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IIT Madras के 6 प्रोफेसरों को मिला देश का प्रतिष्ठित JC Bose Grant, 5 साल तक हर साल मिलेंगे 25 लाख

यह ग्रांट भारत के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को उनके उत्कृष्ट शोध योगदान के लिए दिया जाता है. चयनित शोधकर्ताओं को पांच वर्षों तक हर साल 25 लाख रुपये की सहायता मिलेगी.

IIT Madras के 6 प्रोफेसरों को मिला देश का प्रतिष्ठित JC Bose Grant, 5 साल तक हर साल मिलेंगे 25 लाख
यह ग्रांट पांच साल तक हर साल 25 लाख रुपये देता है ताकि नई और अहम रिसर्च (फ्रंटियर रिसर्च) को बढ़ावा दिया जा सके.

IIT Madras Achievement : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यहां के छह फैकल्टी सदस्यों को 'अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) JC बोस ग्रांट' के लिए सिलेक्ट किया गया है. यह ग्रांट भारत में सीनियर साइंटिस्ट्स और इंजीनियरों के लिए रिसर्च के क्षेत्र में मिलने वाले प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है. तो चलिए जानते हैं उन 6 फैकेल्टी के नाम और ग्रांट में मिलने वाली राशि. 

ग्रांट के लिए चुने गए IIT मद्रास के फैकल्टी के नाम

  1. प्रोफेसर सुजाता श्रीनिवासन (मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग)
  2. प्रोफेसर थलाप्पिल प्रदीप (केमिस्ट्री विभाग)
  3. प्रोफेसर दीपा वेंकटेश (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग)
  4. प्रोफेसर जितेंद्र एस. संगवई (केमिकल इंजीनियरिंग विभाग)
  5. प्रोफेसर रामकृष्णन स्वामीनाथन (एप्लाइड मैकेनिक्स और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग)
  6. प्रोफेसर सुंदरगोपाल घोष (केमिस्ट्री विभाग)

IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी ने इस अचीवमेंट के लिए अपने सहयोगियों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि "यह IIT मद्रास में अहम और उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे रिसर्च और डेवलपमेंट की उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है."

जेसी बोस ग्रांट क्यों दिया जाता है?

बता दें कि ANRF JC बोस ग्रांट भारत के एक्टिव सीनियर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को उनके बेहतरीन रिसर्च प्रदर्शन और योगदान के लिए सम्मानित करता है. यह ग्रांट, प्रमुख रिसर्चर्स को एक्स्ट्रा-म्यूरल फडिंग के जरिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित करता है.

यह ग्रांट पांच साल तक हर साल 25 लाख रुपये देता है, ताकि नई और अहम रिसर्च  को बढ़ावा दिया जा सके. इसमें ह्यूमन रिसोर्स, जरूरी सामान (कंज्यूमेबल्स), यात्रा, कोंटिजेंट एक्सपेंसेस, इक्विपमेंट और रिसर्च से जुड़े अन्य खर्चों के साथ-साथ संस्थागत ओवरहेड सपोर्ट भी शामिल है.

संस्थान ने बताया कि पुरस्कार पाने वालों का चयन बेहतरीन रिसर्च उपलब्धियों के आधार पर किया जाता है, जिसमें पब्लिकेशन, पेटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र, रिसर्च के नतीजे, ग्रांट और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के अन्य पैमाने शामिल हैं. संस्थान ने आगे कहा कि इस ग्रांट का मकसद काबिल रिसर्चर्स को विज्ञान और इंजीनियरिंग के नए और अहम क्षेत्रों में बड़े और असरदार रिसर्च करने में सक्षम बनाना है.

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