भारतीय शेयर बाजार में लगातार तेजी के बाद मंगलवार (11 अगस्त) को कारोबारी सत्र में सुबह खुलते ही लाल निशान के बाद बंद भी गिरावट के साथ हुआ. दिन के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक या 0.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,154.25 और निफ्टी 112.10 अंक या 0.46 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,471.70 पर था. बाजार में बिकवाली का दबाव सबसे अधिक एफएमसीजी और रियल्टी स्टॉक्स में देखने को मिला. सूचकांकों में निफ्टी एफएमसीजी 1.17 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.99 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे.
निफ्टी मेटल 0.95 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.86 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.84 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 0.63 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.56 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.55 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए.
दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा 1.02 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 0.61 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.08 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ.
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 11.85 अंक या 0.02 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,843.85 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 43.20 अंक या 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,857.15 पर बंद हुआ.
कौन-कौन रहे गेनर्स और कौन लूजर्स
सेंसेक्स पैक में इटरनल, इन्फोसिस, टाइटन, एचसीएल टेक और टीसीएस गेनर्स थे. अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, इंडिगो, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, आईटीसी, एमएंडएम, टाटा स्टील, एचयूएल, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, एसबीआई, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और बीईएल लूजर्स थे.
11 अगस्त को बाजार गिरने का मुख्य कारण
जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल ने बाजार का ध्यान फिर से महंगाई के जोखिमों की ओर खींच लिया, जिससे अच्छे नतीजों के बावजूद निवेशकों का उत्साह कम हो गया. होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट और अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर चिंताओं ने बाजार के मूड को सतर्क बनाए रखा, खासकर भारत और अमेरिका में महंगाई के अहम आंकड़ों के आने से पहले. इसके चलते, ऊर्जा की अधिक लागत से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर पर दबाव पड़ा, जबकि फार्मा और कुछ आईटी कंपनियों के शेयरों में बढ़त देखी गई. फिर भी, विदेशी निवेश की मजबूत आवक और कंपनियों की अच्छी कमाई से गिरावट का जोखिम सीमित बना हुआ है.
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