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Saudi Aramco: बार-बार फेल, फिर ऐसा निकला तेल कि एक कुएं ने चमका दिया भाग्‍य, अब दुनिया भर में साम्राज्‍य!

सस्ते तेल की पहुंच के लिहाज से भी ये महत्‍वपूर्ण  है. सऊदी अरब से भारत की भौगोलिक निकटता के कारण परिवहन लागत कम रहती है, जो भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है.

Saudi Aramco: बार-बार फेल, फिर ऐसा निकला तेल कि एक कुएं ने चमका दिया भाग्‍य, अब दुनिया भर में साम्राज्‍य!
Saudi Aramco Story: कहानी सऊदी की उस कंपनी की, जिसे ईरान ने बनाया निशाना

Saudi Aramco Story: दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शुमार, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) को ईरान ने निशाना बनाया. इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने सऊदी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी (Ras Tanura Refinery) पर हमला किया. धमाके के बाद आग लगने के चलते रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा. अधिकारियों के मुताबिक, इमले में जानहानि नहीं हुई, आग जल्‍द ही बुझा ली गई और हमला करने वाले कई ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया गया.  

सऊदी अरामको की रिफाइनरी पर हुए हमले ने पूरी दुनिया और विशेष रूप से भारत जैसे ऊर्जा-निर्भर देशों का ध्‍यान अपनी ओर खींचा है. वजह साफ है सऊदी अरामको केवल एक कंपनी नहीं, बल्कि एनर्जी सप्‍लाई चेन के नजरिये से देखा जाए तो ये ग्‍लोबल इकोनॉमी की धड़कन मानी जाती है. ऐसा क्‍यों है, इसे हम इस 'एक्‍सप्‍लेनर स्‍टोरी' के जरिए समझते हैं. 

सऊदी अरामको: दुनिया का सबसे बड़ा पावरहाउस

सऊदी अरामको (Saudi Aramco) दुनिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड एनर्जी और केमिकल कंपनियों में से एक है. यह कंपनी सऊदी अरब के विशाल हाइड्रोकार्बन संसाधनों की देखभाल करती है और वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता के रूप में जानी जाती है.

मार्केट कैप के लिहाज से देखा जाए तो सऊदी अरामको, दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी कंपनी है. companiesmarketcap के मुताबिक, कंपनी का मार्केट कैप 158.5 ट्रिलयन से ज्‍यादा है.

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वहीं कमाई के लिहाज से ये दुनिया की टॉप कंपनी है. करीब 17.8 ट्रिलियन की अर्निंग के साथ ये टॉप पर बनी हुई है. गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और एप्‍पल जैसी कंपनियां कमाई के मामले में इसके नीचे आती हैं. अरामको की सालाना कमाई का आंकड़ा 2024 की दूसरी छमाही और 2025 की पहली छमाही का है. 

अरामको का ऐतिहासिक सफर: एक कुएं ने बदल दी किस्‍मत 

अरामको की यात्रा 1933 में शुरू हुई, जब सऊदी अरब और कैलिफोर्निया की स्टैंडर्ड ऑयल कंपनी (SOCAL) के बीच एक ऐतिहासिक रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. शुरुआती वर्षों में कई कोशिशें असफल रहीं, लेकिन 1938 में 'दम्माम नंबर 7' कुएं, जिसे 'प्रोसपेरिटी वेल' भी कहा जाता है, से व्यावसायिक तेल उत्पादन की शुरुआत ने कंपनी की किस्मत बदल दी. 

इसके बाद 1944 में इसका नाम बदलकर अरामको (अरबियन अमेरिकन ऑयल कंपनी) कर दिया गया, जिसने सऊदी अरब को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने की नींव रखी.

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वक्त के साथ सऊदी सरकार की भूमिका बढ़ती गई और अंततः 1980 तक सरकार ने अरामको में 100% स्वामित्व हासिल कर लिया, जिससे यह पूरी तरह से एक राष्ट्रीय संपत्ति बन गई. कंपनी के इतिहास में एक नया अध्याय 2019 में तब जुड़ा जब अरामको एक सार्वजनिक कंपनी (Public Limited) बनी और इसके शेयर सऊदी स्टॉक एक्सचेंज (Tadawul) पर लिस्ट हुए. यह दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ (IPO) साबित हुआ, जिसने अरामको को न केवल तेल उत्पादन में बल्कि बाजार पूंजीकरण के मामले में भी एक वैश्विक साम्राज्य के रूप में प्रमाणित कर दिया.

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50 से ज्‍यादा देशों में 400 से ज्‍यादा साझेदार

तेल उत्‍पादन के क्षेत्र में अरामको, बड़ा महत्‍व रखती है. इस कंपनी की ताकत को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है. यह 50 से अधिक देशों में काम करती है और इसके पास 400 से अधिक सहायक और सहयोगी कंपनियां हैं.

उत्पादन क्षमता की बात करें तो कंपनी  हर दिन लगभग 12.4 मिलियन बैरल तेल (boe) का उत्पादन करती है. इसके पास 250 बिलियन बैरल से अधिक का हाइड्रोकार्बन रिजर्व है. साल 2024 में कंपनी की शुद्ध आय (Net Income) 106 बिलियन डॉलर रही थी. 

भारत के लिए क्‍यों महत्‍वपूर्ण है सऊदी अरामको?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है. इसमें सऊदी अरब और अरामको की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.  

अरामको भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा और विश्वसनीय स्रोत है. सप्लाई में किसी भी व्यवधान का सीधा असर भारत की तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

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सस्ते तेल की पहुंच के लिहाज से भी ये महत्‍वपूर्ण  है. सऊदी अरब से भारत की भौगोलिक निकटता के कारण परिवहन लागत कम रहती है, जो भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है.

सऊदी अरामको भारत को सालाना औसतन 25-30 मिलियन टन कच्चा तेल सप्लाई करता है. मासिक औसत करीब तीन से साढ़े तीन मिलियन टन बैठता है. फरवरी 2026 में हालांकि ये आंकड़ा काफी ज्‍यादा रहा, करीब 5 मिलियन टन, जो कि 6 साल का हाई लेवल रहा.  

भारत के कुल कच्चे तेल आयात (206 मिलियन टन/वर्ष) का 12-15% यहीं से आता है. ये सप्लाई रिलायंस (जामनगर), IOCL, BPCL जैसी रिफाइनरियों को जाती है.  

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कामकाज प्रभावित होने का असर

अरामको की रिफाइनरीज में कामकाज प्रभावित होने का असर वैश्विक होता है. उत्पादन बंद हुआ तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई कम हो जाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'क्रूड ऑयल' की कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं.

भारत जैसे देशों में तेल महंगा होने से माल ढुलाई (logistics) महंगी हो जाती है, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ जाते हैं. केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि अरामको रसायनों (Chemicals) का भी बड़ा उत्पादक है. इसकी सप्लाई रुकने से प्लास्टिक, खाद और अन्य उद्योगों पर भी बुरा असर पड़ता है.

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अरामको का कामकाज जितना अधिक सुरक्षित और सुचारू रहेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसी बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए उतनी ही स्थिरता बनी रहेगी. अरामको भविष्‍य के लिए भी तैयारी कर रहा है. कंपनी का लक्ष्य 2050 तक अपनी संपत्तियों से नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना है. वे अब हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी निवेश कर रहे हैं ताकि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित किया जा सके. 

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