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अमेरिका में US-FED ने ब्‍याज दरें बढ़ाईं, नहीं मानी ट्रंप की बात, महंगाई ने किया मजबूर, जानिए भारत पर क्या असर

अमेरिका में केंद्रीय बैंक ने FOMC की मीटिंग के बाद ब्‍याज दरें 25 बेसिस प्‍वाइंट तक बढ़ा दी है. इसका न केवल अमेरिका पर बल्कि ग्‍लोबल इकोनॉमी पर असर पड़ सकता है. भारत पर क्‍या असर हो सकते हैं, ये समझ लें.

अमेरिका में US-FED ने ब्‍याज दरें बढ़ाईं, नहीं मानी ट्रंप की बात, महंगाई ने किया मजबूर, जानिए भारत पर क्या असर
US FED ने बढ़ाई ब्‍याज दरें, ट्रंप ने घटाने को कहा था
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US-FED) ने ब्‍याज दरें बढ़ा दी है. लगातार बढ़ती महंगाई के बीच FOMC यानी 'फेडरल ओपन मार्केट कमेटी' की कमेटी ने ब्‍याज दरों को 25 बेसिस प्‍वाइंट बढ़ाने का फैसला लिया. इसी के साथ अमेरिका में ब्‍याज दरें 3.75% से 4.00% के बीच हो गई हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने कहा कि मौजूदा हालात के आकलन के बाद ये फैसला लिया गया है. 

अमेरिका का ये फैसला भारत पर भी असर डाल सकता है. ब्‍याज दरें बढ़ने से डॉलर मजबूत होगा तो जाहिर है कि रुपया कमजोर होगा. इससे बॉन्‍ड और कच्‍चे तेल की कीमतों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश पर भी असर पड़ सकता है. 

 महंगाई ने किया मजबूर, नहीं मानी ट्रंप की बात

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्‍याज दरें बढ़ाने का ये फैसला अमेरिका में लगातार बनी हुई ऊंची महंगाई से निपटने के लिए उठाया गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दरें घटाने की मांग की थी, लेकिन महंगाई से निपटने के लिए FOMC ने सर्वसम्‍मति से ब्‍याज दरें बढ़ाने का फैसला लिया. 

इस बीच व्हाइट हाउस ने फेडरल रिजर्व के फैसले की आलोचना की है. प्रवक्ता कुश देसाई ने फॉक्स न्यूज से कहा, 'फेडरल रिजर्व का ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला काफी दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रशासन के नजरिए से, इसके पीछे कोई बहुत मजबूत आर्थिक तर्क नहीं था.' 

वहीं दूसरी ओर FOMC ने महंगाई के 'ऊंचे' स्तर पर बने रहने का हवाला दिया. बताया गया कि इस फैसले से महंगाई दर को 2% के लक्ष्य पर वापस लाने में मदद मिलेगी. कुछ फेड पॉलिसीमेकर्स ने संभावना जताई है कि साल खत्म होने से पहले कम से कम एक बार और ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती है.  

भारत पर क्या असर हो सकता है? 

US फेड रिजर्व के फैसले का भारतीय बाजार पर भी असर पड़ सकता है. ब्याज दरें बढ़ने से डॉलर में एसेट्स निवेशकों को ज्‍यादा आकर्षित कर सकते हैं. ऐसे में भारतीय बाजार में पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है. भारत में निवेशक आज रुपये, इक्विटी, सरकारी बॉन्ड यील्ड, विदेशी पोर्टफोलियो फ्लो, सोने के दाम पर नजर रख सकते हैं. मार्केट में उन शेयरों में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल सकता है, जिनमें विदेशी निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी है. 

कच्चे तेल की कीमत पर भी भारत की नजर रहेगी, कारण कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगर तेल महंगा हुआ तो भारत के लिए कच्चा तेल खरीदना और महंगा हो सकता है. 

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