Sugar Price Hike: देश में चीनी की आसमान छूती कीमतों के बीच सरकार का बड़ा बयान सामने आया है. सरकार का साफ कहना है कि घबराने या जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर घर में भरने की जरूरत नहीं है. देश में पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद है और आने वाले महीनों में सप्लाई भी बनी रहेगी. इतना ही नहीं, सरकार चीनी के स्टॉक, कीमत और बाजार की मांग पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके और आम लोगों को महंगी चीनी न खरीदनी पड़े.
40 से बढ़कर 70 रुपए पहुंची चीनी
पिछले महीने तक चीनी करीब 40-42 रुपए किलो बिक रही थी, लेकिन अब कई जगह इसके दाम बढ़कर 60-62 रुपए तक पहुंच गए हैं. गुड़ की कीमत भी तेजी से बढ़ी है. पहले 44-45 रुपए किलो मिलने वाला गुड़ अब 60-65 रुपए तक बिक रहा है. कई जगह पर तो चीनी का भाव 70 तक भी पहुंच गया है. ऐसे में आम हर कोई ये जानना चाह रहा है कि आखिर चीनी इतनी महंगी क्यों हो रही है और क्या आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ेंगी?
सरकार बोली- एथनॉल नहीं, ये हैं असली वजहें
सरकार ने साफ कहा है कि चीनी की कीमतों में हाल की तेजी के लिए एथनॉल प्रोडक्शन में गन्ने के इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. सरकार के मुताबिक ये वो वजह है जिससे चीनी के दाम बढ़ रहे है.
- इस बार देश में गन्ने और चीनी का उत्पादन उम्मीद से कम हुआ है.
- त्योहारों का सीजन पास आने से बाजार में चीनी की मांग और खरीदारी अचानक बढ़ गई है.
- खराब मौसम और बेमौसम बारिश की वजह से गन्ने की फसल खराब हो गई है.
- दुनिया भर में चीनी की कमी होने से ग्लोबल मार्केट में दाम चढ़ गए हैं.
- कुछ कारोबारियों की ओर से की जा रही कालाबाजारी और जमाखोरी से भी कीमतें बढ़ी हैं.
देश में कितना है चीनी का उत्पादन और कितनी होती है खपत?
भारत में आमतौर पर हर साल करीब 3.2 से 3.4 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि देश में इसकी खपत करीब 2.8 से 2.9 करोड़ टन रहती है. मौजूदा सत्र में घरेलू चीनी उत्पादन करीब 3.06 करोड़ टन रहने का अनुमान है. गन्ना उत्पादक राज्यों ने शुरुआत में करीब 3.43 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन मौसम और दूसरे कारणों से उत्पादन उम्मीद से कम रहने की आशंका है.
चीने के दाम बढ़ने से रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम
कारोबारियों के लिए चीनी स्टॉकिंग पर लिमिट
चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने चीनी कारोबारियों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन की स्टॉक लिमिट लगा दी है. यानी कारोबारी इस लिमिट से ज्यादा चीनी स्टोर करके नहीं रख सकेंगे.
वहीं 1 सितंबर से बड़े खरीदार भी 15 दिन की जरूरत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख पाएंगे. सरकार का मकसद साफ है कि कोई भी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा न करे जिससे बाजार में चीनी की किल्लत न हो.
10 लाख टन ड्यूटी फ्री सुगर इंपोर्ट को भी मंजूरी
सरकार ने सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 लाख टन रॉ-सुगर के ड्यूटी फ्री आयात को भी मंजूरी दे दी है. साथ ही जमाखोरी न हो इसको मॉनिटर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमों को चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं.
देश में कितना है चीनी का स्टॉक?
खाद्य सचिव के मुताबिक, सितंबर 2026 के आखिर तक देश में 33 से 35 लाख टन चीनी का स्टॉक रहने का अनुमान है. इसके अलावा 15 अक्टूबर के आसपास चीनी मिलों में पेराई शुरू होने की उम्मीद है, जिससे अक्टूबर में करीब 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आ सकती है. यानी सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में सप्लाई को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.
किसानों को भी राहत, 97% बकाये का भुगतान
सरकार ने गन्ना किसानों को लेकर भी राहत की बात कही है. 20 अगस्त तक 2025-26 सत्र के गन्ना किसानों के बकाये का करीब 97 फीसदी भुगतान किया जा चुका था.
फिलहाल सरकार का साफ यही कहना है कि चीनी के दाम बढ़े जरूर हैं, लेकिन देश में इसकी कोई कमी नहीं है. सरकार बाजार पर नजर रख रही है, जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट लगा चुकी है और जरूरत पड़ने पर आयात से भी सप्लाई बढ़ाई जा रही है.ऐसे में आपको डर कर जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर घर में रखने की जरूरत नहीं है.
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