- भारी बारिश और भूस्खलन के कारण चारधाम यात्रा मंगलवार और बुधवार के लिए स्थगित.
- उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी गढ़वाल में मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट.
- साथ ही उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख में मॉडरेट फ्लैश फ्लड रिस्क की चेतावनी भी जारी की गई.
उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने चारधाम यात्रा पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार और बुधवार के लिए चारधाम यात्रा स्थगित कर दी है. राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश, भूस्खलन और सड़कें बंद होने की घटनाओं के बाद यह फैसला लिया गया. इसके साथ ही सेंट्रल वॉटर कमीशन ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख में मॉडरेट फ्लैश फ्लड रिस्क की चेतावनी भी जारी की है.
गढ़वाल मंडल के आयुक्त के मुताबिक, यात्रा तभी दोबारा शुरू होगी जब मौसम सामान्य होगा और रास्ते पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिए जाएंगे.
Latest satellite animation pic.twitter.com/XStVXbmPla
— India Meteorological Department (@Indiametdept) July 27, 2026
क्यों रोकनी पड़ी चारधाम यात्रा?
उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से लगातार मानसूनी बारिश हो रही है. कई जगहों पर पहाड़ों से मलबा और चट्टानें गिरने की घटनाएं सामने आई हैं. इससे चारधाम जाने वाले प्रमुख मार्ग कई स्थानों पर बाधित हो गए हैं.
मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों में भी भारी बारिश का अनुमान जताया है. इसी वजह से सरकार ने जोखिम लेने के बजाय यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया.
साथ ही मौसम विभाग ने अचानक बाढ़ आने की संभावना को लेकर अगले 24 घंटे का पूर्वानुमान जारी किया है. यह फ्लैश फ्लड 29.07.2026 की सुबह साढ़े पांच बजे तक मान्य है. इसमें इन राज्यों के कई जिलों में फ्लैश फ्लड के खतरे का अंदेशा जताया गया है.
इन जिलों में जम्मू-कश्मीर का डोडा-किश्तवाड़, उधमपुर और सांबा जिले शामिल हैं. वहीं हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिले शामिल हैं.
वहीं उत्तराखंड के अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल नैनीताल, पिथौरागढ़, रूद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिले शामिल हैं.

Photo Credit: ANI
किन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा?
उत्तराखंड के कई जिलों में देर रात से लगातार बारिश हो रही है बारिश की वजह से गंगा ,अलकनंदा, भागीरथी ,पिंडर, कोसी ,टॉस ,यमुना बांदल, सोंग, जैसी कई नदियां उफान पर बह रही है.
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. जिन इलाकों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है उनमें उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और पौड़ी गढ़वाल शामिल हैं.
इन इलाकों में भारी बारिश के साथ बिजली गिरने और भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है.
मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए देहरादून ,रुद्रप्रयाग ,पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में स्कूलों की एक दिन की छुट्टी की गई है.
प्रशासन ने लोगों से क्या अपील की?
प्रशासन ने स्थानीय लोगों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं से कहा है कि. नदियों और नालों के पास बिल्कुल न जाएं. बिना जरूरी काम के यात्रा न करें. पहाड़ी रास्तों पर बेहद सावधानी बरतें. मौसम विभाग और जिला प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें. इसके साथ ही लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक जानकारी पर विश्वास करने की अपील भी की गई है.

Photo Credit: NDTV
लगातार बारिश से और क्या नुकसान हुआ?
लगातार बारिश सिर्फ चारधाम मार्गों पर ही असर नहीं डाल रहा है. देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर बने एक पुल के एप्रोच रोड बहने से रास्ता ब्लॉक हो गया है. साल 2025 को अगस्त में आई भारी बारिश के चलते यह पुल बह गया था जिसके बाद इस पल को करीब 16 करोड़ की लागत से बनाया गया लेकिन मात्र 16 दिन में ही इस पुल के एप्रोच रोड बह गई है अब ऐसे में लोगों को दूसरे नए हाईवे से होते हुए आना पड़ रहा है.
इसके कारण देहरादून, विकासनगर और पड़ोसी हिमाचल प्रदेश के बीच यातायात प्रभावित हुआ है. भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रभावित जिलों में मंगलवार को सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने के आदेश दिए गए हैं.
चारधाम यात्रा के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही रुद्रप्रयाग की लगभग 900 मीटर लंबी टनल के निर्माण स्थल पर बड़ा हादसा सामने आया है. उद्घाटन से पहले ही टनल के बाहरी हिस्से के ऊपर स्थित पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भरभराकर टूट गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया. यह टनल भविष्य में बद्रीनाथ हाईवे और केदारनाथ हाईवे को सीधे जोड़ने वाली है और इससे रुद्रप्रयाग शहर में लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलने की उम्मीद है. पहाड़ी दरकने से टनल के बाहर निर्माणाधीन आवासीय परिसर को भी भारी नुकसान पहुंचा है. कई हिस्सों में मलबा गिरने से संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं. घटना के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति का जायजा लेने में जुट गईं.

रूद्रप्रयाग
Photo Credit: NDTV
इसके साथ ही रुद्रप्रयाग मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित विश्वप्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव गुफा मंदिर तक उफनती मां अलकनंदा का जल पहुंच गया. सामान्य दिनों में नदी से करीब 30 मीटर की दूरी पर स्थित गुफा तक इस तरह पानी पहुंच गया है लगातार हो रही भारी बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और देखते ही देखते नदी का पानी कोटेश्वर गुफा के भीतर तक पहुंच गया.
दूसरी ओर प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. अलकनंदा नदी खतरे के निशान के करीब बह रही है, जिसके चलते श्रद्धालु नदी किनारे जाकर जल भरकर भगवान शिव का जलाभिषेक भी नहीं कर पा रहे हैं. तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी के समीप जाने से बचने की सलाह दी गई है.
रुद्रप्रयाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे जनपद में हालात गंभीर बना दिए हैं. बेलनी क्षेत्र में स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा भी नदी के तेज बहाव में जलमग्न हो गई है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है. नदी का पानी अब आवासीय क्षेत्रों के करीब तक पहुंचने लगा है. प्रशासन लगातार लोगों को सतर्क रहने, नदी किनारे न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रहा है. जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है.
चारधाम यात्रा में कौन-कौन से धाम शामिल हैं?
चारधाम यात्रा में चार प्रमुख हिंदू तीर्थ बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री शामिल हैं.
हर साल लाखों श्रद्धालु इन चारों धामों के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं. लेकिन मानसून के दौरान भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है.
प्रशासन लगातार मौसम और सड़कों की स्थिति पर नजर रखे हुए है. यदि बारिश कम होती है और बंद मार्गों को खोल दिया जाता है, तो चारधाम यात्रा दोबारा शुरू करने की घोषणा की जाएगी.
जब तक आधिकारिक अनुमति न मिले, श्रद्धालुओं को यात्रा शुरू नहीं करनी चाहिए और पहले स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की ताजा जानकारी जरूर लेनी चाहिए.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं