एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई थी, जो कि अब निकल चुकी है. अगर किसी वजह से आप 31 जुलाई तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल (ITR Filing) नहीं कर पाए हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. बहुत से टैक्सपेयर्स समय पर रिटर्न फाइल नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें टैक्स से जुड़े रूल्स की जानकारी नहीं होती या फिर आखिरी समय में डॉक्यूमेंट्स तैयार नहीं हो पाते. अच्छी बात यह है कि डेडलाइन छूट जाने के बाद भी आपके पास ITR फाइल करने का मौका रहता है.
हालांकि, इसके साथ कुछ नियम, लेट फीस और दूसरी शर्तें भी लागू होती हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि 31 जुलाई तक नहीं भर पाए ITR तो अब आपके पास क्या-क्या ऑप्शन हैं....
31 जुलाई के बाद भी भर सकते हैं Belated ITR
31 जुलाई की तय समय-सीमा निकल जाने के बाद पात्र टैक्सपेयर्स Income Tax Act, 2025 की धारा 263(4) के तहत बिलेटेड आईटीआर (Belated ITR)दाखिल कर सकते हैं. यानी डेडलाइन मिस होने का मतलब यह नहीं है कि अब आप रिटर्न नहीं भर सकते. हालांकि, इसके लिए तय नियमों का पालन करना होगा.
Belated ITR भरने की आखिरी तारीख क्या है?
कानून के मुताबिक, बिलेटेड आईटीआर संबंधित टैक्स ईयर खत्म होने के 9 महीने के भीतर या फिर असेसमेंट पूरा होने से पहले (जो भी पहले हो) दाखिल किया जा सकता है. इसलिए अगर 31 जुलाई की डेडलाइन निकल गई है, तब भी आपके पास निर्धारित समय के भीतर रिटर्न भरने का मौका है.
लेट फीस के साछ देना पड़ सकता है ब्याज
डेडलाइन के बाद ITR दाखिल करने पर आपको लागू नियमों के अनुसार लेट फाइलिंग फीस (Late Filing Fee) और जरूरत पड़ने पर ब्याज (Interest) भी देना पड़ सकता है. इसलिए जितनी जल्दी हो सके बिलेटेड रिटर्न फाइल करना बेहतर माना जाता है.
अगर Belated ITR में गलती हो जाए तो क्या होगा?
अगर बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के बाद आपको उसमें कोई गलती दिखाई देती है, तो उसे भी सुधारा जा सकता है. Income Tax Act, 2025 की धारा 263(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return)दाखिल करने की सुविधा मिलती है.रिवाइज्ड रिटर्न संबंधित टैक्स ईयर खत्म होने के 12 महीने के भीतर या असेसमेंट पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो, फाइल किया जा सकता है.
लेट ITR फाइल करने के क्या नुकसान हो सकते हैं?
समय पर ITR दाखिल नहीं करने से सिर्फ लेट फीस ही नहीं लगती, बल्कि कुछ दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं. जैसे आपका इनकम टैक्स रिफंड (Income Tax Refund) मिलने में देरी हो सकती है. इसके अलावा कुछ मामलों में टैक्स से जुड़े ऐसे फायदे भी छूट सकते हैं, जिनमें योग्य घाटे (Eligible Losses) को अगले सालों में कैरी फॉवार्ड करने का मौका शामिल है.
अगर तय समय भी निकल जाए तो क्या करें?
अगर बिलेटेड रिटर्न और रिवाइज्ड रिटर्न की डेडलाइन भी निकल जाती है, तब भी कुछ पात्र टैक्सपेयर्स के पास अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करने का ऑप्शन रहता है. Income Tax Act, 2025 की धारा 263(6) के तहत तय शर्तों को पूरा करने वाले टैक्सपेयर्स संबंधित वित्त वर्ष के बाद आने वाले वित्त वर्ष के अंत से 48 महीने के भीतर ITR-U दाखिल कर सकते हैं.
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