ITR Filing after Retirement: बहुत से लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन पर टैक्स नहीं देना होता है, लेकिन इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक पेंशन को भी आपकी सैलरी की तरह ही माना जाता है और इस पर टैक्स देना पड़ सकता है.. हालांकि सीनियर सिटीजंस और पेंशन पाने वाले लोग सही टैक्स रिजीम को चुनकर और सरकार की तरफ से मिलने वाली अलग-अलग छूट का फायदा उठाकर अपना टैक्स काफी हद तक बचा सकते हैं.
साल 2026 में अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरने से पहले सीनियर सिटीजंस को ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम के नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए ताकि वे अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स में जाने से बचा सकें.
Old या New Tax Regime: किसमें होगा ज्यादा फायदा?
सीनियर सिटीजंस को टैक्स बचाने के लिए ITR भरते समय सबसे पहले यह तय करना जरूरी है कि वे कौन सा टैक्स सिस्टम चुनना चाहते हैं.अगर आप न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) चुनते हैं तो आपको टैक्स की दरें तो कम मिलेंगी, लेकिन निवेश पर मिलने वाली ज्यादातर बड़ी छूट जैसे 80C, 80D और 80TTB का फायदा नहीं मिलेगा. न्यू टैक्स रिजीम में आपको केवल स्टैंडर्ड डिडक्शन और कुछ खास मामलों में ection 87A के तहत मिलने वाली रिबेट का ही लाभ मिलता है.
दूसरी तरफ, ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime)उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जिन्होंने अपनी बचत का पैसा अलग-अलग सरकारी स्कीमों, मेडिकल इंश्योरेंस या बैंक एफडी में लगा रखा है क्योंकि इस पुराने सिस्टम में आपको निवेश और खर्चों पर कई तरह की टैक्स छूट क्लेम करने की पूरी आजादी मिलती है.
अगर आपके पास 80C, 80D, 80DDB और 80TTB जैसी छूट लेने का मौका है, तो Old Tax Regime आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है. वहीं New Tax Regime में इनमें से ज्यादातर छूट नहीं मिलती. इसमें केवल Standard Deduction और कुछ मामलों में Section 87A के तहत मिलने वाली छूट का फायदा मिलता है. इसलिए रिटर्न भरने से पहले दोनों रिजीम में टैक्स का कैलकुलेशन जरूर कर लें.
सीनियर सिटीजंस के लिए क्या हैं नए टैक्स स्लैब?
ओल्ड टैक्स रिजीम में सीनियर सिटीजंस को उम्र के हिसाब से टैक्स की शुरुआती सीमा में ज्यादा छूट मिलती है. 60 से 80 साल के सीनियर सिटीजंस के लिए पुराने सिस्टम में 3 लाख रुपये तक की सालाना कमाई पूरी तरह टैक्स फ्री है, जबकि 3 से 5 लाख तक की कमाई पर 5 फीसदी, 5 से 10 लाख तक पर 20 फीसदी और 10 लाख से ऊपर की कमाई पर 30 फीसदी टैक्स लगता है.
80 साल से ऊपर के सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए पुराने सिस्टम में 5 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. इसके बाद 5 लाख से 10 लाख रुपये तक 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से ज्यादा आय पर 30 फीसदी टैक्स देना होता है.
वहीं न्यू टैक्स रिजीम में उम्र के हिसाब से कोई अलग छूट नहीं है. इसमें सभी सीनियर सिटीजंस के लिए 4 लाख रुपये तक की कमाई टैक्स फ्री रखी गई है और इसके बाद अलग-अलग आय के हिसाब से 5 फीसदी से लेकर 30 फीसदी तक टैक्स लगता है.
4 से 8 लाख पर 5 फीसदी, 8 से 12 लाख पर 10 फीसदी, 12 से 16 लाख पर 15 फीसदी, 16 से 20 लाख पर 20 फीसदी, 20 से 24 लाख पर 25 फीसदी और 24 लाख से ऊपर की सालाना कमाई पर 30 फीसदी की दर से टैक्स वसूला जाता है.
80C और 80D की छूट कहां मिलेगी?
पुराना टैक्स सिस्टम चुनने वाले सीनियर सिटीजंस को अपनी टैक्स लायबिलिटी कम करने के लिए कई शानदार मौके मिलते हैं.वे धारा 80C के तहत किए गए अलग-अलग निवेश पर डेढ़ लाख रुपये तक की छूट का दावा कर सकते हैं. इसके साथ ही अगर आपने PPF, ELSS, टैक्स सेविंग FD, LIC या दूसरी 80C वाली योजनाओं में निवेश किया है या हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भरा है, तो Old Tax Regime में इन पर टैक्स छूट मिल सकती है.
इसके अलावा 80DDB के तहत कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च और 80TTB के तहत बैंक या पोस्ट ऑफिस की एफडी और सेविंग्स अकाउंट से मिलने ब्याज पर भी छूट का फायदा लिया जा सकता है जो उनकी पेंशन और ब्याज से होने वाली कमाई को सुरक्षित रखने में बहुत मदद करती . New Tax Regime में इन छूटों का फायदा नहीं मिलता.
सीनियर सिटीजंस को मिलते हैं ये भी फायदे
अगर किसी सीनियर सिटिजन की बिजनेस या प्रोफेशन से कोई इनकम नहीं है, तो उसे एडवांस टैक्स भरने की जरूरत नहीं होती. 80 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोग चाहें तो ITR-1 और ITR-4 पेपर फॉर्म में भी भर सकते हैं. इसके अलावा बैंक भी सीनियर सिटीजंस के ब्याज पर TDS काटने के लिए ज्यादा लिमिट देते हैं, जिससे उन्हें राहत मिलती है.
ITR भरने से पहले ये डॉक्यूमेंट्स रखें तैयार
रिटर्न भरने से पहले पेंशनर्स को कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स पहले से ही संभाल कर रख लेने चाहिए. आपको अपनी पेंशन का स्टेटमेंट या फॉर्म 16, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी एआईएस, अपने सभी बैंक अकाउंट्स के स्टेटमेंट, FD और RD के ब्याज के सर्टिफिकेट, डिविडेंड स्टेटमेंट और अपने सभी निवेश के सबूत अपने पास तैयार रखने चाहिए.इससे ITR सही तरीके से भरने में आसानी होगी और बाद में इनकम टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस आने की संभावना भी कम रहेगी.
कौन सी Tax Regime चुनें?
हर रिटायर्ड व्यक्ति की इनकम और निवेश का तरीका अलग होता है. इसलिए बिना हिसाब लगाए कोई भी टैक्स रिजीम चुनना सही नहीं होगा. ITR भरने से पहले Old और New दोनों Tax Regime में अपना टैक्स निकालें. जिस रिजीम में कम टैक्स बनता हो, उसी को चुनना ज्यादा समझदारी होगी.जानकारों का कहना है कि रिटर्न फाइल करने से पहले दोनों टैक्स सिस्टम के तहत अपने टैक्स का हिसाब लगा लें या किसी प्रोफेशनल की सलाह जरूर ले लें.
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