसकी खराबी दर्ज की गई थी. इसके बावजूद कंट्रोल सिस्टम पर लगातार रेड अलर्ट आते रहे, लेकिन उत्पादन नहीं रोका गया. जो होना चाहिए था, उसके ठीक उलट हुआ.

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बॉयलर का लोड दोगुना हुआ, सिस्टम ने दिया जवाब
दोपहर 1:03 बजे से 2:09 बजे के बीच बॉयलर-1 का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर 590 मेगावाट कर दिया गया यानी सिर्फ एक घंटे में लगभग दोगुना उत्पादन करने की कोशिश. विशेषज्ञों के अनुसार, पहले से अस्थिर स्थिति में इस तरह लोड बढ़ाना फर्नेस के भीतर दबाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा देता है, खासकर तब जब PA फैन की खराबी के कारण अनबर्न्ट फ्यूल जमा हो रहा हो और फिर, दोपहर 2:33 बजे सिस्टम ने जवाब दे दिया
फर्नेस के भीतर हुए विस्फोट ने बॉटम रिंग हेडर पाइप को फाड़ दिया, जिससे लीक, संरचनात्मक क्षति और अंदर मौजूद मजदूरों के लिए मौत का जाल बन गया. तकनीकी विश्लेषण अब साफ कर रहा है कि पाइप का फटना मूल कारण नहीं, बल्कि अत्यधिक दबाव और असंतुलित दहन का परिणाम था.
कंपनी ने नहीं किया तय मानकों का पालन
जांच में यह भी सामने आया है कि वेदांता और उससे जुड़ी कंपनी एनजीएसएल ने मशीनरी के रख-रखाव और संचालन के तय मानकों का पालन नहीं किया. उपकरणों की देखरेख में लापरवाही और संचालन में उपेक्षा के कारण बॉयलर के दबाव में अचानक उतार-चढ़ाव आया, जिसने इस हादसे को जन्म दिया. इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुलिस ने भी कार्रवाई तेज कर दी है.
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर थाना डभरा में अपराध क्रमांक 119/2026 दर्ज किया गया है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत वेदांता के निदेशक अनिल अग्रवाल, कंपनी प्रबंधक देवेंद्र पटेल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. प्रथम दृष्टया लापरवाही के संकेत स्पष्ट बताए गए हैं.
मशीनें बार-बार फेल हो रही थीं तो प्लांट बंद क्यों नहीं किया?
मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित की गई है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल कर रहे हैं. टीम में एसडीओपी सुमित गुप्ता, फॉरेंसिक अधिकारी सृष्टि सिंह और थाना प्रभारी डभरा राजेश पटेल शामिल हैं. पुलिस तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर विस्तृत जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दे रही है.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है कि जब घंटों पहले से सिस्टम रेड अलर्ट दे रहा था, जब मशीनें बार-बार फेल हो रही थीं और खतरा साफ दिखाई दे रहा था तब प्लांट बंद क्यों नहीं किया गया? तकनीकी संकट के बीच उत्पादन बढ़ाने की इतनी जल्दबाज़ी क्यों दिखाई गई? क्या ज्यादा उत्पादन की इस दौड़ में मजदूरों की जान को जोखिम में डाल दिया गया? फिलहाल जवाब मलबे, डेटा लॉग और जांच रिपोर्टों में दबे हुए हैं. लेकिन जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके लिए यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसा सबक है जहां चेतावनियों को नजरअंदाज करने और सुरक्षा को पीछे छोड़ देने की कीमत जिंदगी से चुकानी पड़ी.
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