ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 (Section 301) के तहत दुनिया के 60 देशों के खिलाफ जबरन श्रम (Forced Labour) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नए सीमा शुल्क (Tariffs) लागू कर दिए हैं. इस लिस्ट में भारत को भी शामिल किया गया है, जिस पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत का नया शुल्क लगाया है. अमेरिका की ओर से लगाए गए इस नए टैरिफ का क्या मतलब है, भारत इससे कितना प्रभावित होगा, भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा, आइए आसान भाषा में समझते हैं.
भारत पर कितना टैरिफ लगा है और इसका क्या मतलब है?
अमेरिका ने 60 देशों के लिए 10% से 12.5% का टैरिफ स्लैब घोषित किया है. भारत को राहत देते हुए निचले स्लैब यानी 10% में रखा गया है.
- टाइमिंग: यह नया टैरिफ 24 जुलाई की सुबह (IST) से प्रभावी हो गया है.
- बदलाव: 24 जुलाई को अमेरिका का 10% का अस्थाई सेक्शन 122 सरचार्ज (Section 122 Surcharge) समाप्त हो रहा था. इसकी जगह अब सेक्शन 301 के तहत यह नया 10% टैरिफ लागू हो जाएगा.
यह टैरिफ क्यों लगाया गया?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने कहा कि यह कार्रवाई वैश्विक सप्लाई चेन से बंधुआ/जबरन श्रम (Forced Labour) से बने सामानों को खत्म करने के लिए की गई है. अमेरिका का मानना है कि जो देश जबरन श्रम पर कड़े नियम लागू नहीं करते, उन्हें अनुचित व्यापार लाभ मिलता है.
शुरुआत में जून में जब जांच का ड्राफ्ट आया था, तब भारत पर 12.5% का भारी शुल्क प्रस्तावित किया गया था. हालांकि, दोनों देशों के बीच श्रम मानकों को लेकर हुई सकारात्मक बातचीत और भारत द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में तुरंत संशोधन करने के बाद अमेरिका ने भारत पर लगने वाले शुल्क को घटाकर 10% कर दिया.
भारत सरकार ने क्या कदम उठाए?
- नीति में बदलाव: अमेरिकी जांच के दौरान ही भारत सरकार ने 14 जुलाई को अपनी विदेश व्यापार नीति में ऐतिहासिक संशोधन किया और जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध (Import Prohibition) लगा दिया.
- द्विपक्षीय बातचीत: भारत ने अमेरिकी जांच पर आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि भारत के संविधान और कानूनों में जबरन श्रम पूरी तरह प्रतिबंधित है. सरकार ने अमेरिका से मांग की है कि इन मुद्दों को प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Pact) के तहत ही सुलझाया जाए.
किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर और किन्हें मिली छूट?
- प्रभावित होने वाले सेक्टर: भारत से अमेरिका जाने वाले इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल व गारमेंट्स (कपड़े), रसायन (Chemicals), मशीनरी, प्लास्टिक, लेदर प्रोडक्ट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी और फर्नीचर जैसे श्रम-गहन (Labour-intensive) सेक्टर पर इसका असर दिखेगा.
- किन्हें मिली छूट (Exemptions): USTR ने स्पष्ट किया है कि दवाओं (Pharmaceuticals), सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण, कुछ कच्चे माल और ऐसे उत्पादों पर नया टैरिफ नहीं लगेगा, जिससे अमेरिकी बाजार में आपूर्ति का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
- सेक्शन 232 के उत्पाद: स्टील (52.5%), एल्युमीनियम (55%) और ऑटो कंपोनेंट्स (27.5%) पर पुराने सेक्शन 232 का ही टैरिफ लागू रहेगा, उस पर यह नया शुल्क लागू नहीं होगा.
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