- वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.53 प्रतिशत रहने का अनुमान है
- आर्थिक रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमतें और खाद्य महंगाई के बढ़ने को आगामी माह के लिए मुख्य जोखिम बताया गया है
- IMF, विश्व बैंक, OECD और RBI सभी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर 7% से ऊपर आंकी है
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2) में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.35% रहने का अनुमान है. वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के 'नाउकास्टिंग' मॉडल के मुताबिक यह अनुमान लगाया गया है. इससे पहले वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1) में देश की GDP वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई थी.
वित्त मंत्रालय की अक्टूबर माह की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है.
किन बातों पर चिंता?
वित्त मंत्रालय ने आगाह किया है कि आने वाले महीनों में कुछ जोखिम बने रह सकते हैं, जिनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, खाद्य पदार्थों की महंगाई, खरीफ फसल को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक सुस्ती शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सरकार और नीति निर्माताओं का मुख्य फोकस आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रित रखने पर होगा.
दुनिया की अर्थव्यवस्था सुस्त, भारत मजबूत
IMF की अक्टूबर 2026 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में वैश्विक विकास दर घटकर 3.1% रहने का अनुमान है.
इसके विपरीत भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन करती दिख रही है. औद्योगिक उत्पादन, बिजली खपत, बंदरगाह गतिविधियां, GST संग्रह और ऑटोमोबाइल बिक्री जैसे प्रमुख संकेतकों में Q2 के दौरान मजबूती देखी गई है.
विकास दर को लेकर क्या कहते हैं संस्थान?
वित्त मंत्रालय का Q2 अनुमान: 7.35%
IMF का FY27 ग्रोथ अनुमान: 7.0%
विश्व बैंक का अनुमान: 7.1%
OECD का अनुमान: 7.1%
RBI का अनुमान: 7.1%
महंगाई फिर बढ़ी
वित्त मंत्रालय ने रिपोर्ट में महंगाई दर में बढ़ोतरी का विस्तार से जिक्र किया है. सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई (CPI) बढ़कर 5.54% पहुंच गई, जो अगस्त के मुकाबले 71 बेसिस पॉइंट ज्यादा है. इसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि (7.74%) और वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी रहा.
हालांकि रिपोर्ट के अनुसार CPI बास्केट में शामिल करीब 64% वस्तुओं में महंगाई अभी भी RBI के 4% लक्ष्य के आसपास या उससे नीचे बनी हुई है.
RBI ने बढ़ाया रेपो रेट
हाल में महंगाई का दबाव बढ़ने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है. साथ ही अपनी मौद्रिक नीति का रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है, यानी जरूरत पड़ने पर महंगाई को काबू में रखने के लिए आगे भी सख्ती की जा सकती है.
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