त्योहारी सीजन में चीनी की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने बल्क चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है.अब हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े खरीदारों को 15 दिनों के बजाय 30 दिनों का स्टॉक रखने की मंजूरी दे दी है. हालांकि, सरकार ने इसके साथ एक शर्त भी रखी है कि 15 दिनों से ज्यादा का जो भी अतिरिक्त स्टॉक रखा जाएगा, वह केवल टीआरक्यू (TRQ) या एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत आयात की गई चीनी से ही पूरा होना चाहिए. खुले बाजार से खरीदी गई चीनी पर 15 दिन का नियम ही लागू रहेगा.
इसके साथ ही ब्लैक मार्केटिंग रोकने और सप्लाई पर नजर रखने के लिए कंपनियों को हर शुक्रवार अपने ऑनलाइन पोर्टल पर चीनी के स्टॉक की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है.
चीनी सस्ती करने के निर्देश
स्टॉक लिमिट में ढील देने के साथ ही सरकार ने आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए चीनी उद्योग और व्यापारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. खाद्य सचिव ने चीनी निर्माताओं और व्यापारिक संगठनों के साथ बैठक में कहा कि मिलों से चीनी के थोक भाव में लगभग 25 फीसदी तक की बड़ी गिरावट आ चुकी है, लेकिन खुदरा बाजार में आम ग्राहकों को इसका सिर्फ 10 फीसदी ही फायदा मिला है और कीमतें अभी भी करीब 58.50 रुपये प्रति किलो पर बनी हुई हैं. सरकार ने साफ कहा है कि थोक दरों में आई इस कमी का पूरा फायदा तुरंत आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए ताकि त्योहारों के दौरान चीनी सस्ती मिल सके.
किसानों को नया FRP
नए चीनी सीजन की शुरुआत के साथ 1 अक्टूबर 2026 से गन्ना किसानों को बढ़ा हुआ Fair and Remunerative Price (FRP) मिलेगा. सरकार ने गन्ने का FRP बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल किया है. सरकार का कहना है कि इसका मकसद गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य दिलाना है, साथ ही चीनी सेक्टर में संतुलन बनाए रखना है.
1 अक्टूबर से लागू होगा नया FRP
नए चीनी सीजन की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से हो रही है. इसी के साथ गन्ना किसानों के लिए बढ़ा हुआ FRP लागू होगा.FRP वो न्यूनतम मूल्य है, जो चीनी मिलों को तय शर्तों के तहत गन्ना किसानों को देना होता है. सरकार हर साल FRP में बदलाव करती है, ताकि गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित रिटर्न मिल सके.इस बार FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है.
क्या चीनी की कीमत भी बढ़ेगी?
गन्ने का FRP बढ़ने का मतलब ये नहीं है कि चीनी की खुदरा कीमत उसी अनुपात में बढ़ जाएगी. चीनी की कीमत कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है. इसमें चीनी का उत्पादन, घरेलू उपलब्धता, स्टॉक, मांग और बाजार की स्थिति अहम है.
चीनी की उपलब्धता पर सरकार की नजर
सरकार ने कहा है कि वो घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों की लगातार निगरानी करेगी. अगर जरूरत पड़ती है तो उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे.
सरकार की नजर सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत पर नहीं होगी. खाद्य प्रसंस्करण यानी Food Processing Industry और दूसरी इंडस्ट्रीज के लिए चीनी की जरूरत को भी ध्यान में रखा जाएगा.
किसानों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन
चीनी सेक्टर में सरकार के सामने दो प्रमुख जरूरतें रहती हैं. पहली, गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले और दूसरी, उपभोक्ताओं के लिए चीनी बहुत महंगी न हो.सरकार के मुताबिक, हर साल FRP बढ़ाने का उद्देश्य किसानों को बेहतर रिटर्न देना है, लेकिन साथ ही चीनी सेक्टर में संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है.
अब 1 अक्टूबर से नए चीनी सीजन की शुरुआत के बाद सरकार चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखेगी. अगर घरेलू बाजार में कीमतों या सप्लाई को लेकर कोई दबाव बनता है, तो सरकार जरूरत के मुताबिक कदम उठा सकती है.
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