Retail Investor Trends 2026: भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. बाजार में अब 27 साल के युवाओं यानी Gen Z ने अपनी मजबूत एंट्री से तहलका मचा दिया है.एनएसई (NSE) की ताजा रिपोर्ट ने बाजार के इस नए ट्रेंड का खुलासा कर हर किसी को हैरान कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में शेयर बाजार में निवेश करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. मार्च 2020 में देश में करीब 3 करोड़ निवेशक थे. जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 13 करोड़ से ज्यादा हो गई. यानी अब देश के हर 10 लोगों में से करीब एक व्यक्ति शेयर बाजार में रजिस्टर्ड निवेशक है. लेकिन सवाल यह है कि इस तेजी के पीछे कौन है? क्या लोग लंबे समय के लिए निवेश कर रहे हैं या सिर्फ ट्रेडिंग कर रहे हैं.
दौलत बनाने के लिए निवेश या सिर्फ सट्टेबाजी
जून 2026 तक कुल 13.24 करोड़ निवेशकों में से करीब 4.40 करोड़ एक्टिव निवेशक थे. यानी उन्होंने पिछले एक साल में कम से कम एक ट्रांजैक्शन किया. एनएसई मार्केट पल्स जुलाई 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें 3.55 करोड़ निवेशकों ने कैश मार्केट में निवेश किया. वहीं करीब 85 लाख निवेशक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफ एंड ओ सेगमेंट में एक्टिव रहे.

कैश मार्केट में लोग आमतौर पर कंपनियों के शेयर खरीदकर लंबे समय तक रखते हैं. इसे वेल्थ क्रिएशन का तरीका माना जाता है. दूसरी तरफ एफ एंड ओ का इस्तेमाल ज्यादातर स्पेकुलेशन और हेजिंग के लिए होता है. सेबी कई बार कह चुका है कि एफ एंड ओ में ट्रेड करने वाले ज्यादातर रिटेल निवेशकों को नुकसान होता है. रिपोर्ट बताती है कि एफ एंड ओ के मुकाबले कैश मार्केट में ज्यादा लोगों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत में रिटेल निवेशक सिर्फ सट्टेबाजी नहीं, बल्कि निवेश पर भी ध्यान दे रहे हैं.
Gen z बना शेयर बाजार की सबसे बड़ी ताकत
एनएसई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रिटेल निवेशक बेस काफी युवा है और तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरफ बढ़ रहा है. अप्रैल से जून 2026 के बीच शेयर बाजार से जुड़े सभी नए निवेशकों में 59% की उम्र 30 साल से कम थी. इतना ही नहीं, मार्च 2020 से जून 2026 तक हर साल नए निवेशकों में 53% से 59% तक हिस्सेदारी 30 साल से कम उम्र वालों की रही. यही वजह है कि नए निवेशकों की मीडियन उम्र 29 साल से घटकर 27 साल हो गई है.

शेयर बाजार में तेजी से बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
युवा निवेशकों के साथ महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है. जून 2026 तक कुल व्यक्तिगत निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 25% रही. पिछले तीन वित्त वर्षों में महिला निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ी है. राज्यों की बात करें तो एफवाई26 में गोवा सबसे आगे रहा, जहां रजिस्टर्ड निवेशकों में 33% महिलाएं हैं. इसके बाद दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों का नंबर आता है.

वहीं उत्तर प्रदेश निवेशकों की संख्या के मामले में देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है. लेकिन महिला निवेशकों की हिस्सेदारी के मामले में यह सबसे नीचे रहने वाले पांच राज्यों में शामिल है. यहां सिर्फ 19.2% निवेशक महिलाएं हैं, जो देश के औसत 24.9% से काफी कम है.
आखिर बाजार पर किसका सबसे ज्यादा कंट्रोल है?
निवेशकों की संख्या बढ़ने के बावजूद बाजार में सबसे ज्यादा कारोबार अब भी कुछ बड़े निवेशकों के हाथ में है. रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 0.3% निवेशक कैश मार्केट के करीब 79% टर्नओवर पर कब्जा रखते हैं. इनमें ऐसे निवेशक शामिल हैं जिनका सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा है. अगर 1 करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये टर्नओवर वाले निवेशकों को भी जोड़ दिया जाए, तो ये दोनों ग्रुप मिलकर कैश मार्केट के करीब 92% टर्नओवर पर कब्जा रखते हैं. जबकि जून 2026 तक ये दोनों मिलाकर सिर्फ 2.4% एक्टिव निवेशक हैं.

दूसरी तरफ, जिन निवेशकों का कैश मार्केट टर्नओवर 1 लाख रुपये से कम है, उनकी हिस्सेदारी 66.2% है. लेकिन कुल टर्नओवर में उनका योगदान सिर्फ 0.32% है. इससे साफ होता है कि बाजार में निवेशकों की संख्या भले तेजी से बढ़ रही हो, लेकिन कारोबार का बड़ा हिस्सा अब भी बहुत कम बड़े निवेशकों के हाथ में है.
ये भी पढ़ें- ITR Deadline: आज ITR फाइल करने की आखिरी तारीख, लेकिन क्या अब भी बदल सकते हैं Tax Regime?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं