- अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान भारत का निर्यात 162.69 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14.66% अधिक है
- वस्तुओं के निर्यात में 16.09 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि मई 2026 में निर्यात 45.20 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया.
- अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान भारत का कुल आयात 182.83 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें 14.38% की वृद्धि दर्ज की गई.
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) ने अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान भारत के शानदार विदेशी व्यापार प्रदर्शन का स्वागत किया है. यह प्रदर्शन बदलती अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थितियों, खासकर अमेरिका -इजरायल-ईरान शांति समझौते के बीच भारतीय निर्यातकों की मजबूती और बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है.
नवीनतम व्यापार आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान भारत का कुल निर्यात (वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर) 162.69 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 14.66 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि है.
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निर्यात के साथ आयात में भी इजाफा
अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान वस्तुओं का निर्यात 88.91 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें 16.09 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अकेले मई 2026 में वस्तुओं का निर्यात 45.20 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो 18.01 प्रतिशत की शानदार वृद्धि को दर्शाता है. अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान भारत का कुल आयात (वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर) 182.83 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें 14.38 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई. अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान वस्तुओं का आयात 145.35 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 15.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मई 2026 में वस्तुओं का आयात 73.42 बिलियन डॉलर रहा, जो 20.62 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
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कुल निर्यात में 15 फीसदी की बढ़ोतरी
व्यापार प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए, फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में निर्यात में हुई मजबूत वृद्धि भारत के बाहरी क्षेत्र के लिए बहुत उत्साहजनक संकेत है. वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वस्तुओं के निर्यात में 16 प्रतिशत से अधिक और कुल निर्यात में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करना भारतीय निर्यातकों की मजबूती, अनुकूलन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है. यह परफॉर्मेंस पॉलिसी में सुधार, मार्केट तक बेहतर पहुंच की कोशिशों, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बढ़ोतरी और अलग-अलग सेक्टर के निर्यातकों की लगातार कोशिशों के अच्छे असर को दिखाती है.
भारतीय एक्सपोर्टर्स को और हो सकता है फायदा
रल्हन ने कहा कि वेस्ट एशिया में हाल ही में हुई डिप्लोमैटिक कामयाबी - जिसमें अमेरिका, ईरान और इलाके के दूसरे अहम देश शामिल हैं - ग्लोबल ट्रेड, शिपिंग और सप्लाई चेन के लिए एक अच्छी बात है. होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने से वस्तुओं की आवाजाही बेहतर होने, फ्रेट और इंश्योरेंस की लागत स्थिर होने और इंटरनेशनल ट्रेड में निश्चितता बढ़ने की उम्मीद है. इससे हमारे भारतीय एक्सपोर्टर्स को भी फायदा होगा और आने वाले महीनों में हमारे निर्यात को और बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि जीसीसी हमारे मुख्य मार्केट में से एक है.
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