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IDBI Bank की बिक्री का रास्ता साफ! वित्त मंत्रालय का बड़ा बयान- 60.72% हिस्सेदारी बेचने पर कोई कानूनी रोक नहीं

IDBI Bank Stake Sale: वित्त मंत्रालय की ताजा सफाई से सरकार ने साफ कर दिया है कि 2003 का कानून IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने के रास्ते में रुकावट नहीं है. अब 60.72% हिस्सेदारी की बिक्री के आगे बढ़ने का रास्ता कानूनी तौर पर साफ नजर आ रहा है.

IDBI Bank की बिक्री का रास्ता साफ! वित्त मंत्रालय का बड़ा बयान- 60.72% हिस्सेदारी बेचने पर कोई कानूनी रोक नहीं
IDBI Bank Privatization: IDBI बैंक में सरकार की 60.72% हिस्सेदारी बेचने पर वित्त मंत्रालय का बयान.
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

IDBI Bank Sale News: IDBI बैंक को बेचने की सरकार की योजना पर वित्त मंत्रालय ने बड़ी सफाई दी है. मंत्रालय ने कहा है कि IDBI (Repeal) Act, 2003 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो सरकार को बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने या बेचने से रोकता हो. यह सफाई ऐसे समय आई है, जब सरकार ने कनाडा की  फेयरफैक्स (Fairfax) को बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी है.

₹52,878 करोड़ में बिकेगी 60.72% हिस्सेदारी

सरकार ने 14 अक्टूबर को IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी थी. यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये का है. इसमें सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगा. इस डील के पूरे होने के बाद सरकार के पास बैंक की 15% हिस्सेदारी और LIC के पास 19% हिस्सेदारी रह जाएगी. इससे बैंक का बहुमत मालिकाना हक खरीदार के पास चला जाएगा.

वित्त मंत्रालय ने 17 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 2003 में संसद में हुई चर्चा के आधार पर सरकार की हिस्सेदारी बेचने के अधिकार पर सवाल उठाए गए थे.मंत्रालय ने साफ किया कि उस समय सरकार की हिस्सेदारी घटाने पर रोक लगाने के लिए एक संशोधन पेश किया गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली. यह संशोधन कानून का हिस्सा नहीं बना. इसलिए मौजूदा कानून में सरकार को अपनी हिस्सेदारी बेचने से रोकने वाली कोई शर्त नहीं है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने भी दी थी सफाई

इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट 17 दिसंबर 2018 को ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम Union of India केस में फैसला दे चुका है. कोर्ट ने कहा था कि संसद में हुई चर्चा के दौरान दिए गए बयान कानून की जगह नहीं ले सकते और न ही कानून में ऐसी शर्त जोड़ी जा सकती है, जो उसमें मौजूद नहीं है.कोर्ट ने यह भी माना था कि संसद में दिए गए पुराने बयानों के आधार पर सरकार को हिस्सेदारी घटाने से नहीं रोका जा सकता. कर्मचारियों की ओर से भरोसे के आधार पर सरकार के फैसले को चुनौती देने की दलील भी कोर्ट ने स्वीकार नहीं की थी. कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी.

बजट में भी हो चुका है IDBI बैंक निजीकरण का जिक्र

IDBI बैंक में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की बात पहले भी बजट में कही जा चुकी है. 2016-17 के बजट भाषण में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि बैंक में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार अपनी हिस्सेदारी 50% से नीचे लाने के विकल्प पर भी विचार करेगी. इसके बाद 2021-22 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने IDBI बैंक को उन कंपनियों और संस्थानों में शामिल किया था, जिनका रणनीतिक विनिवेश किया जाना था.

उस समय सरकार ने बीपीसीएल (BPCL), एयर इंडिया, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, बीईएमएल (BEML), पवन हंस और नीलाचल इस्पात निगम जैसे नामों का भी जिक्र किया था. सरकार ने उस बजट में IDBI बैंक के अलावा दो सरकारी बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण की योजना भी रखी थी. इसके लिए जरूरी कानूनी बदलाव करने की बात कही गई थी.

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