दो घूंट पानी के लिए रोज जान पर खेलते बच्चे, नोएडा में गरीबों की दर्दनाक तस्वीर
नोएडा सेक्टर-78 के पास झुग्गी बस्ती में रहने वाले सैकड़ों लोग पिछले कई महीनों से एक लीक हो रही पाइपलाइन से नाले के अंदर उतरकर पानी भरने को मजबूर हैं. पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट.
'क्या करें भैया... स्कूल जाएं या पीने के लिए पानी भरें...' ये शब्द हैं 6 साल के राजा के, जो नोएडा के सेक्टर 78 के पास एक गंदे नाले में लीक हो रहे ट्यूबेल की पाइपलाइन से पीने का पानी भरने को मजबूर है. यह नजारा है नोएडा के सेक्टर 78 का. सुबह के करीब साढ़े नौ बज रहे हैं. कायदे से इस वक्त इन बच्चों के कंधों पर बस्ता होना चाहिए था और इन्हें स्कूल की क्लास में होना चाहिए था. लेकिन जब हम मौके पर पहुंचे, तो सामने जो नजारा था, वह किसी को भी अंदर तक झकझोर देने और स्तब्ध करने के लिए काफी था.
आसपास की झुग्गियों में रहने वाले सैकड़ों लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए एक नाले के भीतर उतरने को मजबूर हैं. 6-7 साल की छोटी-छोटी बच्चियां अपनी जान जोखिम में डालकर नाले के भीतर उतर रही थीं और बाल्टी में पानी भरकर ऊपर रख रही थीं. कुछ बच्चे बाल्टी में कपड़ा बांधकर उसे नीचे लटकाते और फिर खींचकर पानी निकाल रहे थे. नीचे बहता काला, गंदा नाला... अगर जरा सा भी पैर फिसला, तो कोई भी बच्चा उसमें गिर सकता है और एक बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता है.
इन बच्चों का बचपन स्कूल में पढ़ने, खेलने और कुछ नया सीखने की उम्र में, दो घूंट पानी के लिए संघर्ष करने में बीत रहा है. 'फ्री शिक्षा' और बड़े-बड़े विकास के दावों की बात तो छोड़िए, यहां इन मासूमों को पीने का साफ पानी तक नसीब हो रहा. ऊंची-ऊंची इमारतों, चमचमाती सड़कों और मेट्रो वाले नोएडा की यह वह काली सच्चाई है, जो इस शहर और यहां के प्रशासन के बड़े-बड़े दावों की पोल रही है.

कुछ ऐसे नाले में उतरकर पानी भरते हैं बच्चे
Photo Credit: NDTV
"डर नहीं लगता, क्योंकि प्यास बुझानी है"
यह कोई एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि यहां के लोगों की हर सुबह और शाम की यही नियति है. जब हम रिपोर्टिंग कर रहे थे, तभी सोनम नाम की एक छोटी बच्ची नाले में उतरी और वहां एक पाइप से रिस रहे पानी को बाल्टी में भरने लगी.
जब वह मशक्कत करके ऊपर आई, तो हमने उससे बात की. सोनम ने बेहद मासूमियत और मजबूरी के साथ कहा, 'भैया, हम क्या करें... रोजाना यहां आकर ऐसे ही पानी भरते हैं. इसी पानी को पीते हैं और इसी से घर के सारे काम, कपड़े-बर्तन धोते हैं. सुबह और शाम हम यहां बाल्टी लेकर आते हैं. पिछले 3 महीने से हम ऐसे ही पानी भर रहे हैं. उससे पहले आगे वाले नाले में एक दूसरे पाइप से पानी भरते थे.'

यहां से रोजाना पानी भरने वाली सोनम
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जब हमने पूछा कि ऐसे नाले में उतरने पर गिरने या डूबने का डर नहीं लगता? बच्ची ने तपाक से कहा- 'नहीं.' इस एक छोटे से 'नहीं' में जिंदगी की वो बड़ी मजबूरी छिपी थी, जहां डर से ज्यादा प्यास का अहसास हावी है. खतरा कितना भी हो, लेकिन प्यास तो बुझानी ही है.
प्रशासन की पोल खोलती बच्ची की निराशा
सोनम की एक बात ने पूरे नोएडा प्रशासन और सिस्टम की संवेदनहीनता की पोल खोलकर रख दी. उसने बड़ी निराशा भरी आंखों से हमारी तरफ देखते हुए कहा, 'भैया, आप आए हो... ऐसे और भी मीडिया वाले आए. लोग हमारा वीडियो बनाकर ले जाते हैं, इंस्टाग्राम पर डाल देते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं है.'
उस छोटी सी बच्ची की आंखों की वह निराशा बता रही थी कि उन्हें अब सिस्टम से कोई उम्मीद नहीं बची है. वे मान चुके हैं कि उनकी जिंदगी इसी नाले के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है.

स्कूल से छुट्टी लेकर पानी भरने आती हैं मुस्कान
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वहां खड़ी एक और बच्ची, मुस्कान ने भी बताया, 'कई महीनों से यही हालात हैं. हम रोज आते हैं, इसी पानी से खाना भी बनता है.'
'सुबह-शाम लगती है पानी भरने वालों की लाइन'
नाले के पास ही जूस की रेहड़ी लगाने वाले शिवम इस रोजमर्रा के संघर्ष के चश्मदीद हैं. शिवम बताते हैं, 'यहां रोज लोग ऐसे ही पानी भरते हैं. झुग्गियों में रहने वाले यहीं से पानी ले जाते हैं. अभी तो भीड़ कम दिख रही है, सुबह और शाम तो यहां पानी भरने वालों की लंबी लाइन लग जाती है, जिससे बाहर पूरा कीचड़ हो जाता है.'

नाले के पास रेहड़ी लगाने वाले शिवम
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नाले में पानी कहां से आ रहा है?
जब हमने स्थानीय लोगों से बात की, तो अथॉरिटी की एक बड़ी लापरवाही सामने आई. दरअसल, पास में ही नोएडा अथॉरिटी का एक सरकारी ट्यूबवेल है. इसी ट्यूबवेल की मुख्य पाइपलाइन इस गंदे नाले के नीचे से होकर गुजर रही है. पाइपलाइन लीक हो रही है और उसी लीकेज से रिसने वाले पानी को लोग भरते हैं और अपने घरों में इस्तेमाल करते हैं.
सवाल यह है कि क्या नोएडा अथॉरिटी और प्रशासन तब जागेगा, जब कोई मासूम पानी भरते हुए इस नाले की भेंट चढ़ जाएगा? या फिर सोनम की कही बात ही सच साबित होती रहेगी कि 'वीडियो बनते रहेंगे, लेकिन होगा कुछ नहीं.'
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