भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार यानी 22 जुलाई का दिन भारी बिकवाली वाला साबित हुआ. शुरुआती कारोबार से ही बाजार में दबाव देखने को मिला और देखते ही देखते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बेंचमार्क इंडेक्स 1% तक टूट गए. इस दौरान लार्ज कैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी डेढ़ फीसदी तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स इंट्राडे में 800 से अधिक अंकों का गोता लगाकर 76,641.19 के निचले स्तर तक पहुंच गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 अपने सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल 24,000 को तोड़ते हुए 200 से अधिक अंक गिरकर 23,961.40 के intraday low पर आ गया. हालांकि, यहां से थोड़ा सुधार देखने को मिला, दोपहर 1:25 बचे निफ्टी 213 अंकों की गिरावट के साथ 23973 पर कारोबार कर रहा था. 770 अंक गिरकर वहीं, सेंसेक्स 76700 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.
शेयर बाजार में गिरावट की है 5 बड़ी वजहें
बाजार के जानकारों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ, अमेरिका-ईरान युद्ध से पैदा हुए हालात ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है. आइए समझते हैं इस गिरावट के पीछे क्या है वे 5 बड़ी वजहें.
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ (Trump Tariffs)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से जेनेरिक दवाओं पर नए टैरिफ लगाने के ऐलान ने फार्मा सेक्टर और वैश्विक बाजार की चिंता बढ़ा दी है. ट्रम्प प्रशासन के फैसले के मुताबिक, अमेरिका में आयात होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर भारी शुल्क लगाया जाएगा. इसके अलावा, अन्य देशों पर भी नए टैरिफ होने की आशंका से निवेशकों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष (America-Iran War)
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब और विकराल रूप लेता जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं, वहीं, जवाब में अमेरिकी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की है. इस बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ने का डर है, जिससे महंगाई बढ़ने से दुनियाभर में मंदी का खतरा मंडरा रहा है.
क्रूड ऑयल $92 प्रति बैरल के पार (Crude Oil Price Hike)
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगातार चौथे सत्र में बढ़त बनाते हुए 92.67 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जो बीते कई महीनों का उच्चतम स्तर है. दरअसल, भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में क्रूड महंगा होने से देश में महंगाई और चालू व्यापार घाटा बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे निवेशकों का भरोसा अर्थव्यवस्था से उठ जाता है.
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी (Weak Rupee)
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है. बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे गिरकर 96.36 प्रति डॉलर पर आ गया. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे में निवेशक अब सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव देखा जा रहा है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में उछाल (Americi Bond Yeild Rise)
अमेरिका में 10वर्षीय बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.635% हो गई है और डॉलर इंडेक्स 101 के पार बना हुआ है. आपको बता दें कि जब भी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में लगाने लगते हैं, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार की बिकवाली के रूप में दिखता है. यहीं वजह है कि बुधवार को भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट का शिकार रही.
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