कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रोफेसर डॉ जेफरी सैक्स का मानना है कि अगर दुनिया में शांति बनी रहती है और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था उभरती है, तो भारत की तेज आर्थिक विकास दर आने वाले दशकों में भी कायम रहेगी. उन्होंने अनुमान जताया कि 2050 तक भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 21वीं सदी के उत्तरार्ध में चीन को भी पीछे छोड़ सकता है.
NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में डॉ जेफरी सैक्स ने कहा कि भारत के आर्थिक विकास की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं. उनके मुताबिक, 2050 तक चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा, भारत दूसरे और अमेरिका तीसरे स्थान पर होगा. हालांकि, सदी के उत्तरार्ध में भारत चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
डॉ सैक्स इन दिनों भारत दौरे पर हैं. वो वाराणसी में अडानी फाउंडेशन के नेतृत्व में आयोजित एक वर्ल्ड सिम्पोजियम में हिस्सा लेने पहुंचे थे.
आर्थिक रफ्तार के लिए शांति और अच्छी रणनीति जरूरी
डॉ सैक्स के मुताबिक, भारत को आने वाले दशकों में अपनी तेज आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए अच्छी आर्थिक रणनीति जारी रखनी होगी. इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर शांति और सहयोग का माहौल भी जरूरी है.
उन्होंने कहा कि दुनिया को बहुध्रुवीय व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें विभिन्न देशों के बीच सहयोग और स्थिरता बनी रहे. ऐसे माहौल में भारत अपनी आर्थिक प्रगति को और तेज कर सकता है.
2047 तक विकसित देश बनने का सपना संभव
डॉ जेफरी सैक्स ने भारत के 'विकसित भारत 2047' लक्ष्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश का 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनना संभव है. इससे भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में आ सकता है.
हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को कई मोर्चों पर काम करना होगा. इनमें युवाओं के कौशल विकास में बड़े पैमाने पर निवेश, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और देश को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाना शामिल है.
युवाओं की शिक्षा भारत का सबसे बड़ा निवेश
डॉ सैक्स ने कहा कि वो 1979 से भारत आ रहे हैं और उन्होंने देश में अद्भुत बदलाव देखा है. उनके मुताबिक, भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन युवाओं को बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है.
उन्होंने कहा, 'भारत का सबसे महत्वपूर्ण निवेश युवाओं की शिक्षा में है, क्योंकि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. युवाओं को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा की जरूरत है, इसलिए इस पर पूरा ध्यान देना चाहिए.'
उन्होंने शिक्षा के साथ भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार के विकास और नवाचार को भी आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी बताया. उनके मुताबिक, इन तीनों क्षेत्रों में एक साथ निवेश और सुधार भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकते हैं.
आम लोगों की आय और समृद्धि बढ़ने की उम्मीद
डॉ सैक्स का मानना है कि भारत की आर्थिक विकास दर स्थिर रहने से आने वाले वर्षों में आम लोगों की आय का स्तर भी बढ़ेगा. इससे देश में समृद्धि का विस्तार होगा और विकास का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकेगा.
उन्होंने कहा कि शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार पर एक साथ ध्यान देकर भारत अपनी आर्थिक क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सकता है. इससे देश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.
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