भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चेतावनी दी है कि कमजोर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और अमेरिका-ईरान संघर्ष से पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता भारत की आर्थिक ग्रोथ के लिए चुनौती बन सकती है. RBI के जून बुलेटिन में कहा गया है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है, लेकिन कई बाहरी और घरेलू जोखिमों पर नजर रखना जरूरी है.
कमजोर मॉनसून से बढ़ सकती है महंगाई
RBI ने कहा कि अगर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून उम्मीद से कमजोर रहता है तो इसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है. इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. साथ ही ग्रामीण इलाकों में मांग और खपत पर भी असर पड़ने की आशंका है. RBI पहले भी संकेत दे चुका है कि मॉनसून में कमी कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और निजी खपत को प्रभावित कर सकती है.
RBI बुलेटिन में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती हैं. अगर संघर्ष लंबा खिंचता है या और क्षेत्रों में फैलता है, तो ऊर्जा कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 में 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है. हालांकि 2026-27 के लिए बढ़ती ऊर्जा कीमतें, सप्लाई बाधाएं और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं चुनौती बन सकती हैं.
किन जोखिमों पर है RBI की नजर
- दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का प्रदर्शन
- खाद्य महंगाई में संभावित बढ़ोतरी
- कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें
- पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव
- सप्लाई चेन में बाधाएं
- वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव
RBI ने कहा कि भारत की मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियां और स्थिर आर्थिक बुनियाद देश को ऐसे झटकों से निपटने में मदद कर सकती हैं. फिर भी कमजोर मॉनसून और वैश्विक तनाव आने वाले महीनों में ग्रोथ और महंगाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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