IRDAI Insurance Reforms: इंश्योरेंस सेक्टर में नियम बदलने की तैयारी चल रही है. इस बीच इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ ने साफ किया है कि इन बदलावों का मकसद किसी का बिजनेस बंद करना या नौकरियां छीनना नहीं है. सरकार और रेगुलेटर की कोशिश इंश्योरेंस सर्विस को सस्ता और आसान बनाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसका फायदा पहुंचे. अजय सेठ के मुताबिक, भारत में अभी आबादी और कारोबार का करीब 15% हिस्सा ही प्रभावी इंश्योरेंस कवर के दायरे में है. अगले पांच साल में इसे बढ़ाकर 30% तक पहुंचाने की संभावना है. इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद ली जाएगी, लेकिन इंश्योरेंस एजेंटों की भूमिका भी बनी रहेगी.
10 लाख नौकरियों पर क्या बोले IRDAI चेयरमैन?
इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के नियमों में बदलाव को लेकर इंडस्ट्री में नौकरी जाने की आशंका जताई जा रही है. इंश्योरेंस ब्रोकर्स का कहना है कि प्रस्ताव लागू होने से करीब 10 लाख नौकरियों पर खतरा आ सकता है. उन्हें यह भी डर है कि इंडस्ट्री की कमाई में 70% तक की कमी आ सकती है.
इस पर अजय सेठ ने कहा कि नौकरी और रोजी-रोटी छिनने की चिंता फिलहाल सही नहीं है. रेगुलेटर का मकसद मौजूदा बिजनेस मॉडल को खत्म करना नहीं, बल्कि सिस्टम को बेहतर बनाना है. उन्होंने कहा कि बदलाव धीरे-धीरे और सही तरीके से लागू किए जाएंगे, ताकि कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और कर्मचारियों को परेशानी न हो.
क्या बदलेंगे इंश्योरेंस के नियम?
IRDAI ने 23 सितंबर को इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव जारी किया था. इसमें रजिस्ट्रेशन आसान करने, शुरुआती पूंजी की जरूरत घटाने, रेगुलेटरी फीस कम करने और एजेंटों को दूसरे वित्तीय , गैर-वित्तीय कारोबार करने की ज्यादा छूट देने की बात है.
इस प्रस्ताव में डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को इन तीन कैटेगरी में बांटने का सुझाव है...
- इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटीज (IDEs)
- इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन पर्सन्स (IDPs)
- मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs)
इसका मकसद कामकाज को आसान बनाना और ग्राहकों के हितों को प्राथमिकता देना है.
क्या घटेंगे प्रीमियम और कमीशन?
IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों के खर्च की सीमा घटाने का भी प्रस्ताव दिया है. लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह सीमा दो साल में 15% और पांच साल में 12.5% करने की योजना है. वहीं, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए खर्च की सीमा पांच साल में घरेलू ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम के 20% तक लाने का प्रस्ताव है. फिलहाल संबंधित सीमा ग्रॉस रिटन प्रीमियम के 30% पर आधारित है.
वहीं, कमीशन के नियमों में भी बदलाव का सुझाव है. कमीशन की लिमिट पॉलिसी के प्रकार, बेचने के तरीके, प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने व सर्विस देने में लगने वाली मेहनत के हिसाब से तय हो सकती है. छोटे शहरों और कम इंश्योरेंस वाले इलाकों में बिक्री बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का भी प्रस्ताव है.हालांकि, इन बदलावों से प्रीमियम या कमीशन कितना घटेगा, यह अभी तय नहीं है. इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी.
UPI की तरह डिजिटल इंश्योरेंस पर जोर
अजय सेठ ने कहा कि डिजिटल सर्विस की मदद से छोटे शहरों और कम आय वाले लोगों तक इंश्योरेंस पहुंचाना आसान हो सकता है. इसके लिए UPI की तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म और एग्रीगेटर मॉडल को बढ़ावा देने की जरूरत है.अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम के जरिए ग्राहक की सहमति से उसकी वित्तीय जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे इंश्योरेंस सर्विस देने की लागत घटाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, एजेंट और दूसरे बिचौलिए ग्राहकों को सही पॉलिसी चुनने में सलाह देते रहेंगे.
कब लागू होंगे इंश्योरेंस के नए नियम?
IRDAI ने प्रस्तावों पर सुझाव देने के लिए 25 अक्टूबर तक का समय दिया है. छोटे इंश्योरेंस कारोबार, कम प्रीमियम वाली पॉलिसियों और बदलाव लागू करने में लगने वाले समय को लेकर भी सुझाव मांगे गए हैं.अजय सेठ ने संकेत दिया कि जनवरी तक नए नियम लागू करना मुश्किल हो सकता है. आगे एक और दौर की चर्चा होगी, जिसमें ड्राफ्ट नियम जारी किए जाएंगे और इंडस्ट्री को फिर अपनी राय रखने का मौका मिलेगा. कमीशन में कटौती को धीरे-धीरे लागू करने जैसे सुझावों पर भी विचार किया जा सकता है.
विदेशी निवेश और नए कैपिटल नियम
अजय सेठ ने कहा कि भारत के इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है. लाइफ और जनरल इंश्योरेंस, दोनों क्षेत्रों में नई कंपनियां शुरू करने और मौजूदा कारोबार में निवेश को लेकर रुचि दिख रही है. उनके मुताबिक, किसी भी इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर ने उनसे यह नहीं कहा कि प्रस्तावित बदलावों से विदेशी निवेश पर बुरा असर पड़ेगा.इसके अलावा, जोखिम के आधार पर पूंजी तय करने वाला नया फ्रेमवर्क 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना पर काम जारी है. इससे इंश्योरेंस कंपनियां अपनी पूंजी का ज्यादा बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगी और शेयरधारकों को भी फायदा हो सकता है.
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