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This Article is From Oct 20, 2025

रोजगार और पलायन.... बिहारी की दुविधा

रंजन ऋतुराज
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    अक्टूबर 20, 2025 11:23 am IST
    • Published On अक्टूबर 20, 2025 10:40 am IST
    • Last Updated On अक्टूबर 20, 2025 11:23 am IST
रोजगार और पलायन.... बिहारी की दुविधा

बिहारी गरीब होता है और गरीब का कोई स्वाभिमान नहीं होता. गरीबी भी सापेक्ष होता है. कोई हमसे ज्यादा गरीब तो किसी के सामने हम गरीब. लेकिन बिहार से बाहर निकलते ही आप ना तो अमीर होते हैं और ना ही ब्राह्मण या,  क्षत्रिय या अन्य. आप बस एक गरीब बिहारी होते हैं, जिसका भारी पेट अपने राज्य में नहीं भर रहा है. हां , वहीं राज्य जिसके इतिहास के गौरव गाथा को पूरे विश्व में पढ़ाया जाता है कि भारत में मौर्य वंश से ज्यादा खुशीहाली कभी नहीं रही. लेकिन इतिहास का कोई महत्व नहीं होता. करीब 200 साल दरवाजे पर हाथी रहा, अब उस इतिहास से मेरे बेटे को कोई मतलब नहीं है. उसके लिए बढ़िया रहेगा की उसे अपनी विवेक बुद्धि से अपनी धरती पर एक नौकरी या व्यापार का माहौल मिले. 

लेकिन मुझे पता है की उसे एक दिन ट्रेन ही पकड़ना है. उस ट्रेन की दशा और दिशा उसका अभी तक का कर्म, भाग्य और तब का निर्णय बताएगा. लेकिन यह एक सच तो है की उसे ट्रेन ही पकड़ना है. करोड़ों लोग ट्रेन पकड़ के बाहर गए. वो फिर कभी वापस नहीं लौटे, पटना की सड़कों पर या तो 20 से नीचे के युवा मिलेंगे या फिर 55 से ज्यादा वाले. आप बिहार सरकार के किसी भी विभाग के इंजिनियर का डाटा उठा लीजिए. कोई भी बिहार से बाहर का पास आउट इंजिनियर नहीं मिलेगा. 

क्यों नही आते हैं लोग ? क्यों चिट्ठी पत्री और गूगल पे से ही माता-पिता का अंतिम क्रिया भी हो रहा है? क्यों आज भी राज्य की राजधानी पटना भारत के सबसे गंदा राजधानी का गौरव लिए निःशब्द है? क्यों वो सारे मध्यम / लघु और कुटीर उद्योग बंद हो गए ? केंद्र के पैसों से सड़क, बिजली और पानी मिलेगा लेकिन आपको अपने नए मेडिकल कॉलेज, मैनेजमेंट स्कूल के लिए वो शिक्षक नहीं मिलेगा. जिसके स्तर के लिए आप कभी जाने जाते थे. 

ऐसा क्यों है ?

कब तक मुड़ी गिनने का खेल होता रहेगा ? कब तक बिहार प्रगति का आखिरी डब्बा बन के ह्यूमन पावर सप्लायर स्टेट बना रहेगा ?  कोई तो रूप रेखा होगी अगले 25/50 साल में बिहार कैसा होगा? अगर कोई रूप रेखा नहीं है तो क्यों नही है ? क्यों इतनी बड़ी कुर्सी पर बैठ कर भी विजन नही है ? 

कहां हमारी गलती है और कहां आपकी गलती है ? 

बोलो ... मगध के ध्वज ...बोलो ...
बोलो … वैशाली की जनतंत्र … बोलो 
 

अस्वीकरण: रंजन ऋतुराज , पिछले 18 वर्षों से दालान नाम से विभिन्न सोशल मीडिया पर ब्लॉग लेखनी . पूर्व में टाटा ग्रुप में कार्यरत और शिक्षा से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री.

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