भारत की आर्थिक ग्रोथ को लेकर सरकार के शीर्ष सांख्यिकी अधिकारी ने बड़ा भरोसा जताया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि पिछले तीन साल से भारत की GDP ग्रोथ लगातार 7% से 8% के बीच रही है और आगे भी ग्रोथ की इस रफ्तार में बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है.
हालांकि उन्होंने अगली तिमाही के GDP आंकड़ों को लेकर कोई अनुमान देने से इनकार किया. लेकिन पिछले तीन साल के ग्रोथ ट्रेंड को देखते हुए उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती आगे भी बनी रहने की उम्मीद है.
GDP ग्रोथ का कैलकुलेशन क्या बता रहा है?
दिल्ली में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के साइडलाइंस पर NDTV से बातचीत में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि पिछले तीन साल में भारत की GDP ग्रोथ 7% से ज्यादा रही है.
उन्होंने कहा कि ये ग्रोथ ऐसे समय में हासिल हुई है, जब अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं. इसके बावजूद सरकार की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में उठाए गए कदम, घरेलू सेक्टर और कॉरपोरेट सेक्टर की प्रतिक्रिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखा.
सांख्यिकी सचिव ने कहा कि जिस तरह की GDP ग्रोथ पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिली है, उस ताकत के आगे भी बने रहने की उम्मीद है.
पहली तिमाही में 7.8% की रियल GDP ग्रोथ
GDP ग्रोथ को लेकर ये भरोसा ऐसे समय आया है, जब मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही है.
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में शक्तिकांत दास ने कहा था कि कोविड के बाद के पांच साल यानी 2021-22 से 2025-26 के दौरान भारत की औसत GDP ग्रोथ 7.9% रही.
उन्होंने ये भी कहा कि अगर जुलाई-सितंबर 2025-26 से अप्रैल-जून 2026-27 तक की अवधि को ध्यान में रखा जाए, तो भारत की रियल GDP ग्रोथ 8% से ज्यादा हो जाती है.
यानी GDP के आंकड़ों को अलग-अलग अवधि में देखने पर भी ग्रोथ की रफ्तार मजबूत नजर आती है.
अगली तिमाही के आंकड़ों पर नहीं दिया अनुमान
हालांकि सांख्यिकी सचिव ने अगली तिमाही के GDP आंकड़ों को लेकर कोई सीधा अनुमान नहीं दिया. उन्होंने साफ कहा कि अगले नंबर क्या आएंगे, इस पर वो कुछ नहीं कहना चाहते.
लेकिन पिछले तीन साल के ट्रेंड का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि GDP ग्रोथ लगातार 7% से 8% के बीच रही है और उन्हें ऐसा नहीं लगता कि आगे ग्रोथ रेट में कोई बड़ा अंतर होना चाहिए.
यही बात इस बयान को अहम बनाती है कि सरकार के सांख्यिकी विभाग के शीर्ष अधिकारी ने आंकड़ों का अनुमान देने के बजाय पिछले ट्रेंड के आधार पर अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताया है.
RBI MPC में भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर नजर
सांख्यिकी सचिव का ये बयान ऐसे समय आया है जब मुंबई में RBI की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की बैठक शुरू हो गई है.
इस बैठक में रेपो रेट के साथ-साथ महंगाई और आर्थिक गतिविधियों की स्थिति पर भी चर्चा होगी. बुधवार को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति बयान जारी करेंगे, जिसमें मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था की दिशा और स्थिति को लेकर केंद्रीय बैंक का आकलन सामने आएगा.
वैश्विक जोखिम अभी भी चिंता का विषय
हालांकि मजबूत घरेलू ग्रोथ के बीच वैश्विक वित्तीय अस्थिरता को लेकर चिंता बनी हुई है.
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में उभरते जोखिमों पर बोलते हुए RBI गवर्नर ने कहा था कि पश्चिम एशिया के संघर्ष से पैदा हुए सप्लाई शॉक को भारतीय वित्तीय प्रणाली ने अच्छी तरह संभाला है. लेकिन वैश्विक आर्थिक माहौल अब भी चुनौतीपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने महंगाई के दबाव को और बढ़ाया है और वित्तीय प्रणाली की कमजोरियों को भी बढ़ाया है.
यानी एक तरफ भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था 7% से ज्यादा की ग्रोथ की ताकत दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ ग्लोबल अनिश्चितता, सप्लाई शॉक और महंगाई का जोखिम आगे की राह के लिए चुनौती बना हुआ है.
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