- 14 अप्रैल को वेदांता पावर प्लांट में हुआ था हादसा, 25 मजदूरों ने गंवाई जान.
- 126 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार, हादसा प्राइमरी एयर फैन में यांत्रिक खराबी से शुरू हुआ.
- हादसे को लेकर ग्रुप चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 8-10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी.
Vedanta Power Plant Incident: छत्तीसगढ़ में सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे की मुख्य वजह सामने आ गई है. केंद्रीय जांच समिति ने केंद्र और राज्य सरकार को सौंपी 126 पन्नों की रिपोर्ट में कहा है कि प्राइमरी एयर फैन में यांत्रिक खराबी के कारण हवा-ईंधन का संतुलन बिगड़ गया, जिससे पानी और भाप का प्रवाह अस्थिर हो गया था. इसके बाद भट्टी के अंदर बिना जले ईंधन के अचानक जलने से पैदा हुए दबाव (फर्नेस पफ) और 'वॉटर हैमर' के झटके से बॉयलर के सामने 14 डाउनकमर सप्लाई पाइप एक साथ क्षतिग्रस्त हो गए.
इससे अत्यधिक दबाव वाली गर्म भाप और पानी तेजी से बाहर निकला, जिससे आसपास काम कर रहे श्रमिक चपेट में आ गए और कुल 35 लोग प्रभावित हुए. जिसमें 25 की मौत हुई एवं 10 घायल हुए थे. यह लोग छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के थे. वह यहां रोजी-रोटी की तलाश में आए थे.
14 अप्रैल को हुआ था हादसा, अनिल अग्रवाल पर भी हो चुकी है FIR
पावर प्लांट में 14 को दोपहर करीब 2:30 बजे हादसा हुआ था. इस मामले में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटेल समेत 8-10 लोगों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है. यह हादसा इतना खतरनाक था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई थी.
कंपनी ने किया था 35-35 लाख के मुआवजा का ऐलान
वेदांता प्रबंधन की ओर से हादसे के शिकार हुए मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये और एक आश्रित को नौकरी का ऐलान किया था. वहीं, घायलों को 15 लाख रुपये और बेहतर इलाज कराने की बात कही थी. इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार ने मृतक के परिजनों को 7-7 लाख और घायलों को 50,000 की मुआवजा देने की घोषणा की थी.
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