इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान के शीर्ष नेता खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं. उसने इजरायल, बहरीन, कुवैत और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस को भी निशाना बनाया. यही नहीं, उसने समुद्री ट्रांसपोर्ट में बेहद अहम माने जाने वाले एक संकरे रास्ते को बंद कर दिया है. इसे 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' या होर्मुज जलडमरूमध्य कहा जाता है. दुनिया की नजर इस संकरे रास्ते के खुलने पर टिकी हुई है. कारण कि यहां से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही लगभग थम गई है.
कहां और कैसा है होर्मुज जलडमरूमध्य?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है. यह उत्तर में फारस की खाड़ी को दक्षिण में ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है. अपने सबसे संकरे हिस्से में यह केवल लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि तेल टैंकरों के लिए निर्धारित शिपिंग लेन महज 3-3 किलोमीटर चौड़ी हैं. भले ही यह ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में आता है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक जहाजरानी को गुजरने की अनुमति है. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जहां दुबई स्थित है, भी इसी मार्ग के पास पड़ता है.

अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के चलते ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है. इसके कारण तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. रिपोर्टों के अनुसार, कुछ जहाज इस मार्ग से बाहर निकलते दिखे, लेकिन नए जहाज अंदर प्रवेश करते नजर नहीं आए.
ओमान के उत्तरी तट के पास एक छोटे तेल टैंकर पर हमला भी हुआ, जिसे पहले अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित बताया गया था. हालांकि हमला किसने किया, यह स्पष्ट नहीं है. इन घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है.
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कभी रेशम मार्ग रहा, अब एनर्जी कॉरिडोर, दुनियाभर की तेल सप्लाई के लिए क्यों लाइफलाइन है होर्मुज जलडमरूमध्य?
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कभी रेशम मार्ग रहा, अब महत्वपूर्ण एनर्जी कॉरिडोर
प्राचीन समय में भी यह व्यापार का प्रमुख मार्ग था. चीन से रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन, हाथीदांत और कपड़े इसी रास्ते से पश्चिमी देशों तक पहुंचते थे. आधुनिक दौर में यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी गलियारों में से एक बन चुका है. सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर, बहरीन और यूएई से निकलने वाले कच्चे तेल और एलएनजी के विशाल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं.
ऊर्जा की इस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा एशियाई देशों, खासकर चीन, तक जाता है. हालांकि सऊदी अरब और यूएई के पास कुछ पाइपलाइन विकल्प मौजूद हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक अधिकांश तेल आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य का कोई ठोस विकल्प नहीं है.
दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है. औसतन हर दिन 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल और ईंधन यहां से भेजा जाता है. कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल है, अपनी लगभग पूरी गैस आपूर्ति इसी मार्ग से करता है.
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— हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi (@MediaHarshVT) March 2, 2026
तेल और गैस की कीमतें बढ़ने की आशंका
अगर यहां कोई भी बाधा आती है, तो वैश्विक तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. इससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं और दुनिया भर में महंगाई पर असर पड़ सकता है, खासकर एशियाई देशों पर.
होर्मुज जलडमरूमध्य कई बार भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र रहा है. 1973 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था. 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में दोनों देशों ने एक-दूसरे के तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिसे 'टैंकर वॉर' कहा गया.
2012 में ईरान ने पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में इस मार्ग को बंद करने की धमकी दी थी. 2019 में यूएई के तट के पास कई टैंकरों पर हमले हुए. हाल के वर्षों में भी ईरान ने कुछ जहाजों को जब्त किया था.
इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट के पास है, जिसका मुख्यालय बहरीन में है. हालांकि, सीधे युद्ध जैसे हालात में मजबूत सैन्य मौजूदगी भी पूरी तरह जोखिम खत्म नहीं कर सकती.
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य अस्थायी रूप से भी बंद हो जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ेगा. तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, शिपिंग बीमा महंगा हो सकता है और ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों, खासतौर पर एशिया, पर भारी दबाव पड़ेगा.
इसी वजह से जैसे-जैसे ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव बढ़ रहा है, पूरी दुनिया की नजर इस अहम समुद्री मार्ग पर टिकी हुई है. यह सिर्फ एक जलडमरूमध्य नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन है.
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