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उज्‍ज्वला योजना में LPG सिलेंडर 9 से घटाकर 4 क्‍यों किए? सरकार का जवाब आ गया! पेट्रोलियम मंत्री ने बताई वजह

उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या कम किए जाने पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सब्सिडी वाली इस स्‍कीम की समीक्षा के बाद सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया. अंदर पढ़ें, उन्‍होंने और क्‍या कुछ बताया.

उज्‍ज्वला योजना में LPG सिलेंडर 9 से घटाकर 4 क्‍यों किए? सरकार का जवाब आ गया! पेट्रोलियम मंत्री ने बताई वजह
Pradhan Mantri Ujjwala Yojana में क्‍यों कम की गई सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्‍या?
Source: NDTV Graphics/Canva/PTI

LPG गैस पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी वाली उज्‍ज्वला योजना में सरकार ने हाल ही में बड़ा बदलाव किया है. अब एक साल में 9 की बजाय केवल 4 सिलेंडरों पर 300-300 रुपये की सब्सिडी मिलेगी. यानी लाभार्थी परिवार को सालभर में 2,700 रुपये की बजाय केवल 1,200 रुपये की सब्सिडी मिलेगी. इसे सीधे-सीधे 1,500 रुपये के नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल है कि सरकार ने ऐसा क्‍यों किया? इस सवाल पर सरकार का जवाब सामने आया है. जवाब दिया है- केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने. उन्‍होंने कहा कि उज्‍ज्वला योजना की समीक्षा के बाद सरकार ने इतना बड़ा फैसला लिया है. 

क्‍या सब्सिडी वाले सिलेंडरों का हो रहा था बेजा इस्‍तेमाल? 

उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या कम किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, 'सरकार को ऐसे विश्वसनीय संकेत मिले थे कि कुछ लोग सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे थे या उन्हें दूसरे लोगों को बेच रहे थे. इसी वजह से पात्रता व्यवस्था की समीक्षा की गई और नियमों में बदलाव किया गया.' 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गरीब परिवारों को सस्ता गैस उपलब्ध कराना है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सब्सिडी का गलत इस्तेमाल न हो. उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और किसी भी तरह के लीकेज को रोकने पर लगातार काम कर रही है.'  

सरकार की प्राथमिकता सस्ती ऊर्जा और पारदर्शिता

पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य लोगों को किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही कल्याणकारी योजनाओं की दक्षता बढ़ाना और सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना भी उतना ही जरूरी है. 

उन्होंने कहा कि सरकार लगातार इस बात पर नजर रखती है कि लाभ सही लोगों तक पहुंचे और सरकारी सहायता का गलत इस्तेमाल न हो. IANS को दिए गए इंटरव्‍यू में उन्‍होंने और भी कई मसलों पर बात की. 

तेल बाजार में स्थिरता से निपटने में सक्षम है भारत 

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत वैश्विक कच्चे तेल बाजार में किसी भी अस्थिरता से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि सरकार पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव को सफलतापूर्वक संभाल रही है और आगे भी हालात पर लगातार नजर रखेगी.

पुरी ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत है क्योंकि देश ने तेल और गैस की आपूर्ति के कई वैकल्पिक स्रोत विकसित किए हैं. उन्होंने बताया कि भारत की करीब 7% LPG आपूर्ति और लगभग 20 % कच्चे तेल का आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है. 

मंत्री ने कहा कि आने वाले 30 या 60 दिनों में भी सरकार उसी तरह स्थिति को संभालने का प्रयास करेगी जैसे पिछले 100 दिनों में किया गया है. हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय हालात बदलते हैं और तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होती है तो स्थिति की फिर से समीक्षा करनी पड़ सकती है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. 

उन्‍होंने कहा, 'कुछ लोग युद्धविराम और संभावित ईरान-अमेरिका समझौते की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ तनाव बढ़ने की आशंका जता रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह इन संभावनाओं पर कोई अटकल नहीं लगाना चाहते.' 

पेट्रोल की कीमतों पर भी दिया जवाब

पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें चार साल पहले की तुलना में अभी भी कम हैं. उन्होंने इसका श्रेय नवंबर 2021, मई 2022 और उसके बाद केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौतियों को दिया. 

पुरी ने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. देश में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ रही है, बायोफ्यूल का उपयोग बढ़ा है और सोलर एनर्जी क्षमता का लगातार विस्तार हो रहा है. उन्होंने बताया कि तेल और गैस की एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन गतिविधियां भी बढ़ रही हैं. सरकार की 'समुद्र मंथन' पहल के तहत नए तेल और गैस कुओं की ड्रिलिंग तथा घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए 90,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं.

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