टाटा ग्रुप में चल रहे विवाद में नोएल टाटा के विरोध में और एन चंद्रशेखरन के पक्ष में खड़े दिख रहे वेणु श्रीनिवासन इन दिनों अपने ही कारोबारी साम्राज्य में उत्तराधिकार को लेकर चल रहे विवाद में उलझ गए हैं. देश के सबसे बड़ी टू-व्हीलर्स कंपनियों में शुमार TVS Motor कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन के फैमिली मेंबर्स इन दिनों आपस में उलझे हुए हैं.
किसी परिवार ने कई पीढ़ियों की मेहनत से बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया हो, तो अगली पीढ़ी को विरासत सौंपते समय एक बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है. क्या किसी कंपनी को चलाने की जिम्मेदारी सौंपने का मतलब उसकी संपत्ति का मालिकाना हक भी देना है? या कारोबार का मैनेजमेंट और संपत्ति में आर्थिक हिस्सेदारी दो अलग-अलग चीजें हैं?
वेणु श्रीनिवासन के परिवार में उत्तराधिकार को लेकर चल रहा विवाद इसी सवाल पर केंद्रित है. इस मामले में वीनू और उनके बेटे सुदर्शन वीनू एक तरफ हैं, जबकि उनकी पत्नी मल्लिका श्रीनिवासन और बेटी लक्ष्मी वीनू दूसरी तरफ हैं.
विवाद का एक अहम पहलू दोनों भाई-बहनों से जुड़े कारोबारों की मार्केट वैल्यू में बड़ा अंतर भी है. आइए, समझते हैं कि विवाद की जड़ क्या है और इसमें कंपनियों, शेयरों और फैमिली ट्रस्ट की क्या भूमिका है. और ये भी कि परिवार में कौन किसके साथ खड़ा दिख रहा है.
TVS परिवार में कौन किसके साथ है?
पिता (वीनू श्रीनिवासन) और बेटा (सुदर्शन वीनू) एक पक्ष में खड़े दिखते हैं, जिनका मानना है कि पारिवारिक बंटवारे और उत्तराधिकार का काम पूरा हो चुका है. वहीं, दूसरी ओर मां (मल्लिका श्रीनिवासन) और बेटी (लक्ष्मी वीनू) का कहना है कि कारोबार की जिम्मेदारी अलग बात है, लेकिन संपत्ति और आर्थिक हितों का निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन अभी बाकी है.

मल्लिका श्रीनिवासन, TAFE, Chairman & Managing Director/ Photo Credit: TMTL website
NDTV से बातचीत में विभावंगल अनुकूलकारा के फाउंडर और MD सिद्धार्थ मौर्य ने कहा कि पारिवारिक कारोबारों के लिए उत्तराधिकार की योजना केवल संपत्ति का हस्तांतरण नहीं होता, बल्कि इससे कहीं आगे होता है. प्रोफेशनल राय-मशविरे के साथ बनाई गई योजना भविष्य में किसी तरह के विवाद से बचा सकती है. बहरहाल पहले ये जान लेते हैं कि विवाद किन लोगों के बीच है. श्रीनिवासन के परिवार के चार सदस्य इसके केंद्र में दिखते हैं.
- वेणु श्रीनिवासन: TVS Motor Company के चेयरमैन एमेरिटस हैं. उनका कहना है कि बच्चों के बीच कारोबार का बंटवारा परिवार के हित में किया गया था और इससे जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी हैं.
- मल्लिका श्रीनिवासन: वीनू की पत्नी और ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड (TAFE) की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. वो बेटी लक्ष्मी की इस मांग का समर्थन कर रही हैं कि परिवार के आर्थिक हितों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निपटारा होना चाहिए.
- सुदर्शन वीनू: वीनू और मल्लिका के बेटे हैं. वो TVS Motor Company के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर और TVS Holdings के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. उनका कारोबारी जुड़ाव समूह के दोपहिया और तिपहिया वाहन कारोबार से है.
- लक्ष्मी वीनू: परिवार की बेटी हैं. वो Sundaram-Clayton की मैनेजिंग डायरेक्टर और TAFE की वाइस चेयरपर्सन हैं. उनका और उनकी मां का कहना है कि कारोबार चलाने की जिम्मेदारी मिलने से परिवार की संपत्ति में आर्थिक हिस्सेदारी का सवाल अपने आप हल नहीं हो जाता.
इस तरह परिवार दो पक्षों में बंटा नजर आता है. एक तरफ वीनू और सुदर्शन हैं, जबकि दूसरी तरफ मल्लिका और लक्ष्मी हैं.

लक्ष्मी वीनू, Vice Chairman - TAFE/ Photo Credit: TAFE Motors and Tractors Limited
क्या है TVS परिवार का उत्तराधिकार विवाद?
इस विवाद का मुख्य सवाल है कि क्या दोनों बच्चों को अलग-अलग कारोबार की जिम्मेदारी सौंपने के साथ परिवार की संपत्ति में उनके आर्थिक हितों का बंटवारा भी पूरा हो गया था?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुदर्शन को TVS Motor Company से जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी मिली, जबकि लक्ष्मी Sundaram-Clayton से जुड़ीं. दोनों अपने-अपने कारोबार में मैनेजमेंट की भूमिका निभा रहे हैं. लेकिन विवाद इस बात पर है कि क्या कारोबार की जिम्मेदारी तय होने के साथ ही संपत्ति में हिस्सेदारी भी अंतिम रूप से तय कर दी गई थी.
वीनू का पक्ष है कि कारोबार और संपत्तियां उनकी थीं और उन्हें अपनी समझ के मुताबिक उनका बंटवारा करने का अधिकार था. उनका कहना है कि अगली पीढ़ी को कम उम्र में ही कारोबार का मालिकाना हक और नियंत्रण देकर अपने उद्यम विकसित करने का अवसर दिया गया. उनके पक्ष के मुताबिक, ये व्यवस्थाएं उस समय के मूल्यांकन के आधार पर की गई थीं और परिवार के सदस्यों की राय भी ली गई थी.
इसके उलट, मल्लिका और लक्ष्मी का कहना है कि परिवार के आर्थिक हितों का निपटारा पारदर्शी मूल्यांकन, संपत्तियों पर बातचीत और आपसी सहमति के साथ नहीं हुआ. उनका तर्क है कि मैनेजमेंट की जिम्मेदारी सौंपना और संपत्ति में आर्थिक अधिकार तय करना दो अलग-अलग बातें हैं.
यानी एक पक्ष के मुताबिक उत्तराधिकार की व्यवस्था पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि परिवार की संपत्ति में हिस्सेदारी का सवाल अब भी अनसुलझा है.

सुदर्शन वेणु, Chairman and Managing Director, TVS Motor Company/ Photo Credit: TVS website
TVS समूह का बंटवारा क्यों हुआ था?
इस विवाद को समझने के लिए TVS समूह के बड़े पारिवारिक बंटवारे और वेणु श्रीनिवासन के अपने परिवार के भीतर हुए बंटवारे को अलग-अलग समझना जरूरी है.
TVS समूह की स्थापना टीवी सुंदरम अयंगर ने एक सदी से भी पहले की थी. समय के साथ संस्थापक परिवार की अलग-अलग शाखाएं अलग-अलग कारोबार से जुड़ गईं.
2020 में समूह के व्यापक कारोबारी हितों का अलग-अलग पारिवारिक शाखाओं के बीच बंटवारा हुआ. इस व्यवस्था में कंपनियों का पुनर्गठन और परिवार की अलग-अलग शाखाओं के बीच वित्तीय देनदारियां भी शामिल थीं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीनू की शाखा के पास TVS Motor Company से जुड़ा प्रमुख ऑटोमोबाइल कारोबार रहा. इस समझौते में परिवार की दूसरी शाखाओं को करीब 2,000 करोड़ रुपये की देनदारियों का भुगतान भी शामिल था.
हालांकि, मौजूदा विवाद सिर्फ इसी बंटवारे को लेकर नहीं है.
वीनू का पक्ष कहता है कि उनके अपने परिवार में उत्तराधिकार की व्यवस्था इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा थी और इसे लागू किया जा चुका है. मल्लिका और लक्ष्मी का कहना है कि बड़े TVS परिवार की अलग-अलग शाखाओं के बीच हुआ समझौता, वीनू के परिवार में बच्चों के आर्थिक हितों का अंतिम निपटारा नहीं माना जा सकता.
यानी दो अलग सवाल हैं.
- पहला- TVS समूह का बंटवारा अलग-अलग पारिवारिक शाखाओं के बीच कैसे हुआ?
- और दूसरा- वेणु श्रीनिवासन के परिवार में संपत्ति का बंटवारा किस तरह हुआ?
2024 के फैमिली एग्रीमेंट पर विवाद क्यों?
परिवार के चारों सदस्यों के बीच 21 मार्च 2024 को एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे. इस समझौते में TVS ब्रांड के इस्तेमाल और कुछ कारोबारी क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा से जुड़ी शर्तें शामिल थीं.
बताई गई शर्तों के मुताबिक, सुदर्शन ने डाई-कास्टिंग कारोबार में TVS ब्रांड के इस्तेमाल और ट्रैक्टर व कृषि उपकरण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा से जुड़ी कुछ पाबंदियां स्वीकार की थीं.
वहीं, मल्लिका और लक्ष्मी ने भी तय अवधि के लिए दोपहिया, तिपहिया, वित्तीय सेवाओं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में ब्रांड के इस्तेमाल या कारोबार करने से जुड़ी पाबंदियां स्वीकार की थीं.
वीनू का पक्ष इस समझौते और इसके बाद की व्यवस्थाओं को परिवार के कारोबार और संपत्तियों के व्यापक बंटवारे का हिस्सा मानता है.
लेकिन मल्लिका और लक्ष्मी का कहना है कि MoU का दायरा ब्रांड के इस्तेमाल और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी शर्तों तक सीमित था. उनके मुताबिक, इससे परिवार की आर्थिक संपत्ति का अंतिम बंटवारा तय नहीं हुआ.
यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है. परिवार के सदस्य किन क्षेत्रों में कारोबार कर सकते हैं या किसी साझा ब्रांड का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं, ये तय करने वाला समझौता अपने आप ये तय नहीं करता कि परिवार की कंपनियों के शेयरों और दूसरी संपत्तियों का मालिक कौन है.
यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच सिर्फ बंटवारे की निष्पक्षता को लेकर ही नहीं, बल्कि 2024 के समझौते का वास्तविक दायरा क्या था, इसे लेकर भी मतभेद हैं.

TVS Motor और Sundaram-Clayton की वैल्यू में कितना अंतर?
विवाद के चर्चा में आने की एक वजह दोनों भाई-बहनों से जुड़े कारोबारों के बाजार मूल्य में बड़ा अंतर भी है.
दिए गए इनपुट के मुताबिक, संबंधित समय पर TVS Motor Company का मार्केट कैप करीब 1.83 लाख करोड़ रुपये था, जबकि Sundaram-Clayton का मार्केट कैप करीब 24,000 करोड़ रुपये था.
दोनों कंपनियों के बाजार मूल्य में ये बड़ा अंतर है. लेकिन सिर्फ इन आंकड़ों के आधार पर ये तय नहीं किया जा सकता कि परिवार के भीतर संपत्ति का बंटवारा निष्पक्ष था या नहीं.
इसकी वजह है कि दोनों कंपनियों का कारोबार, शेयरहोल्डिंग का ढांचा, वित्तीय देनदारियां और दूसरे आर्थिक हित अलग-अलग हैं. साथ ही, शेयर बाजार में कंपनियों का मूल्य समय के साथ बदलता रहता है.
वीनू का पक्ष कहता है कि बंटवारा उस समय के मूल्यांकन के आधार पर किया गया था. उनके मुताबिक, बाद में कारोबार के प्रदर्शन या बाजार मूल्य में बदलाव होने से अपने आप पहले से तय समझौते को दोबारा खोलने का आधार नहीं बनता.
दूसरी तरफ, मल्लिका और लक्ष्मी का कहना है कि परिवार की आर्थिक संपत्ति का पारदर्शी मूल्यांकन और आपसी सहमति से बंटवारा नहीं हुआ है.
इसलिए असल सवाल केवल ये नहीं है कि किस कंपनी का मार्केट कैप कितना है. ये भी देखना होगा कि बंटवारे में कौन-कौन सी संपत्तियां, शेयर, देनदारियां और दूसरे आर्थिक हित शामिल थे.
अगर एक भाई-बहन से जुड़ी कंपनी का बाजार मूल्य दूसरी कंपनी से काफी ज्यादा है, तो भी परिवार की कुल संपत्ति में दोनों की हिस्सेदारी का आकलन करने के लिए पूरी वित्तीय तस्वीर देखना जरूरी है.
TVS Holdings और फैमिली ट्रस्ट की क्या भूमिका है?
परिवार की संपत्ति को होल्डिंग कंपनियों और ट्रस्ट के जरिए रखने की व्यवस्था ने भी इस विवाद को जटिल बनाया है.
TVS Holdings की अहम भूमिका है, क्योंकि इसके पास TVS Motor Company की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी है. हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, TVS Holdings के पास TVS Motor की 50.26% हिस्सेदारी है.
TVS Holdings के मालिकाना ढांचे में भी एक पारिवारिक ट्रस्ट की बड़ी भूमिका है. VS Trust के पास TVS Holdings की 66.55% हिस्सेदारी बताई गई है. इसके अलावा परिवार की दूसरी हिस्सेदारियां और ट्रस्ट भी हैं.
HT की एक रिपोर्ट के मुताबिक, VS Trust के एकमात्र ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन हैं. इससे परिवार की शेयरहोल्डिंग व्यवस्था में इस ट्रस्ट की भूमिका अहम हो जाती है.
विवाद उस समय और चर्चा में आया, जब VS Trust के जरिए शेयर ट्रांसफर के बाद कंपनी की फाइलिंग में वीनू और सुदर्शन को महत्वपूर्ण लाभकारी मालिकों के रूप में पहचानने की खबरें सामने आईं.
लक्ष्मी ने इन खुलासों पर हैरानी जताते हुए परिवार की मालिकाना व्यवस्था को लेकर स्पष्टता मांगी है.
मल्लिका और लक्ष्मी का तर्क है कि ट्रस्ट की मौजूदगी या किसी सदस्य को कारोबार चलाने की जिम्मेदारी मिल जाना, परिवार के हर सदस्य के आर्थिक हितों का अंतिम निपटारा नहीं है.
इसे ऐसे समझिए- एक ट्रस्ट के पास कंपनी के शेयर हो सकते हैं, होल्डिंग कंपनी के पास किसी ऑपरेटिंग कंपनी के शेयर हो सकते हैं और परिवार का कोई सदस्य उस कारोबार को चला सकता है. ये तीनों अलग-अलग कानूनी और आर्थिक संबंध हैं.
किसे संपत्ति से अंतिम आर्थिक लाभ मिलता है, ये समझने के लिए संबंधित शेयरहोल्डिंग दस्तावेजों, ट्रस्ट की शर्तों और परिवार के बीच हुए वैध समझौतों को देखना होगा.
TAFE का इस विवाद से क्या संबंध है?
TAFE भी इस विवाद में एक अहम कड़ी है. मल्लिका श्रीनिवासन इसकी चेयरपर्सन व मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, जबकि लक्ष्मी इसकी वाइस चेयरपर्सन हैं.
वीनू के पक्ष ने TAFE के मालिकाना हक और नियंत्रण को लक्ष्मी को सौंपने की मल्लिका की मंशा का हवाला देते हुए इसे परिवार की व्यापक उत्तराधिकार व्यवस्था से जोड़ा है.
हालांकि, मल्लिका और लक्ष्मी इस व्याख्या से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि TAFE एक अलग कारोबारी समूह से जुड़ी कंपनी है और इसे वीनू के परिवार के भीतर आर्थिक हितों का बंटवारा पूरा होने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए.
उनके मुताबिक, मल्लिका की TAFE में भूमिका या लक्ष्मी की वहां जिम्मेदारी, TVS परिवार की संपत्ति के पारदर्शी बंटवारे का विकल्प नहीं हो सकती.
इसी वजह से विवाद को केवल इस सवाल तक सीमित नहीं किया जा सकता कि किस बच्चे को कौन-सी कंपनी मिली. अलग-अलग कंपनियों का मालिकाना ढांचा और परिवार के सदस्यों के आर्थिक हित अलग-अलग तरीके से तय हो सकते हैं.
राजी-खुशी निकल जाए समाधान तो बेहतर
मल्लिका और लक्ष्मी ने पारदर्शी मूल्यांकन, बातचीत और सभी पक्षों के वैध आर्थिक हितों को मान्यता देते हुए सौहार्दपूर्ण समाधान की मांग की है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 18 महीने से चल रहे इस विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें भी हुईं, लेकिन मतभेद दूर नहीं हो सके. खबरों में पक्षों के वकीलों से सलाह लेने और कानूनी विवाद की आशंका का भी जिक्र किया गया है.
ये मामला केवल TVS परिवार तक सीमित नहीं है. बड़े पारिवारिक कारोबारों में उत्तराधिकार तय करते समय नेतृत्व, मालिकाना हक और संपत्ति के बंटवारे को स्पष्ट करना क्यों जरूरी है, ये विवाद उस सवाल को सामने लाता है.
विभवांगल अनुकूलाकरा के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्य ने कहा कि पारिवारिक कारोबार में उत्तराधिकार योजना केवल संपत्ति ट्रांसफर करने तक सीमित नहीं होती. इसमें कारोबार की निरंतरता, बेहतर गवर्नेंस और मालिकाना हक व नेतृत्व को लेकर स्पष्टता भी जरूरी है.
मौर्य के मुताबिक, अगर उत्तराधिकार की योजना ठीक से नहीं बनाई जाती, तो संपत्ति के मूल्यांकन, नेतृत्व और धन के बंटवारे को लेकर मतभेद पैदा हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि पेशेवर सलाह के साथ बनाई गई उत्तराधिकार योजना भविष्य में ऐसे विवादों से बचने में मदद कर सकती है.
TVS परिवार के विवाद के केंद्र में यही सवाल है- कारोबार की जिम्मेदारी, कंपनी के शेयरों का मालिकाना हक और परिवार की कुल संपत्ति में आर्थिक हिस्सेदारी, क्या ये तीनों एक ही चीज हैं, या इनके लिए अलग-अलग और स्पष्ट समझौते जरूरी हैं.
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