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EPF Rule 2026: क्या सिर्फ 1800 रुपये PF कटने से अब बढ़ जाएगी आपकी इन-हैंड सैलरी? जानिए किसे मिलेगा फायदा

New EPF Rules 2026 : नए ईपीएफ नियमों के तहत अनिवार्य पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन अधिकतम ₹1,800 प्रति माह तय किया गया है. इसका मतलब है कि अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹1 लाख भी है, तब भी अनिवार्य रूप से केवल ₹1,800 ही कटेंगे. क्या हर महीने हाथ में आएगी ज्यादा सैलरी?

EPF Rule 2026: क्या सिर्फ 1800 रुपये PF कटने से अब बढ़ जाएगी आपकी इन-हैंड सैलरी? जानिए किसे मिलेगा फायदा
New EPF Scheme 2026: सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत नई ईपीएफ स्कीम 2026 को नोटिफाई कर दिया है. क्या पीएफ का नया नियम जेब में ज्यादा कैश लाएगा?

EPFO New Rule: केंद्र सरकार द्वारा नोटिफाई की गई नई ईपीएफ स्कीम (EPF Scheme 2026) ने देश के करीब 8 करोड़ सैलरीड कर्मचारियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है. इसके बाद ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि अब कर्मचारियों का पीएफ सिर्फ 1800 रुपये ही कटेगा. इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब हर महीने हाथ में ज्यादा सैलरी मिलेगी? क्या सभी कर्मचारियों की इन हैंड सैलरी (Take-Home Salary) बढ़ जाएगी? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नए नियम में क्या बदला है, किसे फायदा होगा और किन कर्मचारियों की सैलरी पर इसका असर नहीं पड़ेगा.

अब अनिवार्य PFकॉन्ट्रीब्यूशन सिर्फ 1800 रुपये तक

नए नियम के मुताबिक कर्मचारी का कॉन्ट्रीब्यूशन पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन अब भी 15000 रुपये की तय बेसिक सैलरी पर ही माना जाएगा. इसका मतलब है कि 15000 रुपये का 12 प्रतिशत यानी हर महीने अधिकतम 1800 रुपये ही जरूरी पीएफ के तौर पर कटेगा.

अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50000 रुपये, 80000 रुपये या 1 लाख रुपये है, तब भी जरूरी पीएफ 1800 रुपये ही माना जाएगा. इसके ऊपर कर्मचारी चाहे तो अपनी मर्जी से ज्यादा पैसा पीएफ में जमा कर सकता है. इसे वोलंटरी पीएफ यानी VPF कहा जाता है.

क्या अब इन हैंड सैलरी बढ़ जाएगी?

इस सवाल का जवाब है कि ऐसा हर कर्मचारी के साथ अपने आप नहीं होगा. अगर आपकी कंपनी पीएफ सिर्फ 15000 रुपये की तय लिमिट के हिसाब से काटती है, तो आपके लिए कोई बदलाव नहीं होगा.लेकिन अगर आपकी कंपनी अभी तक आपकी पूरी बेसिक सैलरी पर पीएफ काट रही है और अब कंपनी अपने नियम बदलकर जरूरी पीएफ को 1800 रुपये तक सीमित कर देती है, तो हर महीने आपके हाथ में ज्यादा सैलरी आ सकती है.

यानी इन हैंड सैलरी बढ़ेगी या नहीं, यह पूरी तरह आपकी कंपनी की पीएफ पॉलिसी पर निर्भर करेगा.

किसे मिलेगा फायदा और किसे नहीं?

जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15000 रुपये या उससे कम है, उनके लिए कोई बदलाव नहीं होगा. उनका पीएफ पहले भी तय नियम के हिसाब से कटता था और आगे भी उसी तरह कटेगा.

वहीं जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15000 रुपये से ज्यादा है, उनके लिए फैसला कंपनी की मौजूदा पीएफ पॉलिसी पर निर्भर करेगा. कई कंपनियां आज भी कर्मचारियों की पूरी बेसिक सैलरी पर पीएफ जमा करती हैं. ऐसी कंपनियां चाहें तो पुराना तरीका जारी रख सकती हैं. इसलिए ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को यह नहीं मान लेना चाहिए कि उनकी इन हैंड सैलरी अपने आप बढ़ जाएगी.

ज्यादा PF जमा करना चाहें तो क्या होगा?

अगर कोई कर्मचारी रिटायरमेंट के लिए ज्यादा सेविंग करना चाहता है, तो वह 1800 रुपये से ज्यादा भी पीएफ में जमा कर सकता है. यह VPF के तहत होगा. हालांकि कंपनी के लिए उस एक्स्ट्रा अमाउंट पर बराबर का कॉन्ट्रीब्यूशन देना जरूरी नहीं है. कंपनी तभी एक्स्ट्रा कॉन्ट्रीब्यूशन देगी, जब उसकी पॉलिसी  में ऐसा लिखा होगा.

आपको कैसे होगा फायदा?

सीए राजा मंगला का कहना है कि अगर किसी कर्मचारी का जरूरी पीएफ घटकर 1800 रुपये हो जाता है, तो उसके हाथ में हर महीने ज्यादा पैसा आएगा. इससे कर्मचारी के पास हर महीने लोन की EMI भरने, दूसरे जरूरी खर्च करने या अपने हिसाब से निवेश के लिए ज्यादा पैसा बचेगा.

उनका कहना है कि कर्मचारी चाहें तो इस एक्सट्रा अमाउंट को म्यूचुअल फंड, इक्विटी या स्मॉल कैप फंड में निवेश कर सकते हैं. अगर लॉन्ग टर्म तक अच्छा रिटर्न मिलता है, तो यह मौजूदा पीएफ की 8.25 प्रतिशत ब्याज दर से भी ज्यादा कमाई दे सकता है. हालांकि इसमें मार्केट का रिस्क भी रहता है, जबकि पीएफ सेफ इन्वेस्टमेंट ऑप्शन माना जाता है.

क्या बदल गया और क्या नहीं?

नए EPF Scheme 2026 का मकसद पीएफ के नियमों को आसान बनाना, कंपनियों के लिए प्रक्रिया को सरल करना और कर्मचारियों को ज्यादा ऑप्शन देना है. लेकिन रिटायरमेंट की सेविंग को कम नहीं किया गया है.

सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ नया नियम आने से हर कर्मचारी की इन हैंड सैलरी नहीं बढ़ेगी. अगर कंपनी अपनी पीएफ पॉलिसी में बदलाव करती है और पीएफ को 1800 रुपये तक सीमित करती है, तभी ज्यादा सैलरी हाथ में आ सकती है. इसलिए कर्मचारियों को अपनी कंपनी की पीएफ पॉलिसी जरूर समझनी चाहिए, तभी उन्हें पता चलेगा कि नए नियम का उनकी सैलरी पर क्या असर होगा.

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