अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर Office of the United States Trade Representative (USTR) ने दुनिया के 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों (जो अमेरिकी आयात का 99.4% हिस्सा हैं) पर नए सीमा शुल्क लागू करने का ऐलान कर दिया है. अमेरिका ने उन देशों पर 10% से 12.5% तक का टैरिफ थोपा है जो उसके अनुसार 'फॉर्र्स्ड लेबर' (जबरन श्रम) से बने सामानों का आयात रोकने में विफल रहे हैं.
इस वैश्विक टैरिफ युद्ध में भारत, चीन, रूस और भारत के पड़ोसी देश कहां खड़े हैं, आइए जानते हैं.
10% वाले 'निचले स्लैब' में कौन-कौन से देश हैं?
अमेरिका ने केवल 17 देशों को 10% वाले निचले स्लैब में रखा है. ये वे देश हैं जिन्होंने या तो अपने यहां जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर बैन लगा दिया है, या पारस्परिक व्यापार समझौते में इसका वादा किया है:
- भारत और पड़ोसी देश: भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया जैसे एशियाई देशों को 10% स्लैब में रखा गया है.
- अन्य प्रमुख देश: ब्रिटेन (UK), कनाडा, मेक्सिको, अर्जेंटीना, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, जॉर्डन, और ट्रिनिडाड एंड टोबैगो.
यहां ध्यान देने वाली बात ये भी है कि बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया को अतिरिक्त लाभ देते हुए अमेरिकी कॉटन और फाइबर का इस्तेमाल करने पर विशेष टैरिफ-रेट कोटा की छूट भी दी गई है.
चीन, रूस, ब्रिक्स देशों पर 12.5% का 'भारी टैरिफ'
जिन 43 देशों ने अमेरिका के मुताबिक, जबरन श्रम के खिलाफ कड़े कानून लागू नहीं किए हैं, उन पर 12.5% का अधिकतम टैरिफ थोपा गया है.
- चीन (China): चीन पर अमेरिका ने 12.5% का पूरा टैरिफ लगाया है. इसके अलावा चीन पर जल्द ही अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता (Excess Manufacturing Capacity) को लेकर भी एक और नया टैरिफ लगाने की तैयारी है.
- रूस और ब्रिक्स सहयोगी: ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को भी 12.5% वाले भारी स्लैब में धकेल दिया गया है.
यूरोपीय संघ और जापान के लिए क्या है नियम?
यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान जैसे विकसित देशों के लिए अमेरिका ने एक अलग फॉर्मूला बनाया है. इन देशों पर 10% या 12.5% का टैरिफ उनके मौजूदा MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) रेट्स को घटाकर (Net of MFN) लागू किया जाएगा, क्योंकि इनके अमेरिका के साथ अलग से व्यापार समझौते मौजूद हैं.
भारत के लिए क्यों है राहत की बात?
भारत के लिए राहत की बात यह है कि उसे चीन (12.5%) के मुकाबले कम टैरिफ (10%) का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के साथ भारत अब एक ही या बेहतर ब्रैकेट में खड़ा है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों का कंपटीशन बना रहेगा.
(ये रिपोर्ट इंटर्न मधुलिका ने तैयार की है).
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