Why Petrol Diesel Prices are rising: देश में आज एक बार फिर पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया. आज 19 मई, मंगलवार सुबह-सुबह देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 0.52 रुपये से 1.71 रुपये तक बढ़ा दी गई हैं. एक हफ्ते से भी कम समय में ये दूसरी बढ़ोतरी है. इससे पहले सरकारी तेल कंपनियों ने बीते शुक्रवार को ही तेल कंपनियों ने दोनों ईधनों के दामों में 3 रुपये/लीटर का बड़ा इजाफा किया था. आज की नई बढ़ोतरी के बाद देश भर में पेट्रोल और डीजल के दाम अपने नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं. ये मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव का सीधा झटका है, जो अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर भी लगने लगा है.
आखिर क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? 3 बड़े फैक्टर
अगर आप सोच रहे हैं कि अचानक तेल कंपनियां दाम क्यों बढ़ा रही हैं, तो पेट्रोलियम मंत्रालय के Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ओर से जारी की गई 18 मई की रिपोर्ट इसके पीछे की पूरी कहानी बयां करती है.
कच्चे तेल में 60% से ज्यादा का भारी उछाल
मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने से पहले यानी फरवरी 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत $69.01 प्रति बैरल थी. लेकिन पिछले 81 दिनों से जारी भीषण टकराव के कारण 15 मई 2026 को यह कीमत बढ़कर $110.73 प्रति बैरल तक पहुंच गई है. यानी कच्चे तेल की कीमतों में $41.72 प्रति बैरल (60.45%) की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है.
'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में पैदा हुआ गतिरोध
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल और लगभग 60% एलपीजी (LPG) अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है. इसमें से लगभग 40% कच्चा तेल और 90% एलपीजी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के रास्ते भारत पहुंचता है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग से कार्गो जहाजों की आवाजाही बुरी तरह बाधित हुई है, जिससे भारत का तेल आयात खर्च 60% से अधिक बढ़ गया है.
सरकार की टैक्स कटौती से भी कम नहीं हुआ बोझ
सरकारी तेल कंपनियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी. सरकार ने अपना टैक्स राजस्व (Taxation Revenues) छोड़कर कंपनियों के घाटे को पाटने की कोशिश की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के आगे यह राहत भी कम पड़ गई.
चार साल बाद आया ऐसा उबाल
अप्रैल 2022 के बाद से तेल की कीमतों में यह सबसे बड़ा बदलाव है. इससे पहले मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं