अमेरिका और ईरान के बीच जंग के 100 दिन बीत जाने के बाद भी एनर्जी को लेकर अब कई सवाल हैं जिसके जवाब नहीं मालूम हैं. ऐसे में एक जरूरी सवाल भारत के एनर्जी सिक्योरिटी कैलकुलेशन पर छाया हुआ है. सवाल है कि क्या भारत होर्मुज से गुजरने वाले अपने तेल टैंकरों के लिए कोई कीमत चुका रहा है? यानी भारत को क्या ईरान की शर्तों के मुताबिक टोल देना पड़ रहा है? ये कीमत आर्थिक या राजनयिक कुछ भी हो सकती है.
गौरतलब है कि जंग की शुरूआत से पहले इसी होर्मुज के रास्ते भारत का लगभग 90 प्रतिशत क्रूड इम्पोर्ट होता है. वहीं 60 प्रतिशत एलपीजी की सप्लाई भी इसी संकरे रास्ते से होती थी. भारत के आम नागरिक के मन में चल रहे इस सवाल का जवाब केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया है. और जवाब 'नहीं' है.
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हरदीप पुरी ने NDTV के सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर आदित्य राज कौल को एक खास इंटरव्यू में बताया, "क्या हमने कोई टोल दिया है? जवाब साफ है. नहीं. मुझे इस बात अंदाजा था कि ये सवाल आने वाला है."
ईरान और ओमान के बीच 21 मील चौड़ा चोकपॉइंट, होर्मुज स्ट्रेट, दुनिया का सबसे जरूरी ऑयल ट्रांजिट कॉरिडोर है. अनुमान है कि दुनिया भर के पेट्रोलियम ट्रेड का लगभग 20 प्रतिशत यहीं से होकर गुजरता है. इस साल 28 फरवरी को मध्य पूर्व जंग शुरू होने के बाद से, इलाके के तनाव ने इस रास्ते से कमर्शियल शिपिंग की सेफ्टी को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ये डर लाजिमी है क्योंकि टैंकरों को इस बात का डर रहता है कि उसपर हमला हो सकता, जब्त किया जा सकता या उनसे पैसेज फीस मांगा जा सकता है.
#NDTVExclusive | "India Ensured Energy Stability Amid Global Crises": Union Minister Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) To NDTV's @AdityaRajKaul pic.twitter.com/s1AKQtolCJ
— NDTV (@ndtv) June 8, 2026
पैसेज अरेंजमेंट में ईरान भी था शामिल?
भारत के लिए यह खतरा बहुत ज़्यादा है. पेट्रोलियम मंत्री ने देश की स्ट्रक्चरल कमजोरी को साफ तौर पर माना है. उन्होंने कहा "भारत जो क्रूड इम्पोर्ट करता था, उसका 90% होर्मुज स्ट्रेट से आता था और भारत जो LPG इम्पोर्ट करता था, उसका लगभग 60% भी होर्मुज स्ट्रेट से ही आता था."
भारत हर दिन लगभग 50 लाख बैरल क्रूड इस्तेमाल करता है, इसलिए होर्मुज ट्रांजिट में थोड़ी सी भी रुकावट नेशनल इमरजेंसी बन जाएगी. ऐसी स्थिति में यह काफी मायने रखता है कि शिपमेंट बिना किसी टोल या साइड पेमेंट के जारी हैं.
जब पूछा गया कि क्या पैसेज अरेंजमेंट में ईरान शामिल था, तो मिनिस्टर ने तेहरान की भूमिका को नपे-तुले लेकिन गर्मजोशी भरे शब्दों में जवाब दिया. उन्होंने कहा, "ईरान के साथ कुछ अरेंजमेंट चल रहा है. वे हमारे साथ अच्छे रहे हैं. मेरा मतलब है, सभी पक्ष का व्यवहार हमारे लिए अच्छा रहा है."
हालांकि पेट्रोलियम मंत्री इस बारे में डिटेल में बताने से मना कर दिया. उन्होंने कहा, "मैं इस बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकता."
हरदीप पुरी ने शिपमेंट से जुड़ा किस्सा सुनाया
भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक रूप से कई तरह के रिश्ते रहे हैं. तेहरान पर अमेरिका के बैन के बावजूद, भारत कई बार ईरान के सबसे बड़े तेल कस्टमर्स में से एक रहा है और उसने ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर चाबहार पोर्ट में निवेश किया है. यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिसे भारत का सेंट्रल एशिया और अफ़गानिस्तान के लिए गेटवे के तौर पर देखा जाता है. दशकों से बना यह रिश्ता, मौजूदा संकट के दौरान कुछ हद तक अनकहा भरोसा देता दिख रहा है.
हरदीप पुरी ने एक किस्से के जरिए होर्मुज-रूट शिपमेंट को मैनेज करने की लॉजिस्टिक असलियत के बारे में बताया. इमरजेंसी LPG कार्गो को सुरक्षित करने के लिए अबू धाबी के ADNOC के हेड सुल्तान अल जाबेर को पर्सनली कॉल करने के बाद, पुरी को देर रात अमीराती अधिकारी का कॉल आया जिसमें कहा गया कि कार्गो तैयार हैं लेकिन भारत के जहाज नहीं आए हैं.
पुरी ने बताया, "देर रात, 10.30, 11 बजे, मैंने अपने ऑफिस के जरिए ऑयल मार्केटिंग कंपनी से बात की. मैंने कहा, तुम लोगों को क्या हो गया है? तुमने मुझे उनसे यह चीज मांगने पर मजबूर किया." अगली सुबह तक जहाजों को फिर से अरेंज कर दिया गया. हरदीप पुरी बोले, "शिपमेंट अभी भी होर्मुज स्ट्रेट से आ रहे हैं. लेकिन मैं इस बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकता."
68 परसेंट प्रोडक्शन बढ़ा
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत ने सप्लाई रूट्स को डायवर्सिफाई करके और घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन को 32,000 मीट्रिक टन प्रति दिन से बढ़ाकर 54,000 करके स्ट्रेट पर अपनी डिपेंडेंस कम कर ली है. ये 68 परसेंट की बढ़ोतरी है. इसके साथ ही यूनाइटेड स्टेट्स और ऑस्ट्रेलिया से नए LPG कार्गो सोर्स किए हैं.
केंद्रीय मंत्री ने पूरे होर्मुज प्रकरण को क्राइसिस से बचने के बजाय क्राइसिस मैनेजमेंट के टेस्ट के तौर पर देखा है. उन्होंने कहा, "किसी भी क्राइसिस का एक टाइम कॉन्टेक्स्ट होना चाहिए. अगर यह चलता रहता है, तो यह क्राइसिस नहीं है तब आप डिप्रेशन में हैं."
फिलहाल, भारत के टैंकर होर्मुज पार कर रहे हैं, उसके सिलेंडर भरे जा रहे हैं और पेट्रोलियम मंत्री के मुताबिक, इसके लिए हमें एक रुपया भी टोल नहीं देना पड़ रहा है.
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