वित्तमंत्री अरुण जेटली...
नई दिल्ली:
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कंपनियों को अधिक व्यवहार्य बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों के लिए आयकर घटाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है. सरकार ने न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) का उपयोग 10 वर्ष की बजाय 15 वर्ष की अवधि तक करने की अनुमति दी. बैंकिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अनर्जक परिसंपत्तियों के लिए अनुमत प्रावधान को 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है. एलएनजी पर मूल सीमा शुल्क पांच प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत किया गया है.
केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरूण जेटली ने संसद में वर्ष 2017-18 का आम बजट पेश करते हुए बताया कि 50 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों के लिए आयकर घटाकर 25 प्रतिशत किया गया है, ताकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कंपनियों को अधिक व्यवहार्य बनाने तथा फर्मों को कंपनी प्रारूप में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. निर्धारण वर्ष 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार 6.94 लाख कंपनियां रिटर्न दाखिल कर रही हैं, जिसमें से 6.67 लाख कंपनियां इस श्रेणी में आती हैं, इसलिये प्रतिशत वार 96 प्रतिशत कंपनियां कम कराधान का लाभ उठाएंगी. यह हमारे एमएसएमई क्षेत्र को बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बना देगा. इस उपाय से 7,200 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का परित्यक्त राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है.
वित्त मंत्री ने बताया कि वर्तमान में न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) को हटाना या कम करना व्यावहारिक नहीं है. हालांकि आगामी वर्षों में कंपनियों को मैट क्रेडिट का उपयोग करने के लिए मैट को मौजूदा 10 वर्षों के बजाय 15 वर्षों की अवधि तक और आगे बढ़ाने का उन्होंने प्रस्ताव किया. वर्तमान में न्यूनतम वैकल्पिक कर को एक अग्रिम कर के रूप में लागू किया जाता है. यद्यपि रियायतों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने की योजना 01 अप्रैल, 2017 से शुरू होगी और चरणबद्ध समाप्ति से राजस्व का पूरा लाभ सरकार को 7 से 10 वर्षों के बाद ही प्राप्त होगा. जब रियायतों का पहले से ही लाभ ले रही सभी कंपनियां अपने लाभ लेने की अवधि पूरी कर लेंगी.
सरकार ने 2017-18 के बजट प्रस्ताव में वृद्धि को गति प्रदान करने के लिए अनेक कदम उठाने की घोषणा की है. विदेशी कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक ऋण राशियों या बॉण्ड और सरकारी प्रतिभूतियों ने अर्जित ब्याज पर पांच प्रतिशत रियायती विद-होल्डिंग दर का प्रभार लिया जा रहा है. यह रियायत 30 जून, 2017 तक उपलब्ध है. वित्त मंत्री ने इस रियायत को 30 जून, 2020 तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया है. यह लाभ रूपया मूल्यवर्गित (मसाला) बॉण्ड पर भी दिया जा रहा है.
सरकार ने पिछले साल कुछ निश्चित शर्तों पर स्टार्ट अप्स को भी आयकर में रियायत दी थी. ऐसे स्टार्ट अप्स के संबंध में हानियों को बाद के वर्षों के लेखा-जोखा में समाहित करने के लिए मताधिकार के 51 प्रतिशत की निरंतर शेयरधारिता बनाये रखने की शर्त में इस शर्त के अधीन ढील दी गई है कि मूल प्रोमोटर/प्रोमोटरों की शेयरधारिता जारी रहेगी. इसके अलावा स्टार्ट अप्स को 5 में से 3 वर्षों के लिए लाभ से जुड़ी कटौती की रियायत को बदलकर 7 में से 3 वर्ष किया जा रहा है.
जेटली ने बैंकिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अनर्जक परिसंपत्तियों के लिए अनुमत प्रावधान को 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया है. इससे बैंकों की देनदारी कम होगी. उन्होंने सभी अनुसूचित बैंकों के अनुसार सभी गैर-अनुसूचित सहकारी बैंकों के एनपीए खातों के संबंध में एक्रूअल आधार की बजाय वास्तविक प्राप्ति पर प्राप्त होने वाले ब्याज पर कर लगाने का प्रस्ताव किया गया है. इससे ब्याज आय प्राप्त न होने पर भी कर भुगतान करने का कष्ट समाप्त होगा.
एलएनजी को ईंधन के साथ-साथ पेट्रो रसायन क्षेत्र के फील्ड स्टॉक के प्रयोग की व्यापकता पर विचार करते हुए वित्त मंत्री ने एलएनजी पर मूल सीमा शुल्क को 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव किया है.
घरेलू मूल्य संवर्द्धन को प्रोत्साहित करने तथा मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अपने भाषण में कुछ वस्तुओं के संबंध में सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क में परिवर्तन करने का प्रस्ताव किया है. इनमें से कुछ प्रस्ताव शुल्क प्रतिलोमन समाप्त करने के लिए भी है.
केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरूण जेटली ने संसद में वर्ष 2017-18 का आम बजट पेश करते हुए बताया कि 50 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों के लिए आयकर घटाकर 25 प्रतिशत किया गया है, ताकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कंपनियों को अधिक व्यवहार्य बनाने तथा फर्मों को कंपनी प्रारूप में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. निर्धारण वर्ष 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार 6.94 लाख कंपनियां रिटर्न दाखिल कर रही हैं, जिसमें से 6.67 लाख कंपनियां इस श्रेणी में आती हैं, इसलिये प्रतिशत वार 96 प्रतिशत कंपनियां कम कराधान का लाभ उठाएंगी. यह हमारे एमएसएमई क्षेत्र को बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बना देगा. इस उपाय से 7,200 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का परित्यक्त राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है.
वित्त मंत्री ने बताया कि वर्तमान में न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) को हटाना या कम करना व्यावहारिक नहीं है. हालांकि आगामी वर्षों में कंपनियों को मैट क्रेडिट का उपयोग करने के लिए मैट को मौजूदा 10 वर्षों के बजाय 15 वर्षों की अवधि तक और आगे बढ़ाने का उन्होंने प्रस्ताव किया. वर्तमान में न्यूनतम वैकल्पिक कर को एक अग्रिम कर के रूप में लागू किया जाता है. यद्यपि रियायतों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने की योजना 01 अप्रैल, 2017 से शुरू होगी और चरणबद्ध समाप्ति से राजस्व का पूरा लाभ सरकार को 7 से 10 वर्षों के बाद ही प्राप्त होगा. जब रियायतों का पहले से ही लाभ ले रही सभी कंपनियां अपने लाभ लेने की अवधि पूरी कर लेंगी.
सरकार ने 2017-18 के बजट प्रस्ताव में वृद्धि को गति प्रदान करने के लिए अनेक कदम उठाने की घोषणा की है. विदेशी कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक ऋण राशियों या बॉण्ड और सरकारी प्रतिभूतियों ने अर्जित ब्याज पर पांच प्रतिशत रियायती विद-होल्डिंग दर का प्रभार लिया जा रहा है. यह रियायत 30 जून, 2017 तक उपलब्ध है. वित्त मंत्री ने इस रियायत को 30 जून, 2020 तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया है. यह लाभ रूपया मूल्यवर्गित (मसाला) बॉण्ड पर भी दिया जा रहा है.
सरकार ने पिछले साल कुछ निश्चित शर्तों पर स्टार्ट अप्स को भी आयकर में रियायत दी थी. ऐसे स्टार्ट अप्स के संबंध में हानियों को बाद के वर्षों के लेखा-जोखा में समाहित करने के लिए मताधिकार के 51 प्रतिशत की निरंतर शेयरधारिता बनाये रखने की शर्त में इस शर्त के अधीन ढील दी गई है कि मूल प्रोमोटर/प्रोमोटरों की शेयरधारिता जारी रहेगी. इसके अलावा स्टार्ट अप्स को 5 में से 3 वर्षों के लिए लाभ से जुड़ी कटौती की रियायत को बदलकर 7 में से 3 वर्ष किया जा रहा है.
जेटली ने बैंकिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अनर्जक परिसंपत्तियों के लिए अनुमत प्रावधान को 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया है. इससे बैंकों की देनदारी कम होगी. उन्होंने सभी अनुसूचित बैंकों के अनुसार सभी गैर-अनुसूचित सहकारी बैंकों के एनपीए खातों के संबंध में एक्रूअल आधार की बजाय वास्तविक प्राप्ति पर प्राप्त होने वाले ब्याज पर कर लगाने का प्रस्ताव किया गया है. इससे ब्याज आय प्राप्त न होने पर भी कर भुगतान करने का कष्ट समाप्त होगा.
एलएनजी को ईंधन के साथ-साथ पेट्रो रसायन क्षेत्र के फील्ड स्टॉक के प्रयोग की व्यापकता पर विचार करते हुए वित्त मंत्री ने एलएनजी पर मूल सीमा शुल्क को 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव किया है.
घरेलू मूल्य संवर्द्धन को प्रोत्साहित करने तथा मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अपने भाषण में कुछ वस्तुओं के संबंध में सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क में परिवर्तन करने का प्रस्ताव किया है. इनमें से कुछ प्रस्ताव शुल्क प्रतिलोमन समाप्त करने के लिए भी है.
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