- जनवरी 2026 में सोने की कीमतें अपने ऑल टाइम हाई 5,602 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचीं, फिर 30% गिरावट आई
- चांदी ने जनवरी 2026 में 121.6 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड बनाया, जो अब 54% कम होकर 55.6 डॉलर पर आ गई है
- इतिहास में सोने की सबसे बड़ी गिरावट जनवरी 1980 में हुई थी, जब कीमतें 71% तक गिर गई थीं
Gold-Silver Price Crash Analysis: सोने-चांदी में पैसा लगाने वाले निवेशक अभी के समय कीमतों में आई गिरावट को देखकर परेशान हैं. सोच रहे हैं कि कहीं उन्होंने गलत समय पर तो निवेश नहीं कर दिया? इसके पीछे की वजह है कि इसी साल जनवरी के अपने ऑल-टाइम हाई से सोने की कीमतों में 30% और चांदी में 54% की बड़ी गिरावट आ चुकी है. ऐसे में आपको एक राहत भरी खबर बता देते हैं. दरअसल हाल ही में जारी हुई DSP Netra की रिपोर्ट का मानना है कि सोने-चांदी की कीमतों में आया ये बड़ा क्रैश पिछले सालों में आई गिरावट के मुकाबले अभी कम है.
रिपोर्ट पर क्या बोले एक्सपर्ट?
केडिया एडवाइजरी ने भी इस रिपोर्ट पर हामी भरते हुए कहा, सोने के इतिहास को उठाकर देखें तो ये गिरावट बहुत ही कम है. साल 1980, 1974 या 2008 में इससे ज्यादा सस्ता सोना हो चुका था. यानी कीमतें कुछ ही महीने में अपने पीक से घटकर नीचे आ गईं थीं.
रिकॉर्ड से कितने गिरे दाम?
DSP Netra की रिपोर्ट के अनुसरा, जनवरी 2026 में सोने ने 5,602 डॉलर प्रति औंस का ऑल टाइम हाई लेनल टच किया था. इसके बाद मिडिल ईस्ट में टेंशन और मार्केट में प्रॉफिट बुकिंग और करेक्शन का दौर शुरू हुआ, जिससे सोना गिरकर 3,942 डॉलर प्रति औंस के लो लेवल पर आ गया. यानी रिकॉर्ड हाई से सोने की कीमतों में करीब 30% की गिरावट आ जा चुकी है.
वहीं, दूसरी तरफ चांदी की बात करें तो इसमें सोने से भी ज्यादा गिरावट आई. जनवरी 2026 में चांदी 121.6 डॉलर प्रति औंस के लाइफटाइम हाई पर पहुंच गई थी, जो अब 54% टूटकर 55.6 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है. आंकड़ों के अनुसार सोने और चांदी अपने पीक से सिर्फ एक से दो महीने में ही 25% नीचे गिर गए थे.
सोने में जब 71% तक कम हो गई थीं कीमतें
DSP Netra की रिपोर्ट के अनुसार, अभी के समय में 30% की गिरावट सोने के लिए सबसे बड़ी गिरावट नहीं है. जनवरी 1980 के पीक के बाद सोना 71% तक टूट गया था. इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट के बाद बाजार को लो लेवल बनाने में ही 19 साल और 7 महीने लग गए थे. वहीं, पुराना रिकॉर्ड तोड़ने में सोने को पूरे 28 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा था.
इसके अलावा दिसंबर 1974 के पीक के बाद सोना 49% गिरा था, जिसे रिकवर करने में 1 साल 8 महीने लगे. साथ ही सितंबर 2011 के हाई के बाद 46% और मार्च 2008 के साइकिल में कीमतें 34% तक करेक्ट हुई थीं.
चांदी में जब आई 93% की गिरावट
चांदी में हमेशा से उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा है. हालांकि अभी की 54% कमी साल 1980 की गिरावट के सामने कुछ भी नहीं है. जनवरी 1980 के पीक के बाद चांदी 93% क्रैश हो गई थी. इसे एक मजबूत बॉटम बनाने में 11 साल से ज्यादा का समय लगा और पुराने रिकॉर्ड को दोबारा छूने में 31 साल का टाइम लग गया. अप्रैल 2011 के बाद भी चांदी ने 77% का बड़ा फॉल देखा था, जबकि अगस्त 1975 में इसमें 27% का हल्का करेक्शन हुआ था.
क्या ये खरीदारी का सही समय?
अब क्योंकि सोने और चांदी में करेक्शन का ये दौर अभी जारी है, इसलिए DSP Netra की रिपोर्ट के अनुसार, अभी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि कीमतें कब अपने सबसे लो लेवल पर जाएंगी या कब दुबारा नया रिकॉर्ड बनाएंगी. इन ट्रेंड्स को देखें तो पता चल रहा है कि बड़ी गिरावट के बाद सोने-चांदी को संभलने में कुछ महीनों से लेकर कई साल तक का समय लग सकता है.
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