50 रुपये प्रति किलो के नीचे वाली चीनी, जो हाल ही में 70 रुपये किलो के भाव पहुंच गई थी, उसमें अब थोड़ी नरमी आ रही है. खुदरा चीनी की कीमतों में लगभग 5% की गिरावट आई है और एक्स-मिल कीमतों में लगभग 20% की गिरावट के बाद इनमें और नरमी आने की उम्मीद है. गुरुवार को खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने ये जानकारी सार्वजनिक की.
मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, 'सरकार सभी हितधारकों को आश्वस्त करती है कि वह घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी की उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है, साथ ही, यह भी सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक व्यापार और वितरण गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें.'
जन्माष्टमी से पहले गिरावट के बावजूद चीनी महंगी
दरअसल अगस्त महीने के दौरान चीनी की खुदरा कीमतों में तेज़ी से उछाल आया था, जिसके बाद आने वाले त्योहारी सीजन से पहले महंगाई पर इसके असर को लेकर चिंता बढ़ रही थी. हालांकि कीमतों में आई गिरावट के बाद भी देश में चीनी की खुदरा कीमतें सामान्य से काफी ऊपर हैं.
खाद्य मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 2 सितम्बर को देश के बाज़ारों में चीनी की औसत कीमत 62.57 रुपये प्रति किलो बनी हुई हैं . देश के अधिकतर राज्यों में चीनी की कीमत 60 से 65 रुपये प्रति किलो के आसपास बनी हुई हैं. बता दें कि करीब डेढ़ महीने पहले 20 जुलाई, 2026 को चीनी की कीमत ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी.

आखिर क्यों इतनी महंगी हो गई चीनी?
सरकार के आंकलन के मुताबिक, चीनी महंगा होने के पीछे कई कारण हैं जिनमें प्रमुख है - अपेक्षा से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी मौसम से पहले बढ़ी मांग, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और बढ़ती कीमतें, और उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी.
इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान कई स्तर पर हस्तक्षेप किया, जिसके अब अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं.
जांच के दौरान सरकार ने पाया कि कुछ चीनी के व्यापारियों, डीलरों और बाजार मध्यस्थों द्वारा की गई जमाखोरी, सट्टा लेनदेन और चीनी की वास्तविक भौतिक आवाजाही के बिना मिलों से केवल कागजी व्यापार ने बाजार में कृत्रिम कमी की धारणा बनाने में योगदान दिया है. इन गतिविधियों की वजह से चीनी की कीमतें अस्थिरता हुईं और एक्स-मिल तथा खुदरा दोनों स्तरों पर चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई.
चीनी की कीमतों पर लगाम के लिए सरकार ने कौन-से कदम उठाए?
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और जारी जमाखोरी पर नकेल कसने के लिए भारत सरकार ने कई मोर्चे पर पहल शुरू की है.
- देश भर के चीनी डीलरों पर 1 अगस्त, 2026 से 30 नवंबर, 2026 तक 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है.
- 1 सितंबर, 2026 से थोक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी.
- केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की संयुक्त टीमें जमाखोरी और कृत्रिम कमी की जांच के लिए मिलों में चीनी स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कर रही हैं.
- सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्चे चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को अनुमति दी है.
- राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर, 2026 से पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है.
इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक होने की उम्मीद है. सरकार का आंकलन है कि देश में घरेलू खपत की आवश्यकताओं के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है, और इन क़दमों से त्योहारी सीजन के दौरान बाज़ार में चीनी की उपलब्धता में सुधार होगा.
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