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'बेतहाशा बढ़ रही हैं कीमतें...', निर्मला सीतारमण ने बताया किन तीन 'F' पर फोकस करना होगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के कारण कीमतें बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध का असर जियो-पॉलिटिक्स से कहीं आगे तक पड़ रहा है.

'बेतहाशा बढ़ रही हैं कीमतें...', निर्मला सीतारमण ने बताया किन तीन 'F' पर फोकस करना होगा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फाइल फोटो)
IANS
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूल, फर्टिलाइजर और विदेशी मुद्रा रिजर्व पर फोकस करने की आवश्यकता बताई है
  • पेट्रोल-डीजल की कीमतें पिछले 11 दिनों में चार बार बढ़ीं और पेट्रोल 7 रुपये महंगा हो चुका है
  • उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व संकट आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर डाल रहा है
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मुंबई:

पश्चिम एशिया का संकट गहराता जा रहा है. तेल-गैस से लेकर हर चीज की कीमत बढ़ती जा रही है. इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन 'F' पर फोकस करने की जरूरत बताई है. उन्होंने सोमवार को कहा कि फर्टिलाइजर्स की कीमतें अकल्पनीय स्तर पर पहुंच गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को तीन 'F' यानी- फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेन करेंसी रिजर्व पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका-ईरान युद्ध वैश्विक बाजारों में भूचाल ला रहा है और देश में लागत बढ़ा रहा है.

मुंबई में स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) की 37वीं सालगिरह के कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये बातें कहीं. उनकी ये टिप्पणी देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच आई है. बीते 11 दिन में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 4 बार बढ़ चुकी हैं. 11 दिनों में पेट्रोल 7.38 रुपये महंगा हो गया है.

इस बीच सीतारमण ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील बहुत मायने रखती है. उन्होंने कहा, 'तीन F- फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेक्स रिजर्व पर फोकस करने की जरूरत है.'

सीतारमण ने यह भी कहा कि तेल की बढ़ती कीमतें इस संकट का सिर्फ एक हिस्सा है. उन्होंने कहा कि फ्यूल के अलावा उर्वरकों की कीमतें भी अकल्पनीय स्तर पर पहुंच गई है, जबकि सोने की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चुनौतियां पैदा कर रही हैं.

उनकी यह टिप्पणी तब आई है, जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने और सोने न खरीदने की अपील की थी, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया जा सके. होर्मुज संकट के कारण तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इसका सीधा असर भारत के रूपये पर पड़ रहा है. हाल ही में एक डॉलर की कीमत 97 रुपये तक पहुंच गई थी.

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'जियो-पॉलिटिक्स से कहीं आगे तक असर'

सीतारमण ने कहा कि मध्य-पूर्व संकट का असर जियो-पॉलिटिक्स से कहीं आगे तक फैलता है. उन्होंने कहा कि 'मध्य पूर्व का संकट सिर्फ एक जियो-पॉलिटिकल मुद्दा नहीं है. कारोबारियों और आम लोगों के लिए इसका मतलब हो सकता है कि ईंधन की ज्यादा कीमत, कार्गो में देरी, शिपिंग का महंगा होना, इनपुट की कीमत और एक्सपोर्ट ऑर्डर में अनिश्चितता.' उन्होंने आगे कहा कि 'जरा सोचिए, जब ये सभी चीजें एक साथ सामने आए जाएं.'

हालांकि, उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि देश की अर्थव्यवस्था गिर रही है. उन्होंने कहा कि 'भारत की आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है. नकारात्मक बातें करने वाले स्थिति को ऐसे पेश कर रहे हैं, जैसे सबकुछ बिखर रहा हो.'

उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, 'एक ऐसा तबका है जो बहुत जल्दी अपने ही लोगों की उपलब्धियों की बुराई करने लगता है.'

सीतारमण ने कहा, 'आम लोग जो भी अच्छा काम करते हैं, उसे भुला दिया जाता है और एक कहानी गढ़ी जाती है जो बिल्कुल भी सही नहीं है.' उन्होंने आगे कहा, 'भारत डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता. हमें अपने शब्दों और काम से अपने लोगों में आत्मविश्वास जगाने की जरूरत है.'

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केंद्र को रेवेन्यू लॉस हुआ है: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री सीतारमण ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार के रवैये का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने कीमतों में और ज्यादा तेजी से होने वाली बढ़ोतरी से बचाने के लिए पहले ही रेवेन्यू का बड़ा नुकसान उठाया है.

उन्होंने कहा, 'पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती के कारण सरकार को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है.'

उन्होंने MSME में दबाव की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि 8.1 लाख करोड़ रुपये के बकाया भुगतानों में देरी से वर्किंग कैपिटल पर बुरा असर पड़ रहा है और विकास की गति धीमी हो रही है. उन्होंने सरकारी बैंकों से आग्रह किया कि MSME का बकाया 45 दिनों के भीतर चुका दिया जाए.

इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है. उन्होंने जीएसटी कलेक्शन और प्राइवेट सेक्टर में निवेश में सुधार को ऐसे संकेतों के तौर पर पेश किया, जिससे यह जाहिर होता है कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूती से टिकी हुई है.

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