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ITR भरने के बाद आ गया Income Tax Notice? पेनल्टी से बचने के लिए तुरंत ऐसे करें रिप्लाई, जानें आसान तरीका

Income Tax Notice: इनकम टैक्स नोटिस आने पर ज़्यादातर लोग घबरा जाते हैं और समझ नहीं पाते कि क्या करें.जानिए आयकर विभाग का नोटिस असली है या फर्जी, इसकी पहचान कैसे करें, और ई-फाइलिंग पोर्टल पर स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन जवाब देकर भारी जुर्माने से कैसे बचें.

ITR भरने के बाद आ गया Income Tax Notice? पेनल्टी से बचने के लिए तुरंत ऐसे करें रिप्लाई, जानें आसान तरीका
Income Tax Notice After ITR Filing: इनकम टैक्स नोटिस का ऑनलाइन जवाब कैसे दें? देखें स्टेप-बाय-स्टेप ..

Income Tax Notice/Intimation: 31 जुलाई 2026 की ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख बीत चुकी है. अब कई लोगों के पास इनकम टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस आने शुरू हो गए हैं. ऐसे में अगर आपके ईमेल या मोबाइल पर भी इनकम टैक्स नोटिस आया है तो घबराने की जरूरत नहीं है. हर नोटिस का मतलब टैक्स चोरी या बड़ी गलती नहीं होता. कई बार इनकम टैक्स विभाग सिर्फआपकी दी गई जानकारी की पुष्टि या किसी छोटे डॉक्यूमेंट मिसमैच को समझने के लिए नोटिस भेजता है. लेकिन अगर नोटिस को नजरअंदाज कर दिया जाए तो पेनाल्टी, टैक्स डिमांड या एकतरफा असेसमेंट जैसी परेशानी हो सकती है.

ऐसे में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इनकम टैक्स नोटिस क्यों आया, यह असली है या फर्जी, इसका जवाब कैसे देना है और समय पर जवाब नहीं देने पर क्या हो सकता है. तो चलिए जानते हैं...

Income Tax Notice क्यों आता है?

ITR भरने के बाद इनकम टैक्स विभाग आपके रिटर्न का मिलान अपने रिकॉर्ड से करता है. इसमें Form 26AS, AIS (Annual Information Statement), TIS (Taxpayer Information Summary) और दूसरे सोर्स से मिली जानकारी शामिल होती है. अगर इनमें और आपके ITR में कोई अंतर मिलता है तो सिस्टम नोटिस जारी कर सकता है.

ध्यान रखें कि हर नोटिस का मतलब गड़बड़ी नहीं होता. कई नोटिस केवल जानकारी मांगने या किसी रिकॉर्ड को साफ करने के लिए भेजे जाते हैं.

इन 5 वजहों से सबसे ज्यादा आता है Income Tax Notice

1. ITR और AIS, TIS या Form 26AS में जानकारी अलग होना

यह सबसे आम वजह है. अगर आपने अपनी सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड, कैपिटल गेन या दूसरी आय ITR में नहीं दिखाई, जबकि उसकी जानकारी विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद है, तो नोटिस आ सकता है.

2. TDS की जानकारी मैच नहीं होना

अगर आपके एम्प्लॉयर, बैंक या किसी अन्य संस्था ने TDS काटा है लेकिन उसकी जानकारी सही तरीके से पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई या PAN गलत दर्ज हो गया, तो आपके द्वारा क्लेम किया गया TDS वेरिफाई नहीं हो पाएगा.ऐसी स्थिति में विभाग सेक्शन 143(1) के तहत इंटिमेशन भेज सकता है. इससे आपका रिफंड भी रुक सकता है या कम हो सकता है.

3. जरूरत से ज्यादा डिडक्शन क्लेम करना

Section 80C, 80D या दूसरे प्रावधानों के तहत डिडक्शन लेना आपका अधिकार है. लेकिन अगर आपने बिना सबूत के ज्यादा डिडक्शन क्लेम किया है या आपकी इनकम के मुकाबले दावा ज्यादा लगता है तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है.

4. बड़े फाइनेंशियल लेन-देन की जानकारी नहीं देना

इनकम टैक्स विभाग को बैंक, वित्तीय संस्थानों और दूसरी एजेंसियों से हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलती रहती है.अगर आपने महंगी प्रॉपर्टी खरीदी है, बड़ा क्रेडिट कार्ड बिल चुकाया है, भारी निवेश किया है या बैंक में बड़ी रकम जमा की है और उसकी जानकारी आपकी आय से मेल नहीं खाती, तो नोटिस आ सकता है.

5. पुराने टैक्स की डिमांड बाकी होना

अगर पिछले किसी वित्त वर्ष का टैक्स बकाया है और इस साल आपको रिफंड मिलना है, तो विभाग सेक्शन 245 के तहत नोटिस भेज सकता है.ऐसे मामलों में विभाग पहले आपको जानकारी देता है. अगर आप जवाब नहीं देते हैं तो बकाया टैक्स को रिफंड से एडजस्ट किया जा सकता है.

सबसे पहले चेक करें नोटिस असली है या फर्जी

अगर आपके पास ईमेल, एसएमएस या डाक से Income Tax Notice आया है तो सबसे पहले उसकी जांच करें.इसके लिए इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें और Pending Actions सेक्शन में जाकर नोटिस देखें. अगर वही नोटिस पोर्टल पर भी दिखाई दे रहा है तो वह विभाग की ओर से जारी किया गया वास्तविक नोटिस है.

Income Tax Notice का ऑनलाइन जवाब कैसे दें?

अगर नोटिस असली है तो उसका जवाब घर बैठे ऑनलाइन दिया जा सकता है.

  1. इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपनी User ID और Password से लॉगिन करें.
  2. Dashboard में Pending Actions पर जाएं और e-Proceedings विकल्प खोलें.
  3. अब Self ऑप्शन पर क्लिक करें.
  4. जिस नोटिस का जवाब देना है उसे चुनें. जरूरत हो तो उसकी PDF डाउनलोड करके पहले पूरा पढ़ लें.
  5. अब Submit Response पर क्लिक करें.
  6. अगर नोटिस में दी गई जानकारी सही है तो Agree चुनें. अगर आप उससे सहमत नहीं हैं तो Disagree विकल्प चुनकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.
  7. डिक्लेरेशन पर टिक करें और जवाब सबमिट कर दें.

जवाब सबमिट करने के बाद आपको एक Transaction ID मिलेगी. इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखें. इसकी जानकारी आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर भी भेज दी जाएगी.

अगर नोटिस का जवाब नहीं दिया तो क्या होगा?

अगर आपने तय समय के भीतर नोटिस का जवाब नहीं दिया तो मामला गंभीर हो सकता है.

  • धारा 272A के तहत 10,000 रुपये तक की पेनाल्टी लग सकती है.
  • विभाग धारा 144 के तहत एकतरफा टैक्स असेसमेंट कर सकता है.
  • आपका ITR रिफंड रुक सकता है.
  • अतिरिक्त टैक्स डिमांड भी बनाई जा सकती है.
  • भविष्य में टैक्स से जुड़े मामलों में परेशानी बढ़ सकती है.

इसलिए नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज करने की गलती बिल्कुल न करें.

Income Tax Notice मिलने पर क्या करें और क्या नहीं?

  • नोटिस मिलने के बाद सबसे पहले जानें ये सही है या फर्जी है.
  • Form 26AS, AIS और TDS का डेटा मैच  करें.
  • डेडलाइन के भीतर ऑनलाइन जवाब जरूर दें.
  • अगर कोई डॉक्यूमेंट मांगा गया है तो सही और पूरा रिकॉर्ड अपलोड करें.
  • मामला समझ में न आए तो चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें.
  • नोटिस को नजरअंदाज बिल्कुल न करें.
  • बिना अच्छे से चेक किए कोई जवाब सबमिट न करें.
  • गलत या अधूरी जानकारी न दें.
  • आखिरी तारीख का इंतजार न करें.

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