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हर महीने PF ज्यादा कटवाएं या टेक-होम सैलरी बढ़ाएं? जानिए किसमें हैं आपका असली फायदा

EPF vs Take Home Salary: क्या कम पीएफ कटवाकर हर महीने ज्यादा सैलरी लेना सही है? जानिए कैसे 1,800 रुपये बचाने का लालच आपके रिटायरमेंट फंड को लाखों रुपये का चपत लगा सकता है.

हर महीने PF ज्यादा कटवाएं या टेक-होम सैलरी बढ़ाएं? जानिए किसमें हैं आपका असली फायदा
EPFO New Rules 2026: पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन घटाने या बढ़ाने का सैलरी और रिटायरमेंट पर सीधा असर

New Labour Code PF Rules: हर महीने अकाउंट में सैलरी आते ही हम सबसे पहले इन-हैंड यानी टेक-होम सैलरी चेक करते हैं. सोचिए, अगर आपसे कहा जाए कि आप हर महीने अपने हाथ में आने वाली सैलरी बढ़ा सकते हैं, तो जाहिर है यह खबर सुनकर किसी के भी चेहरे पर खुशी आ जाएगी. नए लेबर कोड के नियमों के मुताबिक, कर्मचारी चाहें तो अपना पीएफ (EPF) कॉन्ट्रीब्यूशन कम करवाकर हर महीने ज्यादा सैलरी ले सकते हैं.

इससे हर महीने जेब में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे होंगे. लेकिन जल्दबाजी में  बिना-सोचे समझे  अगर आप कोई फैसला लेते हैं तो  इससे आपके रिटायरमेंट फंड में लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है. इसलिए पहले ये समझना जरूरी है कि आपको अपनी इन हैंड सैलरी बढ़ानी चाहिए या ज्यादा पीएफ कटने देना ही समझदारी है. आइए आसान भाषा में समझते हैं ..

नया नियम कैसे बढ़ाएगा आपकी हर महीने की सैलरी?

फिलहाल EPF नियमों के तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में जमा होता है.कई कंपनियां पूरी बेसिक सैलरी पर पीएफ काटती थीं या फिर 15,000 रुपये की सरकारी वेज सीलिंग के हिसाब से कम से कम 1,800 रुपये महीना काटती थीं.

नए लेबर कोड में भी 15,000 रुपये की सैलरी लिमिट पर 12% के हिसाब से 1,800 रुपये का  योगदान  देना अनिवार्य लागू है. हालांकि जिन कर्मचारियों  की सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा है  मर्जी  से ज्यादा पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन का ऑप्शन चुन सकते हैं.

अगर हर महीने ज्यादा सैलरी चाहिए तो  ऐसे में आप अपनी कंपनी से बात करके अपना पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन हर महीने 1,800 रुपये फिक्स करवा सकते हैं. इससे आपकी पीएफ कटौती कम हो जाएगी और आपकी टेक-होम सैलरी तुरंत बढ़ जाएगी.

1,800 रुपये बचाने के चक्कर में कैसे होगा लाखों का नुकसान?

इसे एक सिंपल तरीके से समझिए...  मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है. 12% के हिसाब से हर महीने आपके पीएफ में 6,000 रुपये जमा होते हैं. अगर आप इसे घटाकर सिर्फ 1,800 रुपये करवाते हैं, तो आपकी टेक-होम सैलरी हर महीने 4,200 रुपये बढ़ जाएगी.

अब जरा लॉन्ग टर्म का सोचिए... अगर यही 4,200 रुपये हर महीने पीएफ में ही जमा होते रहते, तो 8.25% ब्याज दर के हिसाब से 25 साल बाद आपके पास करीब 41 से 42 लाख रुपये का गारंटीड फंड तैयार हो जाता. इतना ही नहीं, अगर आपकी कंपनी ने भी एक्स्ट्रा कॉन्ट्रीब्यूशन बंद कर दिया, तो रिटायरमेंट के समय आपको करीब 80 लाख रुपये का सीधा फटका लग सकता है. 

इसके अलावा, टेक-होम सैलरी बढ़ने से आपका इनकम टैक्स भी बढ़ सकता है, जबकि पीएफ का पैसा टैक्स-फ्री होता है.

किन लोगों को भूलकर भी पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन नहीं घटाना चाहिए?

हर कर्मचारी के लिए इन-हैंड सैलरी बढ़ाना फायदेमंद नहीं होता. अगर आप नीचे दी गई कैटेगरी में आते हैं, तो ज्यादा पीएफ कटने दें...

  • जो कर्मचारी अपने रिटायमेंट के बाद  पूरी तरह सिर्फ ईपीएफ के भरोसे हैं.
  • अगर आपकी कंपनी भी पूरी बेसिक सैलरी का 12% पीएफ में डाल रही है तो योगदान घटाने पर कंपनी की तरफ से मिलने वाला एक्स्ट्रा पैसा बंद हो सकता है.
  • जिनकी उम्र 40 से ज्यादा है, क्योंकि उनके पास रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है.
  • जिनकी हर महीने पैसे बचाने या इन्वेस्ट करने की आदत नहीं है और जिनके पास कोई इमरजेंसी फंड नहीं है.
  • जो लोग शेयर बाजार के जोखिम से डरते हैं और सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं.

फिलहाल पीएफ पर 8.25% का टैक्स-फ्री और पूरी तरह सुरक्षित ब्याज मिल रहा है, जो किसी भी दूसरे रिस्क-फ्री ऑप्शन में मिलना मुश्किल है.

किन लोगों के लिए में कम PF कटवाना हो सकता है समझदारी?

पीएफ कटौती घटाकर ज्यादा सैलरी लेने का फैसला सिर्फ दो  तरह के कर्मचारियों के लिए ही सही साबित हो सकता है..

  • अगर आप पर 12% से 14% तक के हाई-इंटरेस्ट वाले पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का कर्ज है, तो पीएफ का पैसा बचाकर पहले लोन चुकाना समझदारी है. 14% का लोन जल्दी खत्म करना 8.25% का पीएफ ब्याज कमाने से ज्यादा फायदेमंद होता है.
  • अगर आप पैसों के मामले में काफी अनुशासित हैं और बढ़ी हुई टेक-होम सैलरी को ऐसी जगह इन्वेस्ट कर सकते हैं जहां पीएफ से ज्यादा रिटर्न मिले.

अगर आप खुद से सही जगह इन्वेस्ट नहीं कर सकते, तो पीएफ कटने देना ही आपके लिए बेस्ट रहेगा.
 

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