बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
- रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी सृजन के प्रभाव में काम कर रहे थे
- शायद नीतीश के अधिकारी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते
- सृजन के आकाओं की सत्ता के गलियारें में अच्छी पहुंच थी
पटना:
क्या अधिकारियों के कारण सृजन घोटाले में आलोचना झेल रहे हैं नीतीश कुमार? ये सवाल इसलिए प्रासंगिक हो गया है कि जब भी सृजन घोटाले का नाम आता है तब नीतीश कुमार के विरोधी और उनके समर्थक दबी जुबान में यही पूछते हैं कि जब 2013 की जुलाई में भागलपुर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीत कुमार ने पत्र लिखकर सृजन के माध्यम से घोटाले के पैसे के निवेश का मामला उठाया तब इस मामले की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में आखिर बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ पैर क्यों फूल रहे हैं. रविवार को भागलपुर के सैंडिस मैदान में राष्ट्रीय जनता दल की रैली में भी विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने संजीत कुमार के पत्र को ही आधार बनाकर नीतीश कुमार से एक नहीं कई सवाल किये. हालांकि रविवार की रैली से पांच दिनों पूर्व सोमवार को नीतीश कुमार ने इस पत्र के आधार पर हुई जांच में क्या हुआ उसके बारे में आश्वासन दिया था कि उनके अधिकारी इस संबंध में जल्द संवादाता सम्मलेन करेंगे लेकिन शायद उनके अधिकारी या तो उन्हें गंभीरता से नहीं लेते या उन्हें अपने बॉस की आलोचना में मजा आता है.
नीतीश सरकार की आर्थिक अपराध इकाई द्वारा भागलपुर में तब पदस्थापित एडीएम रैंक की अधिकारी जयश्री ठाकुर के ऊपर छापेमारी में 7 करोड़ 32 लाख का एक चेक जो बांका से निर्गत हुआ था वो सबौर स्थित सृजन महिला विकास सहयोग समिति में अपने अकाउंट में जमा कराया था. संजीत कुमार ने जो पत्र केंद्रीय वित्त मंत्री को 2013 में लिखा था उसका आधार इसी बात को बनाया गया था.
यह भी पढ़ें: तेजस्वी यादव बोले- 'नीतीश कुमार और सुशील मोदी दुर्जन हैं, उनका विसर्जन करना है'
इसके अलावा उनपर आय से अधिक सम्पति का भी मामला दर्ज हुआ. लेकिन संजीत ने सवाल उठाया कि रिज़र्व बैंक के लाइसेंस के बिना आखिर इतनी बड़ी राशि कैसे सृजन में जमा की गयी और सृजन के खाते में तीसरी पार्टी के चेक गलत तरीके से जमा किये जा रहे हैं. मतलब सरकारी पैसा तो नहीं जमा हो रहा है. वित्त मंत्रालय ने इसकी जांच के लिए रिज़र्व बैंक के पटना इकाई को भेजा जिसने निबंधक सहकारी समितियां- बिहार सरकार को जांच करने के लिए कहा. इस आदेश के बाद जिला अधिकारी भागलपुर ने दो सदस्यीय जांच समिति बनाई.
लेकिन जांच में जो दो सदस्य थे उन्होंने जांच के नाम पर लीपापोती की और ये कह कर रिपोर्ट दे दी कि सरकारी अधिकारी का सृजन में अकाउंट हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया कि जहां तक सृजन जैसी संस्था में करोड़ों जमा होने का सवाल है तब न्यूनतम राशि क्या होगी इसकी चर्चा है लेकिन अधिकतम राशि कुछ भी हो सकती है. जहां तक बैंक की तरह सृजन द्वारा पैसा जमा करने का आरोप है तब सृजन ने रिज़र्व बैंक के पास बैंकिंग के लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है इसलिए वो जमा ले सकती है. लेकिन ये रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी सवालों का जवाब देने की जगह हर बिंदु पर सृजन के प्रभाव में काम कर रहे थे. हालांकि इसी रिपोर्ट के आधार पर सृजन के पूरे कामकाज को खंगाला नहीं गया लेकिन अब सब जानते हैं कि वो चाहे आर्थिक अपराध इकाई हो या जिला अधिकारी द्वारा गठित जांच दल, सबने आंख में धूल झोंकी. लेकिन उसी आर्थिक अपराध इकाई को घोटाले के पिछले महीने उजागर होने पर फिर जांच का जिम्मा मिला.
हालांकि अब राज्य सरकार के पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हों या प्रधान सचिव के स्तर के अधिकारी, सार्वजानिक रूप से कोई इस पर सीबीआई जांच की आड़ में बात नहीं करना चाहता. लेकिन नीतीश कुमार इसी पत्र के आधार पर सबसे ज्यादा आलोचना के पात्र बने हैं. हालांकि उनके आलोचक भी मानते हैं कि भले ही उनके सहयोगी पार्टियों के नेता जमकर सृजन के पैसे पर रातोंरात फर्श से अर्श पर पहुंच गए लेकिन उनकी जानकारी में होता तो शायद ये नौबत नहीं आती. लेकिन जानकार मानते हैं कि सृजन के आका हों या जयश्री ठाकुर जैसे भ्रष्ट अधिकारी, सभी की पहुंच सत्ता के गलियारे तक थी जिसके कारण उन्होंने जांच को कभी तार्किक परिणति तक पहुंचने नहीं दिया.
VIDEO: 'सृजन' पर उठते सवाल
हालांकि इस संवादाता ने खबर को लिखने के क्रम में राज्य के प्रधान सचिव (सहकारिता), पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिवालय के अधिकारियों से इस रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध कराने का आग्रह किया लेकिन हफ्तों के इंतजार के बाद भी अभी तक अधिकारियों का रुख नकारात्मक ही रहा है.
नीतीश सरकार की आर्थिक अपराध इकाई द्वारा भागलपुर में तब पदस्थापित एडीएम रैंक की अधिकारी जयश्री ठाकुर के ऊपर छापेमारी में 7 करोड़ 32 लाख का एक चेक जो बांका से निर्गत हुआ था वो सबौर स्थित सृजन महिला विकास सहयोग समिति में अपने अकाउंट में जमा कराया था. संजीत कुमार ने जो पत्र केंद्रीय वित्त मंत्री को 2013 में लिखा था उसका आधार इसी बात को बनाया गया था.
यह भी पढ़ें: तेजस्वी यादव बोले- 'नीतीश कुमार और सुशील मोदी दुर्जन हैं, उनका विसर्जन करना है'
इसके अलावा उनपर आय से अधिक सम्पति का भी मामला दर्ज हुआ. लेकिन संजीत ने सवाल उठाया कि रिज़र्व बैंक के लाइसेंस के बिना आखिर इतनी बड़ी राशि कैसे सृजन में जमा की गयी और सृजन के खाते में तीसरी पार्टी के चेक गलत तरीके से जमा किये जा रहे हैं. मतलब सरकारी पैसा तो नहीं जमा हो रहा है. वित्त मंत्रालय ने इसकी जांच के लिए रिज़र्व बैंक के पटना इकाई को भेजा जिसने निबंधक सहकारी समितियां- बिहार सरकार को जांच करने के लिए कहा. इस आदेश के बाद जिला अधिकारी भागलपुर ने दो सदस्यीय जांच समिति बनाई.
लेकिन जांच में जो दो सदस्य थे उन्होंने जांच के नाम पर लीपापोती की और ये कह कर रिपोर्ट दे दी कि सरकारी अधिकारी का सृजन में अकाउंट हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया कि जहां तक सृजन जैसी संस्था में करोड़ों जमा होने का सवाल है तब न्यूनतम राशि क्या होगी इसकी चर्चा है लेकिन अधिकतम राशि कुछ भी हो सकती है. जहां तक बैंक की तरह सृजन द्वारा पैसा जमा करने का आरोप है तब सृजन ने रिज़र्व बैंक के पास बैंकिंग के लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है इसलिए वो जमा ले सकती है. लेकिन ये रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी सवालों का जवाब देने की जगह हर बिंदु पर सृजन के प्रभाव में काम कर रहे थे. हालांकि इसी रिपोर्ट के आधार पर सृजन के पूरे कामकाज को खंगाला नहीं गया लेकिन अब सब जानते हैं कि वो चाहे आर्थिक अपराध इकाई हो या जिला अधिकारी द्वारा गठित जांच दल, सबने आंख में धूल झोंकी. लेकिन उसी आर्थिक अपराध इकाई को घोटाले के पिछले महीने उजागर होने पर फिर जांच का जिम्मा मिला.
हालांकि अब राज्य सरकार के पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हों या प्रधान सचिव के स्तर के अधिकारी, सार्वजानिक रूप से कोई इस पर सीबीआई जांच की आड़ में बात नहीं करना चाहता. लेकिन नीतीश कुमार इसी पत्र के आधार पर सबसे ज्यादा आलोचना के पात्र बने हैं. हालांकि उनके आलोचक भी मानते हैं कि भले ही उनके सहयोगी पार्टियों के नेता जमकर सृजन के पैसे पर रातोंरात फर्श से अर्श पर पहुंच गए लेकिन उनकी जानकारी में होता तो शायद ये नौबत नहीं आती. लेकिन जानकार मानते हैं कि सृजन के आका हों या जयश्री ठाकुर जैसे भ्रष्ट अधिकारी, सभी की पहुंच सत्ता के गलियारे तक थी जिसके कारण उन्होंने जांच को कभी तार्किक परिणति तक पहुंचने नहीं दिया.
VIDEO: 'सृजन' पर उठते सवाल
हालांकि इस संवादाता ने खबर को लिखने के क्रम में राज्य के प्रधान सचिव (सहकारिता), पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिवालय के अधिकारियों से इस रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध कराने का आग्रह किया लेकिन हफ्तों के इंतजार के बाद भी अभी तक अधिकारियों का रुख नकारात्मक ही रहा है.
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
Srijan Scam, Nitish Kumar