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Income Tax Refund: जरा सी गलती और अटक जाएगा रिफंड! ITR फाइल करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

Income Tax Refund Delay: गलत फॉर्म चुनने से लेकर बैंक अकाउंट वैलिडेट न होने तक... जल्दबाजी में न करें ये 6 गलतियां, वरना अटक जाएगा इनकम टैक्स रिफंड! जानिए इनसे बचने का सही तरीका क्या है.

Income Tax Refund: जरा सी गलती और अटक जाएगा रिफंड! ITR फाइल करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
ITR Refund Delay: इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म सबमिट करने से पहले जरूर चेक कर लें ये जरूरी बातें, ताकि समय पर खाते में आ जाए रिफंड का पैसा.

ITR Filing AY 2026-27 : टैक्पेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना जरूरी है, लेकिन सिर्फ जल्दी रिटर्न भर देना काफी नहीं है. एक छोटी सी गलती भी आपके टैक्स रिफंड को रोक सकती है. अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोगों का रिफंड तो टैक्स फाइलिंग के हफ्ते भर के अंदर आ जाता है लेकिन कुछ लोगों के रिफंड आने में महीनों लग जाते हैं. असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए रिटर्न फाइलिंग शुरू हो चुकी है और इस बार टेक्नोलॉजी आधारित जांच और सख्त हो गई है. ऐसे में जल्दबाजी नहीं, सही जानकारी के साथ ITR भरना ज्यादा जरूरी है.

यहां हम आपतो बताने जा रहे हैं उन आम गलतियों के बारे में  जो आमतौर पर टैक्सपेयर्स जनबूझ कर या अनजाने में करते हैं... लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं होता कि उनकी ये गलती कैसी रिफंड को अटका सकती है.

गलत ITR फॉर्म चुना तो फंस सकता है रिटर्न

कई टैक्सपेयर्स सबसे बड़ी गलती गलत ITR फॉर्म चुनने में करते हैं. अगर आपकी इनकम, कैपिटल गेन, बिजनेस इनकम, विदेशी एसेट्स या एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी है और फिर भी आप गलत फॉर्म भरते हैं, तो विभाग इसे डिफेक्टिव रिटर्न मान सकता है. इससे रिफंड में देरी हो सकती है.

ITR भरने के बाद ई-वेरिफिकेशन भूलना पड़ सकता है भारी

कई लोग रिटर्न फाइल तो कर देते हैं, लेकिन ई-वेरिफिकेशन करना भूल जाते हैं. याद रखें, ITR तभी पूरा माना जाता है जब उसका सफल ई-वेरिफिकेशन हो जाए. अगर तय समय में वेरिफिकेशन नहीं किया गया, तो रिटर्न अमान्य माना जा सकता है.

AIS, Form 26AS और Form 16 का मिसमैच बड़ी वजह

इनकम टैक्स विभाग अब AIS, Form 26AS, TDS रिकॉर्ड और आपके बैंक डेटा का मिलान करता है. अगर आपकी इनकम, ब्याज, शेयर ट्रांजैक्शन या TDS क्लेम ITR से मैच नहीं करते, तो सिस्टम रिटर्न को फ्लैग कर सकता है. यही रिफंड अटकने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है.

गलत TDS क्लेम और कटौती पर बढ़ सकती है जांच

अगर आपने जितना TDS कटा है उससे ज्यादा क्लेम कर दिया या गलत डिडक्शन/एक्जेम्प्शन जैसे HRA, 80D, 80TTA या अन्य सेक्शन में गलत जानकारी भर दी, तो CPC जांच कर सकता है. इससे रिफंड में देरी या टैक्स डिमांड भी आ सकती है.

बैंक अकाउंट की छोटी गलती से भी फेल हो सकता है रिफंड

रिफंड सिर्फ PAN-लिंक्ड और प्री-वैलिडेटेड बैंक अकाउंट में आता है. गलत अकाउंट नंबर, IFSC, बंद बैंक अकाउंट या पोर्टल पर अकाउंट वैलिडेट न होने पर रिफंड प्रोसेस रुक सकता है.

पुराने टैक्स डिमांड या नोटिस को न करें नजरअंदाज

अगर पुराने साल का टैक्स बकाया है, तो विभाग आपके मौजूदा रिफंड को एडजस्ट कर सकता है. वहीं डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस या सेक्शन 143(1)(a) के तहत एडजस्टमेंट नोटिस का जवाब न देने पर भी रिफंड अटक सकता है.

पहली बार ITR भर रहे हैं? इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

फर्स्ट टाइम टैक्सपेयर्स अक्सर ITR-1 और ITR-2 के बीच गलत चुनाव कर बैठते हैं. अगर आपने शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बेचकर कैपिटल गेन कमाया है, तो सही फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है. साथ ही छोटी इनकम जैसे सेविंग अकाउंट इंटरेस्ट भी रिपोर्ट करना जरूरी है.

जल्दी टैक्स रिफंड चाहिए तो क्या करें?

अगर आपको जल्दी रिफंड का पैसा चाहिए तो  रिटर्न भरने से पहले AIS, Form 26AS और Form 16 जरूर मिलाएं. सही ITR फॉर्म चुनें, बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट करें, सभी डिडक्शन सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट से मैच करें और समय पर ई-वेरिफिकेशन पूरा करें. इन बातों का ध्यान रखने से आपका रिफंड आ सकता है.

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