IRCTC 'रेल नीर' (Rail Neer) की सप्लाई में कमी को पूरा करने के लिए पार्टनर की तलाश अभी भी पूरी नहीं कर पाई है, लेकिन कंपनी अब मौजूदा प्लांट की क्षमता बढ़ाने और नई साइट्स तैयार करने पर ज्यादा जोर दे रही है, ताकि कमी को पूरा किया जा सके. यह जानकारी Q1 FY27 की अर्निंग्स कॉल के दौरान मैनेजमेंट ने दी. चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल हिमालयन ने बताया कि 'रेल नीर' की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी रोज़ाना 17.77 लाख बोतल है (एक प्लांट बंद होने के बाद यह 18.4 लाख से कम हो गई है), जबकि सप्लाई लगभग 15.5 लाख बोतल की है. कुछ स्टेशनों पर मांग रोज़ाना 25-30 लाख बोतल तक पहुँच जाती है.
हिमालयन ने कहा, "जरूरत इससे कहीं ज्यादा है." उन्होंने आगे कहा कि इस कमी का फायदा "दुर्भाग्य से अनऑथराइज़्ड वेंडर उठाते हैं," और रेलवे व IRCTC दोनों ही इस समस्या को मानते हैं.
दो मौजूदा प्लांट की क्षमता बढ़ाई जा रही
एक्सपेंशन के बारे में हिमालयन ने कन्फर्म किया कि दो मौजूदा प्लांट की क्षमता बढ़ाई जा रही है. उन्होंने कहा, "अंबरनाथ के लिए, हम क्षमता को 2 लाख बोतल से बढ़ाकर 3 लाख कर रहे हैं. दानापुर के लिए, हम इसे रोजाना 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख बोतल करने की कोशिश कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि दोनों ही मामलों में काम इसी फाइनेंशियल ईयर में पूरा हो जाना चाहिए.
चार नए प्लांट लगाने की योजना थी जमीन दो को अलॉट की गई
हिमालयन ने बताया कि ग्रीनफील्ड साइट्स पर काम की रफ्तार मिली-जुली रही है. प्रयागराज, मैसूर, रांची और भागलपुर में चार नए प्लांट लगाने की योजना थी, लेकिन जमीन सिर्फ प्रयागराज और मैसूर में ही अलॉट की गई है, जबकि रांची के लिए अलॉटमेंट की पुष्टि पिछले ही दिन हुई. उन्होंने और देरी की संभावना से इनकार नहीं किया और कहा कि टाइमलाइन "आसानी से '26-'27 के बाद के फाइनेंशियल ईयर तक बढ़ सकती है." साथ ही, उन्होंने वाराणसी और पुणे में और प्लांट लगाने की संभावना का भी ज़िक्र किया, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि हर प्लांट 250 किलोमीटर के दायरे में कितनी सर्विस दे सकता है.
रेजिन की लागत में लगभग 30% की बढ़ोतरी
इस तिमाही में इस सेगमेंट के शॉर्ट-टर्म मुनाफ़े पर भी असर पड़ा. रेल नीर का रेवेन्यू सालाना आधार पर 2.83% बढ़कर ₹109 करोड़ हो गया, लेकिन मार्जिन पिछली तिमाही के 14% से गिरकर लगभग 10% रह गया. हिमालयन ने इसकी वजह वेस्ट एशिया संकट के कारण रेजिन की लागत में लगभग 30% की बढ़ोतरी को बताया, जिससे मटीरियल की लागत ₹55 करोड़ से बढ़कर ₹61 करोड़ हो गई और सेगमेंट का मुनाफ़ा लगभग ₹4 करोड़ कम हो गया.
यह स्थिति वैसी ही है जैसी मैनेजमेंट ने एक साल पहले बताई थी, जब तत्कालीन CMD संजय कुमार जैन ने एनालिस्ट्स को बताया था कि IEX समेत स्थापित बेवरेज ब्रांड्स के साथ बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं हुई है और पार्टनर खोजने का IRCTC का अनुभव "बहुत उत्साहजनक नहीं" रहा है. तब से कोई टाई-अप नहीं हो पाया है, जिससे कंपनी को पीक डिमांड के समय रोज़ाना 90 लाख से ज़्यादा बोतलों की सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए पार्टनरशिप के बजाय अपनी क्षमता बढ़ाने और नए प्लांट लगाने पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
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