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भारत का ऐसा राज्य जो कभी नहीं रहा अंग्रेजों का गुलाम; आजादी के 14 साल बाद मिली मुक्ति, बना देश का 25वां प्रदेश

क्या आप जानते हैं कि भारत का एक राज्य ऐसा भी था जो कभी अंग्रेजों का गुलाम नहीं रहा? गोवा पर ब्रिटिश नहीं बल्कि पुर्तगालियों का शासन था और 15 अगस्त 1947 के बाद भी यह भारत का हिस्सा नहीं बन सका था.

भारत का ऐसा राज्य जो कभी नहीं रहा अंग्रेजों का गुलाम; आजादी के 14 साल बाद मिली मुक्ति, बना देश का 25वां प्रदेश
भारत का वह राज्य जो कभी अंग्रेजों का गुलाम नहीं रहा, जानिए कैसे मिली आजादी
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जब 15 अगस्त 1947 को पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब भारत का एक हिस्सा उस समय भी विदेशी शासन के अधीन था. यह हिस्सा था गोवा, जिस पर अंग्रेजों का नहीं बल्कि पुर्तगालियों का नियंत्रण था. भारत सरकार ने पुर्तगाल से शांतिपूर्ण तरीके से गोवा सौंपने का आग्रह किया, लेकिन कई वर्षों तक बातचीत बेनतीजा रही. आखिरकार दिसंबर 1961 में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय' शुरू किया और 19 दिसंबर को गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त करा लिया. इस तरह गोवा स्वतंत्र भारत में शामिल होने वाला आखिरी विदेशी नियंत्रित प्रमुख क्षेत्र बना और भारत के क्षेत्रीय एकीकरण का महत्वपूर्ण अध्याय पूरा हुआ.

अंग्रेजों का नहीं, पुर्तगालियों का था शासन

भारत के अधिकांश हिस्से जहां ब्रिटिश शासन के अधीन थे, वहीं गोवा का इतिहास अलग था. पुर्तगाली सेनाओं ने वर्ष 1510 में गोवा पर कब्जा स्थापित किया और इसे अपने औपनिवेशिक साम्राज्य का हिस्सा बना लिया. इसके बाद गोवा लगभग 451 वर्षों तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहा. यही कारण था कि 1947 में ब्रिटिश शासन समाप्त होने के बावजूद गोवा स्वतः भारत का हिस्सा नहीं बन सका. पुर्तगाल लगातार यह दावा करता रहा कि गोवा उसका अभिन्न क्षेत्र है और उसने इसे भारत को सौंपने से इनकार कर दिया.

Freedom Movement: गोवा में आजादी के लिए संघर्ष

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आजादी के बाद भी जारी रहा संघर्ष

भारत की स्वतंत्रता के बाद गोवा में भी आजादी की मांग तेज हुई. गोवा के भीतर और बाहर कई संगठनों ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ आंदोलन चलाए. इन्हीं आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण नाम लिबिया लोबो सरदेसाई का भी था. उन्होंने अपने सहयोगी वामन सरदेसाई के साथ मिलकर 'वॉयस ऑफ फ्रीडम' नामक गुप्त रेडियो स्टेशन चलाया. बीबीसी को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से बात की है.

लिबिया लोबो सरदेसाई के अनुसार, "1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद मैं गोअन यूथ लीग से जुड़ी. मेरे भीतर गोवा की स्वतंत्रता के लिए हमेशा एक जुनून था. 1955 के बाद आर्थिक नाकेबंदी के कारण गोवा के लोगों तक बाहरी दुनिया की खबरें नहीं पहुंच पाती थीं. तब हमने भूमिगत रेडियो प्रसारण शुरू किया."

उन्होंने बताया कि यह रेडियो स्टेशन नवंबर 1955 से दिसंबर 1961 तक गोवा की सीमावर्ती जंगलों से संचालित किया गया और इसने गोवा के लोगों का मनोबल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई.

Freedom Movement: गोवा का मुक्ति आंदोलन

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पुर्तगाली प्रचार के खिलाफ बनी आवाज

लिबिया लोबो सरदेसाई के मुताबिक, उनका रेडियो स्टेशन रोज सुबह और शाम कोंकणी तथा पुर्तगाली भाषा में प्रसारण करता था. उन्होंने कहा, "यह जीवन आसान नहीं था, लेकिन हम अपने उद्देश्य के प्रति पूरी तरह समर्पित थे. पुर्तगाली सेना हमें तलाशने की कोशिश करती थी, लेकिन वे हमें पकड़ नहीं सके." रेडियो के माध्यम से गोवा के लोगों तक स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी जानकारी और प्रेरणादायक संदेश पहुंचाए जाते थे.

1961 में बदला इतिहास

कई वर्षों की कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद जब समाधान नहीं निकला तो भारत सरकार ने दिसंबर 1961 में सैन्य कार्रवाई का फैसला किया. घटनाक्रम तब और तेज हुआ जब पुर्तगाली बलों द्वारा भारतीय मछुआरों पर गोलीबारी की घटना सामने आई. इसके बाद भारत ने 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया. भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने संयुक्त अभियान चलाया. लगभग 36 घंटे तक चले अभियान के बाद गोवा के तत्कालीन गवर्नर जनरल मैनुअल एंटोनियो वासालो ई सिल्वा ने आत्मसमर्पण पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए. 19 दिसंबर 1961 को गोवा औपचारिक रूप से भारत का हिस्सा बन गया.

लिबिया लोबो सरदेसाई का वह यादगार पल

गोवा की स्वतंत्रता को याद करते हुए लिबिया लोबो सरदेसाई ने कहा, "जब मुझे खबर मिली कि पुर्तगालियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, वह मेरी जिंदगी का सबसे खुशियों भरा पल था." उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर 1961 को तत्कालीन रक्षा मंत्री वी.के. कृष्ण मेनन का संदेश भी उनके रेडियो स्टेशन से प्रसारित किया गया था, जिसमें पुर्तगाली सेना से बातचीत की अपील की गई थी.

केंद्र शासित प्रदेश से राज्य बनने तक का सफर

भारत में शामिल होने के बाद गोवा को दमन और दीव के साथ केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया. बाद में 30 मई 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और वह भारत का 25वां राज्य बन गया. आज गोवा अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समुद्र तटों, ऐतिहासिक चर्चों, मंदिरों और भारतीय-पुर्तगाली सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण परिचय यह है कि यह वह भारतीय राज्य है जिसने अंग्रेजों से नहीं, बल्कि पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन से लंबा संघर्ष कर 19 दिसंबर 1961 को स्वतंत्रता हासिल की और आजाद भारत का हिस्सा बना.

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